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आप भी उठाइये रेलवे के लक्जरी कोच का ‘आनंद’!

Monday - January 7, 2019 11:00 am , Category : WTN HINDI
रेलवे के लक्जरी सैलून का हो रहा कमर्शियल यूज
रेलवे के लक्जरी सैलून का हो रहा कमर्शियल यूज

राजस्व जुटाने रेलवे ने मंत्रियों-अधिकारियों के लक्जरी सैलून को उतारा पटरियों पर

JAN 07 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि ट्रेन में किसी भी तरह की ज्वलनशील सामग्री ले जाना दण्डनीय अपराध है। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि आप अब ट्रेन में ही खाना बना सकते हैं तो आपको सुनकर आश्चर्य होगा। दरअसल आप सभी ने महसूस किया होगा कि ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों को तरह-तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
 
भारतीय ट्रेनों में यात्रियों को ना तो ट्रेन में बैठने की सही जगह मिलती है और ना ही खाने का सही सामान। लेकिन अब आपको जानकर खुशी होगी कि भारतीय रेल ने आपको ट्रेन में ही खाना बनाने की सुविधा देना शुरू कर दिया है। रेलवे द्वारा अब ट्रेनों में सैलून कोच चलाए जा रहे हैं। इन सैलून कोच में पूरी तरह से बेडरूम वाला माहौल होता है और साथ ही किचन भी मिलता है जिसमें यात्री खुद या किसी शेफ से खाना बनवा सकता है।

हालांकि रेलवे इन सैलून कोच का ज़्यादा किराया वसूल करता है, लेकिन रेलवे का दावा है कि इससे यात्री का सफ़र आरामदायक रहता है और उसे घर जैसा अनुभव होगा। रेलवे अभी शुरू में ऐसे कुछ कोच ही चला रहा है। रेलवे का मक़सद धीरे-धीरे ऐसे लग्जरी कोच में सफ़र को बढ़ावा देना है। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने जब IRCTC को इन सैलून के कॉमर्शियल यूज की मंज़ूरी दे दी थी, उसके बाद इन्हें यात्रियों के लिए इसे बुक किया जा रहा है।

सबसे पहले सैलून कोच की सुविधा पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से कटरा के लिए रवाना हुई जम्मू मेल में शुरू की गई थी। इस सुविधा की बुकिंग ऑनलाइन भी की जा सकती है। इस सैलून की बुकिंग क़ीमत क़रीब 2 लाख रुपए है।  
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल मार्च में IRCTC ने एसी सैलून कोच, अटैच्ड बाथरूम और वैलेट सर्विस के साथ आम जनता को शुल्क लेकर उपलब्ध कराने का फ़ैसला किया था। पहले ये सैलून केवल रेलवे अधिकारियों के लिए रिज़र्व रहते थे। जानकारी के मुताबिक़, भारतीय रेलवे के पास कुल 336 सैलून है, जिसमें 62 वातानुकूलित सैलून हैं।
 
अभी तक भारतीय रेलवे के सैलून का प्रयोग, रेलमंत्री, रेल राज्यमंत्री, रेलवे बोर्ड अध्यक्ष, उनके कार्यालय के सीनियर अधिकारी, आरडीएसओ के डीजी और एडीजी, रेलवे कारखानों के प्रमुखों के साथ मुख्य रेल संरक्षा आयुक्त, रेल आरक्षा आयुक्त, ज़ोनल मैनेजर और डीआरएम के समकक्ष वरिष्ठ अधिकारी करते हैं। लेकिन अब ये लक्जरी सैलून आम यात्री भी उपयोग कर रहे हैं।
 
वैसे अभी यह निर्धारित नहीं है कि इन लक्जरी कोचों को किस रूट पर ज़्यादा चलाया जाएगा, लेकिन कहा जा रहा है कि जिस रूट पर विदेशी सैलानियों का ज़्यादा आना जाना है उन रूट्स पर इन लक्जरी सैलून कोच को ज़्यादा चलाया जा सकता है जिससे उनका सही उपयोग हो सके।
 
आप जानना चाहते होंगे कि आखिर ये सैलून कोच होते कैसे हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें इन सैलून कोच में दो बेडरूम होते हैं जिसमें आप टीवी भी देख सकते हैं। मास्टर बेडरूम में डबल बेड और दूसरे बेडरूम में शेल्फ के आकार के दो बेड होते हैं जिसमें एक बेड नीचे और एक उसके ऊपर होगा।
 
सैलून कोच में 6 यात्रियों के लिए अलग सोने की व्यवस्था और दोनों बेडरूम के साथ बाथरूम अटैच रहता है। इसमें लगेज रैक के साथ-साथ लिखने पढ़ने के लिए टेबल की भी सुविधा होती है। इसमें लिविंग कम डाइनिंग रूम भी होता है साथ ही किचन का भी इसमें इंतज़ाम है। आईआरसीटीसी की तरफ़ से बाक़यादा दो कर्मचारी यात्रियों की सेवा के लिए भी इसमें रहते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सैलून कोच की बुकिंग के लिए 50 हजार रुपये एडवांस देने होंगे जिसके साथ एक रिक्वेस्ट लेटर भी लगेगा। एक सैलून में आठ लोग आराम से जा सकते हैं। सैलून का 600 किलोमीटर के लिए 2 लाख रुपये किराया है, लेकिन यात्रियों को कम से कम 500 किलोमीटर का किराया देना होगा।