BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
N
W
T
logo
Breaking News

चीन की ‘चालाक चाल’, सावधान रहे भारत!

Saturday - August 11, 2018 12:16 pm , Category : WTN HINDI

पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीप का ‘त्रिकोण’ बनाकर चीन की भारत को घेरने की तैयारी

AUG 11 (WTN) – भारत के दक्षिण में स्थित छोटे से देश मालदीप से इन दिनों भारत के ऐतिहासिक रिश्ते हाशिये पर चल रहे हैं। सालों से भारत और मालदीप में राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक सम्बन्ध रहे हैं। लेकिन मालदीप में सत्ता परिवर्तन के बाद चीन की वहां पर घुसपैठ भारत के लिए चिंता का कारण बन गई है। 

ताजा घटनाक्रम में मालदीव सरकार ने भारत सरकार से साफ कह दिया है वो अपने सैन्य हेलीकॉप्टर और सैनिकों को मालदीप से हटा ले। बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर मालदीप ऐसा क्यों कर रहा है। क्या चीन वन बेल्ट,वन रोड परियोजना को साकार करने के लिए मालदीव पर दबाव बना रहा है या फिर चीन भारत से डरा हुआ है।

दक्षिण एशिया की राजनीति के जानकारों का कहना है कि चीन अपनी विस्तारवादी नीति के कारण हिंद महासागर पर नियंत्रण स्थापित करना चाहता है। इसके लिए चीन कुछ भी कर सकता है। इसका उदाहरण है कि चीन ने श्रीलंका को कर्ज के जाल में फंसा कर हंबनटोटा बंदरगाह पर नियंत्रण हासिल कर लिया है। चीन को लगता है कि श्रीलंका के बाद मालदीव पर अपने प्रभाव को बढ़ाकर चीन भारत पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी साल जनवरी-फरवरी के महीने में जब मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने विरोधी नेताओं की रिहाई के आदेश दिए तो अब्दुल्लाह यामीन सरकार ने उस आदेश को नहीं माना था। इतना ही नहीं यामीन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के जजों को गिरफ्तार देश में आपातकाल की घोषणा कर दी थी।

मालदीप में आपातकाल लगने के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने राष्ट्रपति अब्दुल्लाह यामीन से विरोधी दलों के नेताओं को रिहा करने की अपील की थी। वहीं भारत सरकार ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वो किसी देश के आंतरिक मामलों में दखल देने के खिलाफ है। लेकिन यामीन को लोकतंत्र की मूल भावना को समझने की जरूरत है। 

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत में मालदीव के राजदूत अहमद मोहम्मद के मुताबिक भारत सरकार की तरफ से उनके देश को दो सैन्य हेलीकॉप्टर मुहैया कराए गए थे। लेकिन अब उसका उपयोग नहीं है। इस बारे में मालदीव सरकार का कहना है कि मौजूदा समय में उनके देश के पास आधारभूत क्षमताओं में वृद्धि हुई है और उन्हें ऐसा लगता है कि अब किसी बाहरी देश की मदद की जरूरत नहीं है। इतना ही नहीं मालदीप में भारत के सैनिकों को भी वापस जाने को मालदीप ने कह दिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत और मालदीव विशिष्ट आर्थिक ज़ोन की सुरक्षा के लिए संयुक्त रूप से गश्त करते हैं। भारत के दक्षिण पश्चिम कोने से मालदीव महज 400 किलोमीटर की दूरी पर है। चीन इस देश का सामरिक महत्व अच्छे से जानता है। इधर भारतीय नौसेना के एक प्रवक्ता का कहना है, “हम अभी वहां मौजूद हैं। जहां तक चीन और मालदीव के बीच सम्बन्ध की बात है या भारतीय सैनिकों को हटाने की बात है, भारतीय विदेश मंत्रालय और मालदीव के बीच बातचीत जारी है।“ 

चीन ने मालदीव की सामरिक स्थिति और वन बेल्ट, वन रोड की कामयाबी के लिए साल 2011 में मालदीप की राजधानी माले में दूतावास खोला है। जानकारी के मुताबिक इसके साथ ही मालदीव के विकास के लिए भी चीन भारी भरकम निवेश कर रहा है। जानकारों का कहना है कि मालदीव, श्रीलंका और पाकिस्तान के त्रिकोण के जरिए चीन, भारत को घेरने की पूरी कोशिश कर रहा है। इसके साथ ही मध्य पूर्व के देशों के साथ साथ अफ्रीकी देशों के साथ व्यापार को भी प्रभावित करने की चीन की रणनीति है।

भारत सरकार को चाहिए की चीन की मालदीप में गतिविधियों पर पूरी नज़र रखना चाहिए। चीन की नीति हमेशा से ही विस्तारवाद की रही है। चीन, पाकिस्तान, श्रीलंका और मालदीप के माध्यम से भारत की सामरिक और आर्थिक रूप से घेराबंदी करने के फिराक में है। ऐसे में भारत को अपनी विदेश नीति को मजबूत करते हुए श्रीलंका और मालदीप दोनों से अपने पुराने राजनीतिक और आर्थिक सम्बन्ध सुधारने चाहिए ताकि चीन इस इलाके में पैर ना पसार सके। 
Leave a Comment
* Name
* Email (will not be published)
*
* - Required fields
 

RELATED NEWS