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नोटबंदी के बाद कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने में बुरी तरह से असफल साबित हुई मोदी सरकार

Tuesday - February 12, 2019 3:36 pm , Category : WTN HINDI
नवम्बर, 2016 के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में कमी; एटीएम से निकासी में वृद्धि
नवम्बर, 2016 के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में कमी; एटीएम से निकासी में वृद्धि

डिजिटल ट्रांजेक्शन में वृद्धि के लक्ष्य में बुरी तरह से पिछड़ी मोदी सरकार

FEB 12 (WTN) – कहा जा रहा था कि नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन में वृद्धि होगी जिससे खरीददारी पर निगरानी रखी जा सकेगी, लेकिन बजाय डिजिटल ट्रांजेक्शन में वृद्दि होने के उसमें कमी दर्ज की गई है। जानकारी के मुताबिक़, नोटबंदी के बाद डेबिट कार्ड की संख्या में तो क़रीब 30 प्रतिशत की वृद्दि हुई, लेकिन डिजिटल ट्रांजेक्शन में कमी दर्ज की गई है। भारत के केन्द्रीय बैंक आरबीआई के मुताबिक़, डिजिटल ट्रांजेक्शन में करीब 9.36 प्रतिशत और इसकी राशि में करीब 6.87 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
 
नोटबंदी के बाद कहा जा रहा था कि डेबिट कार्ड से नकद निकासी में कमी दर्ज की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उलटे डेबिट कार्ड से निकासी में काफ़ी तेजी देखी गई है। जैसा कि आप जानते हैं कि 8 नवम्बर को रात 12 बजे से नोटबंदी लागू हुई थी, लेकिन उस समय पीओएस मशीनें यानि कि प्वाइंट ऑफ़ सेल मशीनें कम थीं जिसके कारण डिजिटल ट्रांजेक्शन ज्यादा तादात में नहीं हो रहे थे।

नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने कई तरह के प्रयास किये। नोटबंदी के बाद ही देश में काफ़ी तादात में लोगों को इस बात का पता चला कि डेबिट कार्ड का इस्तेमाल एटीएम से रुपये निकालने के अलावा बिल पेमेंट करने के लिए भी किया जा सकता है। हालांकि सरकार ने डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी कोशिशें की लेकिन लोगों में भ्रम था कि इससे ट्रांजेक्शन टैक्स लगेगा इसलिए डिजिटल ट्रांजेक्शन में कमी देखी गई।
 
नोटबंदी के बाद देश में डेबिट कार्ड्स की संख्या में क़रीब 30 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई। भारतीय रिज़र्व बैंक के मुताबिक़; दिसम्बर, 2016 में देश में 56 बैंकों द्वारा डेबिट कार्ड जारी किये जाते थे और उस समय डेबिट कार्ड्स की संख्या 76.44 करोड़ थी। वहीं लगभग दो सालों के बाद; नवम्बर, 2018 में 66 बैंकों ने 99.24 करोड़ डेबिट कार्ड जारी किये। यानि कि 23 महीनों के दौरान देशभर में कुल 29.82 प्रतिशत यानि कि 22.79 करोड़ डेबिट कार्ड बढ़ गए।
 
कहा जा रहा था कि नोटबंदी के बाद पीओएस मशीनों के जरिये खरीददारी में वृद्धि होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। दिसम्बर, 2016 में ही डेबिट कार्ड से पीओएस मशीनों के जरिये खरीददारी में कमी दर्ज की गई। दिसम्बर, 2016 में पीओएस मशीन से ट्रांजेक्शन 41.54 करोड़ बार हुए, तो वहीं नवम्बर, 2018 में पीओएस ट्रांजेक्शन की संख्या 41.54 करोड़ से 3.88 करोड़ घटकर 37.65 करोड़ ही रह गई। यदि रुपयों की बात करें तो दिसम्बर, 2016 में पीओएस मशीनों के जरिये 58,031 करोड़ रुपये की खरीदारी हुई थी, तो वहीं नवम्बर, 2018 में यह खरीदारी 6.87 प्रतिशत कम होकर 54,041 करोड़ रुपये पर पहुंच गई।
 
जहां एक तरफ नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में कमी दर्ज की गई तो वहीं डेबिट कार्ड से एटीएम से पैसे निकालने में वृद्धि देखी गई। दिसम्बर, 2016 में डेबिट कार्ड के जरिए एटीएम से 84,934 करोड़ रुपये डेबिट कार्ड से 63.04 करोड़ बार में निकाले गए। तो वहीं नवम्बर, 2018 में 2,77,868 करोड़ रुपये 83.89 करोड़ बार में निकाले गए। आंकड़े साफ़ बताते हैं कि डेबिट कार्ड से एटीएम निकासी में 33.06 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, वहीं इस दौरान एटीएम से 227.15 प्रतिशत ज्यादा राशि निकाली गई। हालांकि इस दौरान ऑनसाइट और ऑफ़साइड दोनों ही एटीएम की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
 
यानि कि यदि आरबीआई के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि सरकार की डिजिटल ट्रांजेक्शन की पूरी कोशिशें असफल साबित हुई हैं। कहा जा रहा था कि नोटबंदी के बाद नकदी की कमी के कारण डिजिटल ट्राजेक्शन की तरफ़ लोगों को झुकाव होगा, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि नोटबंदी के बाद डिजिटल ट्रांजेक्शन में क़रीब 9.36 प्रतिशत की कमी दर्ज कई गई, तो वहीं एटीएम से नकद निकासी में 33.06 प्रतिशत की वृद्दि दर्ज की गई। यानि कि कहा जा सकता है कि नोटबंदी के बाद ब्लैक मनी पर नियंत्रण रखने और खरीददारी पर नज़र रखने के लिए डिजिटल ट्रांजेक्शन का जो लक्ष्य सरकार ने सोच कर रखा था वो उसे पूरा करने में वो पूरी तरह से असफल साबित हुई है।