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अपने बयान को लेकर फ़िर से ‘दुविधा’ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान!

Friday - October 5, 2018 10:31 am , Category : WTN HINDI
एससी-एसटी एक्ट मामले में शिवराज सिंह चौहान के बयान पर स्थिति ‘साफ़’, देना पड़ेगा जवाब
एससी-एसटी एक्ट मामले में शिवराज सिंह चौहान के बयान पर स्थिति ‘साफ़’, देना पड़ेगा जवाब

पुलिस ने किया ‘साफ़’, एससी-एसटी एक्ट पर दिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान का नहीं है कोई विधिक आधार

OCT 05 (WTN) – बालाघाट ज़िले में एससी-एसटी एक्ट पर दिये अपने बयान के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को शर्मिंदा होना पड़ा है। आपको याद होगा कि कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बालाघाट ज़िले में बयान दिया था कि मध्य प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ़्तारी नहीं होगी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर भाजपा समर्थकों ने प्रचार करना शुरू कर दिया था कि मध्य प्रदेश में अब एससी-एसटी एक्ट में जांच के बाद ही गिरफ़्तारी होगी।
 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस बयान के बाद हर कहीं चर्चा शुरू हो गई थी कि क्या केन्द्र के बनाए क़ानून में किसी भी तरह के संशोधन का अधिकार क्या राज्य सरकार को है? क्या शिवराज सिंह चौहान के दिये बयान का कोई विधिक आधार है? इन तमाम चर्चाओं के बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खण्डपीठ में इस पूरे मामले में स्थिति साफ़ हो गई है। हाईकोर्ट की एकल पीठ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के इस बयान को लेकर मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थिति स्पष्ट कर दी।
 
इस मामले में शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक ने शपथ पत्र में साफ़ कहा है कि एससी-एसटी एक्ट में गिरफ़्तारी से पहले जांच को लेकर कोई प्रशासनिक आदेश नहीं है। इतना ही नहीं शपथ पत्र में ये भी कहा गया है कि इस मामले में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बयान का कोई भी विधिक महत्व नहीं है। केन्द्र द्वारा बनाए गये एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ही किसी भी आरोपी की गिरफ़्तारी होगी और उस पर कार्रवाई होगी।
 
इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता विशाल मिश्रा और शासकीय अधिवक्ता ने यह कहते हुए कोर्ट से समय मांगा कि शासन से ज़रूरी दिशा-निर्देश लेना है और नया जवाब प्रस्तुत करना है। कोर्ट ने अब शासन से मुख्यमंत्री के बयान पर जवाब मांगा है। इस मामले की फ़िर से सुनवाई 11 अक्टूबर को होगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दरअसल पूरा मामला क्या है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक अग्रिम जमानत याचिका स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अतेन्द्र सिंह रावत ने छेड़छाड़ और एट्रोसिटी एक्ट के तहत दायर की थी। इस मामले में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बालाघाट ज़िले में एक सभा के दौरान एट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया था कि एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ़्तारी नहीं होगी। अधिवक्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री का वह बयान अख़बारों में भी प्रकाशित हुआ था, लेकिन इसके बाद भी पुलिस आरोपी को गिरफ्तार करना चाहती है, जबकि पूरा केस झूठा है।
 
फरियादी के अधिवक्ता के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने 1 अक्टूबर को जवाब मांगा कि क्या सीएम ने ऐसा बयान दिया है और पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी इस मामले में शपथ पत्र पेश करें और एक्ट के सम्बन्ध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें। इसी मामले में पूरी स्थिति स्पष्ट करते हुए शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक ने अपना शपथ पत्र प्रस्तुत किया और साफ़ किया कि मुख्यमंत्री के दिये गये बयान का कोई भी विधिक महत्व नहीं है।
 
तो हाईकोर्ट में शिवुपरी के एसपी के शपथ पत्र से साफ़ हो गया है कि एससी-एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ़्तारी का जो बयान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिया था उसका कोई भी विधिक महत्व नहीं है। कांग्रेस काफ़ी समय से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘घोषणा मंत्री’ कहती आई है। ऐसे में जबकि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एट्रोसिटी एक्ट में दिये गये बयान का कोई विधिक आधार ही नहीं है, तो कांग्रेस फ़िर से शिवराज सिंह चौहान पर तंज़ कसने से दूर नहीं रहेगी।
 
लेकिन बड़ा सवाल तो यही है कि आख़िर शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा बयान दिया ही क्यों था? शिवराज सिंह चौहान सालों तक सांसद रहे हैं साथ ही वे 10 साल से ज़्यादा समय से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उनके पास संसद और विधानसभा का काफ़ी लम्बा अनुभव है। इतने अनुभवी राजनेता होते हुए केन्द्र के क़ानून के विषय में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का दिया गया बयान बहुत चर्चा में रहा था।
 
कहा जा रहा है कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के ख़िलाफ़ उग्र हो रहे आंदोलन को तत्कालीन रूप से शांत करने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ऐसा बयान दिया था जिससे कुछ समय के लिए आंदोलन की गति धीमी पड़ जाए। सूत्रों के मुताबिक़ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर केन्द्र से दवाब था कि एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद उग्र हो रहे आंदोलन को किसी भी तरह से शांत किया जाए। खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह इतने समझदार हैं और जानते हैं कि संसद द्वारा बनाए किसी क़ानून में राज्य की कितनी दखलंदाजी हो सकती है। अब देखना होगा कि क्या कुछ प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की रहती है।

 
  
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