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जानिए साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिये गये ‘ऐतिहासिक फ़ैसले’

Wednesday - January 2, 2019 3:08 pm , Category : WTN HINDI
कई ‘महत्वपूर्ण’ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने दिये साल 2018 में फ़ैसले
कई ‘महत्वपूर्ण’ मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने दिये साल 2018 में फ़ैसले

व्यभिचार और सबरीमाला मन्दिर जैसे ‘संवेदनशील’ मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों पर जमकर हुई चर्चा

JAN 02 (WTN) – साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के कई ऐतिहासिक फ़ैसले देश में चर्चा का विषय रहे। सुप्रीम कोर्ट के क्या थे यह ऐतिहासिक फ़ैसले आइये जानते हैं?
 
समलैंगिकता पर निर्णय
इस साल अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि सहमति से समलैंगिक सम्बन्ध बनाए जाने पर इसे अपराध नहीं माना जाएगा। अपने फ़ैसले में कोर्ट ने आईपीसी की धारा 377 को रद्द कर दिया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईपीसी की धारा 377 के तहत कोई दो व्यक्ति सहमति या असहमति से समलैंगिक यौन सम्बन्ध बनाता था तो उसे अपराध माना जाता था।
 
व्यभिचार पर ऐतिहासिक फ़ैसला
सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में आईपीसी की धारा 497 (अडल्टरी) को भी असंवैधानिक घोषित कर दिया। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि आईपीसी की धारा 497 महिला के सम्मान के ख़िलाफ़ है और पति कभी भी पत्नी का मालिक नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फ़ैसले के बाद शादी के बाद किसी और से शारीरिक सम्बन्ध अब अपराध की श्रेणी में नहीं आते हैं।

अपने फ़ैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी के बाहर के सम्बन्धों पर पति और पत्नी दोनों का बराबर अधिकार है। किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से यौन सम्बन्ध बनाना अपराध नहीं है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आईपीसी की इस धारा में शादी के बाद किसी दूसरे व्यक्ति की पत्नी के साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाने पर शारीरिक सम्बन्ध बनाने वाले पुरुष को ही सजा का प्रावधान था, लेकिन महिलाओं को ऐसे अपराध में दण्ड से मुक्त रखा गया था।
 
दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल का मामला
उधर लम्बे समय से चली आ रही दिल्ली सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच जंग पर फ़ैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "दिल्ली के उपराज्यपाल संवैधानिक रूप से चुनी हुई सरकार की 'सहायता और सलाह' को मानने के लिए बाध्य हैं। दिल्ली के शासन की असली शक्तियां निर्वाचित प्रतिनिधियों के पास हैं और इनके विचार और निर्णय का सम्मान होना चाहिए।"

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उप राज्यपाल भूमि, पुलिस, सार्वजनिक शांति और मतभिन्नता के कारण वह जिन मामलों को राष्ट्रपति के पास भेजते हैं, इन्हें छोड़कर बाकी सभी मामलों में मंत्रिपरिषद से सलाह और सहायता लेने के लिए बाध्य हैं।
 
आधार पर फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने इस साल अपने एक महत्वपूर्ण फ़ैसले में आधार को संवैधानिक रूप से वैध बताया। अपने निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “आधार को मोबाइल नम्बर और बैंक अकाउंट से जोड़ना ज़रूरी नहीं है। आधार को पैन कार्ड से जोड़ना ज़रूरी है। प्राइवेट कम्पनियां किसी की भी पहचान के लिए आधार नहीं मांग सकती हैं। स्कूल भी एडमिशन के लिए आधार कार्ड को नहीं मांग सकते हैं, उनको दूसरे दस्तावेजों के आधार पर एडमिशन देना होगा। CBSE, NEET और UGC जैसी परीक्षाओं के लिए भी आधार अनिवार्य नहीं है। छोटे बच्चों को आधार कार्ड नहीं होने पर सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा।”
 
सबरीमाला मन्दिर में हर उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले में केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को मंजूरी दे दी गई। इस मामले में कोर्ट कहा, “महिलाओं का मंदिर में प्रवेश न मिलना उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है।” कोर्ट ने अपने निर्णय में 10 से 50 वर्ष की हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दे दी।