BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RELIGION SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS BIG MEMSAAB 2017 BUDGET 2017 FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES Mahakal Ke Darshan
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
N
W
T
logo
Breaking News

विश्लेषण: लचीली व्यवस्था के कारण बैंकों के साथ हुई हज़ारों करोड़ रुपयों की धोखाधड़ी

Wednesday - October 10, 2018 11:26 am , Category : WTN HINDI
एसबीआई में पिछले 6 महीने में क़रीब 5,555 करोड़ रुपयों की धोखाधड़ी
एसबीआई में पिछले 6 महीने में क़रीब 5,555 करोड़ रुपयों की धोखाधड़ी

एसबीआई में हुई 1,329 मामलों में 5,555.48 करोड़ रुपयों की बैंकिंग धोखाधड़ी

OCT 10 (WTN) – आप बड़े विश्वास के साथ बैंकों में अपनी मेहनत की कमाई को रखते हैं। लेकिन क्या आपका पैसा वहां पर सुरक्षित है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि समय-समय पर बैंकों के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आ रहे हैं जिससे कि बैंकों को हज़ारों करोड़ रुपयों का नुकसान उठाना पड़ रहा है, और इस नुकसान को पूरा करने के लिए बैंक अपने ग्राहकों से तरह-तरह के शुल्क वसूलते रहते हैं जिसका ख़ामियाज़ा आम लोगों को उठाना पड़ता है।
 
ताज़ा घटनाक्रम में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई में हज़ारों करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इसी वित्तीय वर्ष के पहले छह महीने के दौरान कुल 5,555.48 करोड़ रुपए की बैंकिंग धोखाधड़ी के 1,329 मामले एसबीआई में सामने आए हैं। मध्य प्रदेश के नीमच निवासी आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने जब सूचना के अधिकार के तहत यह जानकारी एसबीआई से मांगी तो यह पूरा मामला सामने आया।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, भारतीय स्टेट बैंक को इस वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही यानि कि अप्रैल, मई और जून के महीने तक में कुल 669 मामलों में 723.06 करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा है। वहीं दूसरी तिमाही यानि कि जुलाई, अगस्त और सितम्बर महीने के दौरान कुल 660 मामलों में 4832.42 करोड़ रुपये की बैंकिंग धोखाधड़ी हुई है। इस मामले में जब एसबीआई के पूछा गया कि इस बैंकिंग धोखाधड़ी से खुद बैंक को कितना वित्तीय नुकसान हुआ, तो इस पर बैंक का जवाब था कि इस नुकसान की रक़म का परिमाण तय नहीं किया जा सकता है।
 
वही जब आरटीआई कार्यकर्ता ने एसबीआई से यह जानना चाहा था कि आख़िर कितने ग्राहक बैंकिंग धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं और इस वजह से उन्हें कितनी रक़म गंवानी पड़ी है, तो इस बारे में एसबीआई का कहना है, “चूंकि इस तरह की जानकारी उसके द्वारा सामान्य तौर पर इकट्ठी नहीं की जाती है। इसलिए सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के सम्बद्ध प्रावधानों के तहत उसे इसके ख़ुलासे से छूट प्राप्त है।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश की विभिन्न बैंकों में पिछले पांच सालों में क़रीब एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के क़रीब 23,000 बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक़, अप्रैल 2017 से एक मार्च, 2018 तक 5,152 बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए। वहीं 2016-17 में यह आंकड़ा 5,000 से अधिक था। केंद्रीय बैंक के मुताबिक़ अप्रैल, 2017 से एक मार्च, 2018 के दौरान सबसे ज़्यादा 28,459 करोड़ रुपये के बैंक धोखाधड़ी के मामले सामने आए। वहीं 2016-17 में 5,076 मामलों में बैंकों के साथ 23,933 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई थी।
 
आपको बता दें कि साल 2013 से एक मार्च, 2018 के दौरान एक लाख रुपये या उससे ज़्यादा के बैंक धोखाधड़ी के कुल 23,866 मामलों का पता चला है। इन पूरे मामलों में कुल 1,00,718 करोड़ रुपये की राशि फंसी हुई है। रिज़र्व बैंक के अनुसार साल 2015-16 में बैंकों के साथ धोखाधड़ी के 18,698 करोड़ रुपये के 4,693 मामले सामने आए थे तो साल 2014-15 में 19,455 करोड़ रुपये के 4,639 मामले पकड़े गए थे। 
 
जैसा कि आप जानते हैं कि विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चौकसी जैसे लोगों के बैंक से कर्ज़ लेकर देश छोड़कर भाग जाने समेत कई बैंकिंग घोटाले अब तक सामने आ चुके हैं। इस सबके कारण केन्द्र की मोदी सरकार कांग्रेस के निशाने पर है। इस बारे में कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार इन घोटालेबाजों से मिली हुई है, वहीं भाजपा का कहना है कि यह सारे लोन कांग्रेस शासन के समय दिए गए हैं।
 
कौन सी सरकार इसके लिए ज़िम्मेदार है यह जानना तो ज़रूरी है ही, लेकिन इससे ज़्यादा ज़रूरी है कि आम जनता को अपने मेहनत की कमाई नहीं गंवाना पड़े। विजय माल्या और नीरव मोदी जैसे मामलों से सबक लेते हुए केन्द्र सरकार को ऐसे कड़े क़ानून बनाने चाहिए जिससे बैंकों से धोखाधड़ी पर लगाम लग सके और यदि कोई बैंकों के साथ धोखाधड़ी करे, तो उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिले ताकि कभी भी कोई बैंकों के साथ धोखाधड़ी की हिम्मत ना जुटे सके।
 
Leave a Comment
* Name
* Email (will not be published)
*
* - Required fields