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यदि आप नहीं जानते हैं वक़ील और बैरिस्टर में अंतर, तो ये लेख ज़रूर पढ़िए!

Saturday - October 6, 2018 12:33 pm , Category : WTN HINDI
वक़ील और बैरिस्टर के कामकाज के तरीक़े होते हैं अलग-अलग
वक़ील और बैरिस्टर के कामकाज के तरीक़े होते हैं अलग-अलग

वक़ीलों का ग्राहकों से होता है सीधा सम्पर्क, जबकि बैरिस्टर करते हैं ग्राहकों की अदालत में पैरवी

OCT 06 (WTN) – आपने कई बार वक़ील और बैरिस्टर शब्दों के बारे में तो सुना ही होगा। आप इतना तो जानते ही होंगे कि ये दोनों ही क़ानून से सम्बन्धित हैं। लेकिन इन दोनों के बीच क्या अंतर है, यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं।
 
वक़ील - वक़ील वे होते हैं जिन्होंने क़ानून सम्बन्धित पढ़ाई की होती है और उनके पास क़ानून में स्नातक की उपाधि होती है और ये पेशे के रूप में अभ्यास भी करते हैं। इन पेशेवरों को क़ानूनी मामलों में प्रशिक्षित किया जाता है। वक़ील एक ऐसा शब्द है जो कि उन लोगों के लिए उपयोग में लाया जाता जो अलग-अलग प्रकार के पेशों में क़ानून के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। वक़ील क़ानूनी मामलों पर अपनी राय देते हैं, ग्राहकों को उनके अधिकारों और दायित्वों पर सलाह देते हैं, क़ानून अदालतों में ग्राहकों का प्रतिनिधित्व करते हैं, और विवादों के मामलों में बातचीत करते हैं।
 
बैरिस्टर – बैरिस्टर शब्द का उपयोग वकीलों के एक वर्ग के लिए किया जाता है। ये वे वक़ील हैं जिनके पास बार में निवेदन करने की अनुमति है इसका अर्थ है कि एक बैरिस्टर को न्यायालय में अपने ग्राहक के पक्ष में खड़ा होने और बहस करने की अनुमति है। एक बैरिस्टर का मुख्य काम अदालत में अपने ग्राहक के लिए खड़ा होना और उसकी वक़ालत करना है। बैरिस्टर्स का अपने ग्राहकों से सीधा सम्पर्क नहीं होता है क्योंकि ये जनता को सलाह देने के लिए आमतौर पर उपलब्ध नहीं होते हैं। इस तरह वक़ील जो कि बार एसोसिएशन के सदस्य हैं उन्हें बैरिस्टर्स कहा जाता है
 
वक़ील और बैरिस्टर में अंतर

वक़ील एक कॉमन शब्द है जिसमें वक़ील, अधिवक्ता और बैरिस्टर सभी आते हैं।

वक़ील और बैरिस्टर दोनों के पास क़ानूनी योग्यता होती है, लेकिन वक़ील अपने ग्राहकों से सीधे

सम्पर्क में रहता है जबकि बैरिस्टर के मामले में यह सम्पर्क सीमित रहता है।

बैरिस्टर वकीलों से मामलों को सुनते हैं और फ़िर उनका सर्वेक्षण भी करते हैं जिसके बाद वे अपने क्लाइंट के लिए अदालत में पैरवी भी करते हैं।
 
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