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क्या जिम्मेदारियों को सम्भाल पाएंगे राकेश सिंह ?

Thursday - April 19, 2018 12:14 pm , Category : WTN HINDI

जबलपुर से सांसद राकेश सिंह को मध्यप्रदेश भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। दरअसल यह फैसला काफी चौकाने वाला है, क्योंकि निवृत्तमान अध्यक्ष नन्दकुमार सिंह चौहान का कार्यकाल अभी खत्म नहीं हुआ था। नन्दकुमार सिंह चौहान ने खुद ही पद से हटने की पहल की थी। 1980 में भाजपा के गठन के बाद राकेश सिंह मध्यप्रदेश भाजपा के 13वें प्रदेश अध्यक्ष हैं।

चुनावी साल में राकेश सिंह का चुना जाना उनके लिए काफी चुनौतियों भरा है। क्योंकि जहां एक तरफ भाजपा राज्य में लगातार 15 सालों से सत्ता में है, तो वहीं दूसरी तरफ केन्द्र में भी भाजपा सरकार को चार साल पूरे होने जा रहे हैं। ऐसे में राकेश सिंह की राह आसान नहीं है।
संघ और अमित शाह के करीबी राकेश सिंह भाजपा के कद्दावर युवा नेता रहे हैं। 2004 से राकेश सिंह लगातार जबलपुर से सांसद हैं। ऐसे में काफी अनुभवी नेता पर भाजपा ने आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव के लिए दांव खेला है। राकेश सिंह महाकौशल क्षेत्र से आते हैं, और इस क्षेत्र से भाजपा काफी फायदा राकेश सिंह के होने से उठा सकती है।

राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने कई लक्ष्यों पर निशाना साधा है। सबसे पहले भाजपा ने जातिगत समीकरणों पर ध्यान दिया है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछड़ा वर्ग से आते हैं, ऐसे में सवर्णों को साधने के लिए भाजपा ने राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाकर दांव खेला है। एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट के आदेश, उसके बाद मचे घमासान और सवर्णों की नाराजगी के कारण हो सकता है कि भाजपा ने राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाकर सवर्णों को साधने की कोशिश की हो। ब्राह्मण, राजपूत और कायस्थ भाजपा के वोटबैंक रहे हैं, लेकिन यदि यह वोट बैंक नाराज होता है तो भाजपा को आने वाले विधानसभा चुनाव में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भाजपा ने राकेश सिंह को अध्यक्ष बनाकर एक बड़े धड़े को साधने की कोशिश की है।

बात करें नन्दकुमार सिंह चौहान की तो उनका विवादों से नाता रहा है। उनके कुछ बयानों के चलते भाजपा को परेशानी का सामना करना पड़ा था। ऐसे में हो सकता है कि खुद अमित शाह ने मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले नन्दकुमार सिंह चौहान से पद से हटने कहा हो ताकि नये चेहरे और नई टीम के साथ चुनाव में उतरा जाए।

ऐसा नहीं है कि अकेले राकेश सिंह का नाम मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष की दौड़ में था। राकेश सिंह के अलावा नरेन्द्र सिंह तोमर, नरोत्तम मिश्रा, भूपेन्द्र सिंह और राजेन्द्र शुक्ल के नाम चर्चा में थे। लेकिन अंतिम मुहर राकेश सिंह के नाम पर ही लगी। चुनाव में जीत की जिम्मेदारी के साथ-साथ राकेश सिंह की जिम्मेदारी पार्टी में सभी को साथ लेकर चलने की भी होगी।
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