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जानिए क्या है सिम स्वैप और इससे कैसे होती है इसके जरिये धोखाधड़ी?

Thursday - January 10, 2019 3:27 pm , Category : WTN HINDI
सिम के पीछे लिखे 20 अंकों के डिजिट को कभी ‘ना’ करें ‘शेयर’
सिम के पीछे लिखे 20 अंकों के डिजिट को कभी ‘ना’ करें ‘शेयर’

सिम स्वैप से बचने का बस एक ही है तरीक़ा, और वह है आपकी ‘होशियारी’!

JAN 10 (WTN) –टेक्नोलॉजी ने जितनी आपको सुविधाएं दी हैं उतना ही इससे आपको नुकसान भी हो सकता है यदि आप सावधान नहीं रहे तो। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि साइबर क्राइम के मामलों में इंसान अपनी ही ग़लती से खुद का नुकसान करा बैठता है। अभी हाल ही में एक ऐसा ही किस्सा सामने आया जब मुम्बई के एक व्यापारी ने 6 मिस्ड कॉल के चक्कर में पड़कर 1.86 करोड़ रुपए अपने बैंक अकाउंट से गंवा दिए।
 
आप सोच रहे होंगे कि आखिर सिर्फ़ मिस्ड कॉल मात्र से किसी के बैंक अकाउंट से पैसे कैसे गायब हो सकते हैं, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साइबर क्राइम करने वाले चालाक लोग सिर्फ़ मिस्ड कॉल से ही आपके बैंक अकाउंट को खाली कर सकते हैं और यह सब बैंकिंग फ्रॉड वे करते हैं सिम स्वैप के जरिये।
 
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंकिंग फ्रॉड जिसे सिम स्वैप कहते हैं इसके काफ़ी मामले मुम्बई, दिल्ली, बेंगलुरू और कोलकाता में पुलिस की साइबर सेल द्वारा दर्ज किये गये हैं। यदि आप सोच रहे हैं कि सिम स्वैप के शिकार पढ़े लिखे समझदार लोग नहीं होते हैं तो आप ग़लत हैं। इसके चक्कर में काफ़ी शिक्षित और समझदार लोग अपना पैसा गंवा चुके हैं।
 
इतना सब पढ़कर आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये सिम स्वैप होता क्या है और लोग इसके शिकार कैसे बन जाते हैं और इससे किस तरह से बचा जा सकता है? तो हम आपको इसकी पूरी जानकारी देते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिम स्वैप कोई नई टेक्नोलॉजी नहीं है। बल्कि इस तरीक़े से फ्रॉड काफ़ी समय से किया जा रहा है। सबसे पहले बताते हैं कि सिम स्वैप होता क्या है? दरअसल आपने 2जी सिम को 3जी में और उसे 4जी सिम में कन्वर्ट किया ही होगा। जब आप ऐसा करते हैं तो आपका मोबाइल नम्बर तो वहीं रहता है जो कि बदलता नहीं है। लेकिन बस बदलती है तो सिम के पीछे लिखी 20 अंकों की डिजिट।
 
दरअसल सिम स्वैप का पूरा खेल इन्हीं 20 अंकों की डिजिट के साथ होता है। यदि किसी को आपके मोबाइल नम्बर को हैक करना है और उसका क्लोन बनाना है तो वो सबसे पहले आपकी सिम के पीछे लिखे इन्हीं 20 अंकों की डिजिट का पता लगाता है। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि सिम स्वैप से बचने के लिए अपने सिम कार्ड के पीछे दिए गए 20 अंकों के डिजिट को किसी से शेयर ना करें क्योंकि साइबर क्राइम करने वाला अपराधी आपसे आपके सिम का यही नम्बर आपसे मांगेगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सिम स्वैप के जरिए अपराधी आपकी बैंकिंग आईडी और पासवार्ड भी जान सकते हैं। वहीं आपके बैंक अकाउंट से पैसे गायब करने के लिए अपराधी को सिर्फ़ ओटीपी चाहिए होता है, जो आपके नम्बर पर आएगा और सिम स्वैप के जरिये अपराधी इसे हासिल कर लेगा। पीड़ित को फंसाने के लिए अपराधी पहले बक़ायदा एक नक़ली वेबसाइट बनाते हैं। इसी नक़ली वेबसाइट पर अपराधी यूजर की पर्सनल बैंकिंग डिटेल ले लेते हैं। इसके बाद अपराधी आपका सिम के पीछे लिखे 20 अंकों की डिजिट को पता करते हैं और आपके मोबाइल नम्बर को क्लोन करने के बाद आरोपी आपके बैंक अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं।
 
तो देखा आपने कि आपकी ही ग़लती से आप धोखाधड़ी का शिकार हो सकते हो। इसलिए हमारी आपको सलाह है कि जब भी मोबाइल या इन्टरनेट का उपयोग करें तो काफ़ी सावधान रहें। जिस भी वेबसाइट पर आप ट्रांजेक्शन करते हैं पहले उसे अच्छी तरह से जांच परख लें कि कहीं वो नक़ली वेबसाइट तो नहीं है। साथ ही हमेशा ध्यान रखें कि सिम कार्ड के पीछे लिखी 20 अंकों की डिजिट को किसी के साथ भी शेयर ना करें। यदि आप इन सभी बातों का ध्यान रखेंगे तो आप किसी भी तरह की साइबर धोखाधड़ी से बच सकते हैं।