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जानिए आखिर क्यों चीन ने की है अपने रक्षा बजट में वृद्धि?

Wednesday - March 6, 2019 10:36 am , Category : WTN HINDI
भारत से तीन गुना ज्यादा हुआ चीन का रक्षा बजट
भारत से तीन गुना ज्यादा हुआ चीन का रक्षा बजट

अमेरिका से ‘सम्भावित ख़तरे’ को देखते हुए चीन ने बढ़ाया अपने रक्षा बजट
 
MAR 06 (WTN) – अमेरिका के बाद रक्षा बजट पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाला चीन ने फ़िर से अपने रक्षा बजट में वृद्धि कर दी है। पिछले साल चीन ने अपने रक्षा बजट में 8.1 प्रतिशत की वृद्धि की थी, जिसके बाद चीन का रक्षा बजट बढ़कर 175 अरब डॉलर हो गया था। हालांकि फ़िर से रक्षा बजट बढ़ाए जाने के बाद चीन का तर्क है कि इससे किसी भी अन्य देश को चिन्ता करने की कोई जरूरत नहीं है। चीन का कहना है कि उसके रक्षा बजट से किसी को ख़तरा पैदा नहीं होगा।
 
अपनी विस्तारवादी नीति के लिए कुख्यात चीन ने इस साल अपने रक्षा बजट में 7.5 प्रतिशत की वृद्धि की है, जिसके बाद अब चीन का रक्षा बजट बढ़कर 177.61 अरब डॉलर हो गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2015 में चीन ने अपने रक्षा बजट को दोगुना कर दिया था जिसके बाद पूरी दुनिया का ध्यान चीन की तरफ गया था। चीन लगातार अपने रक्षा बजट में वृद्धि करता चला आ रहा है। साल 2016 में जहां चीन ने अपने रक्षा बजट में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि की थी, तो वहीं साल 2017 में उसने अपने रक्षा बजट में 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी।
 
सालों से भारत के साथ सीमा विवाद पर अड़ियल रूख अपनाने वाले चीन का रक्षा बजट भारत से तीन गुना अधिक हो गया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत का रक्षा बजट 58 अरब डॉलर है। वहीं पाकिस्तान से चीन के रक्षा बजट की तुलना की जाए तो यह 16 गुना ज्यादा है। पाकिस्तान का रक्षा बजट सिर्फ 11 अरब डॉलर है। भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान से 5 गुना ज्यादा है।

समय के साथ-साथ चीन ने अपनी तीनों सेना में काफ़ी सुधार किये हैं। हालांकि चीन ने पिछले सालों में अपनी थलसेना में 3 लाख सैनिकों की कटौती की है, लेकिन चीन ने थलसेना के मुकाबले अपनी वायुसेना और नौसेना के विस्तार को ज्यादा प्रमुखता दी है। इसका प्रमुख कारण है उसकी अमेरिका के साथ वर्चस्व की लड़ाई। चीन और अमेरिका के बीच दक्षिणी चीन सागर से लेकर अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक विवाद काफ़ी अहम मुद्दे रहे हैं, कई बार चीन और अमेरिका के युद्धपोत एक दूसरे के आमने-सामने आ चुके हैं। ऐसे में अमेरिका से वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहा चीन अपनी वायुसेना और नौसेना की मजबूती पर ज्यादा ध्यान दे रहा है।
 
पूंजीवादी अर्थव्यवस्था वाला देश अमेरिका समय-समय पर साम्यवादी देश चीन को उसके ही इलाके में घेरने की रणनीति पर काम करता रहता है। चीन को घेरने के लिए अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और कुछ ताकतवर यूरोपीय देशों जैसे फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन का एक गुट बनाने की हमेशा कोशिश करता रहता है। अमेरिका अपने पूंजीवाद के सामने चीन के साम्यवाद को एक चुनौती के रूप में देखता है, जिसके कारण दोनों ही देशों में समय-समय पर ट्रेड वॉर चलता रहता है।

चीन से सटे समुद्री इलाकों में अमेरिका जापान और दक्षिण कोरिया के साथ युद्ध अभ्यास भी कर चुका है जिसका कई बार चीन विरोध जता चुका है। वैसे चीन जानता है कि यदि उसका किसी भी कारण से अमेरिका से युद्ध होता है तो वो जमीन के बजाय आसमान और समुद्र के रास्ते ही होगा। इसलिए चीन ने अमेरिका से सम्भावित खतरे को देखते हुए अपने रक्षा बजट में वृद्धि की है और अपनी वायुसेना और नौसेना को मजबूत करने में पूरा ध्यान लगाया है ताकि वो अमेरिका को यह संदेश दे सके कि चीन किसी से डरने या झुकने वाला नहीं है।