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बड़ा सवाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों की घोषणा में आख़िर क्यों ‘पिछड़’ गई कांग्रेस?

Saturday - October 13, 2018 2:41 pm , Category : WTN HINDI
दिग्गज नेताओं में ‘गुटबाज़ी’ के कारण नहीं बन पा रही है ‘एक नाम’ पर ‘सहमति’
दिग्गज नेताओं में ‘गुटबाज़ी’ के कारण नहीं बन पा रही है ‘एक नाम’ पर ‘सहमति’

काफ़ी ‘सोच समझकर’ टिकट वितरण की ‘रणनीति’ में है कांग्रेस
 
OCT 13 (WTN) – मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए तारीख़ों का ऐलान हो चुका है और सभी की निगाहें राजनीतिक दलों की तरफ़ लगी हुईं हैं कि आख़िर वे अपनी प्रत्याशियों की सूची कब जारी करती हैं। काफ़ी पहले कांग्रेस ने कहा था कि वो अपने प्रत्याशियों की घोषणा जल्द ही कर देगी जिससे कि प्रत्याशियों की चुनाव प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सके। लेकिन लगता है कि कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची जारी करने में पिछड़ गई है। आख़िर क्या कारण है जिसके कारण कांग्रेस अभी तक प्रत्याशियों के के नाम फ़ाइनल नहीं कर पाई है। इसी पर डालते हैं एक नज़र।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का कहना है कि दशहरे की छुट्टियों के कारण प्रत्याशियों की लिस्ट आने में देर हो गई है और अब कांग्रेस की पहली सूची दशहरे के बाद ही जारी होगी। कमलनाथ का कहना है कि कई सीटों पर नाम लगभग फ़ाइनल किये जा चुका हैं, लेकिन कुछ नामों पर आम सहमति बनने के बाद प्रत्याशियों की सूची को दशहरे के बाद फ़ाइनल किया जाएगा।
 
लेकिन आख़िर सवाल यही है कि कांग्रेस को प्रत्याशियों की घोषणा करने में समय क्यों लग रहा है। वैसे कमलनाथ ने कल मीडिया से चर्चा के दौरान कहा था कि भाजपा के कई नेता कांग्रेस के सम्पर्क में हैं और जल्द ही कई भाजपा नेता कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। कहा जा रहा है कि जिन सीटों पर कांग्रेस तीन या चार बार से लगातार हार रही है वहां पर वो किसी ऐसा नेता को टिकट दे सकती है जो कि भाजपा से नाराज़ होकर कांग्रेस में शामिल होगा। सम्भावना है कि कांग्रेस की सूची फ़ाइनल इसलिए ही नहीं हुई है क्योंकि कांग्रेस को कुछ भाजपा नेताओं के कांग्रेस में आने का इंतज़ार है। भाजपा से टिकट नहीं मिलने के स्थिति में वर्तमान विधायक और कुछ कद्दावर नेता कांग्रेस का दाम थाम सकते हैं, ऐसे में हो सकता है कांग्रेस कमज़ोर सीटों पर ऐसे लोगों को मौका दे।
 
प्रत्याशियों के नामों में देरी की दूसरी वज़ह यह भी है कि कांग्रेस इस बार काफ़ी सोच समझकर टिकट देने के मूड में है। लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस की कोशिश होगी कि किसी नेता कि सिफारिश के जगह ऐसे व्यक्ति को टिकट दिया जाए जिसके जीतने की सम्भावना हो। कहा जा रहा है कि स्थानीय स्तर पर हर तरह की गुटबाज़ी को ख़त्म करने के बाद ही कांग्रेस टिकट वितरण कर सकती है।
 
कहा ऐसा भी जा रहा है कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के इस बयान के बाद से कांग्रेस सचेत हो गई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि जिन कांग्रेसी नेताओं को विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलेगा वे समाजवादी पार्टी में आएं, सपा उन्हें टिकट देगी। यूपी की सीमा से लगे ज़िलों में समाजवादी पार्टी की अच्छी पकड़ है, हो सकता है कि कांग्रेस इसी रणनीति में हो कि यहां पर काफ़ी विचार करने के बाद ही टिकट वितरित किया जाए नहीं तो नाराज़ नेता पार्टी छोड़कर कांग्रेस में जा सकते हैं जिससे कि कांग्रेस का नुकसान निश्चित है।
 
टिकट वितरण में देरी का एक बड़ा कारण बड़े नेताओं के बीच गुटबाज़ी भी है। मध्य प्रदेश कांग्रेस में गुटबाज़ी कोई नई बात नहीं है। प्रदेश स्तर पर मध्य प्रदेश में जितने नेता हैं उतने ही गुट हैं। सभी बड़े नेता जैसे दिग्विजय सिंह, कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया, अजय सिंह, अरुण यादव और कांतिलाल भूरिया अपने-अपने समर्थकों को टिकट दिलाने की पूरी कोशिश करेगे, ऐसे में सभी नेताओं के बीच सामंजस्य बैठना और किसी एक नाम पर सहमति होना काफ़ी मुश्किल है।
 
खैर कारण जो भी हो, किसी ना किसी कारण से कांग्रेस अपने प्रत्याशियों की घोषणा करने में पीछे रह गई है। सूची जारी ना होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बताया जा रहा है कई सीटों पर एक नाम पर सहमति नहीं बनना। अब देखना होगा कि आख़िर कब तक कांग्रेस अपनी पहली सूची जारी करती है और टिकट वितरण के बाद नाराज़ नेताओं को कैसे शांत कराती है।
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