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गौहर महल में बाग प्रिन्ट उत्सव 2019 दिनांक 19 अप्रैल से दीवान ए खास में शुरू

Friday - April 19, 2019 4:07 pm , Category : WTN HINDI

 
राजधानी के गौहर महल में ‘‘बाग प्रिन्ट‘‘ के जनक स्व. इसमाईल खत्री की याद में विशेष बाग उत्सव का आयोजन 19 अप्रैल से 30 अप्रैल तक किया जा रहा है, यह प्रदर्शनी प्रतिदिन दोपहर 12 से रात्रि 9 बजे तक खुली रहेगी। बाग प्रदर्शनी में स्व. इसमाईल खत्री के पुत्र राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त मोहम्मद उमर फारूक खत्री काॅटन ड्रेस मटेरियल, काॅटन 3 पिस सुट, महेश्वरी, सिल्क आदि का खजाना लेकर आए हैं। फेयर में उपलब्ध तमाम मटेरियल्स बाग प्रिंटेड है।
 
बाग प्रिन्ट के इतिहास में पहली बार
 
लिनन कपडे़ पर बाग प्रिन्ट ड्रेस मटेरियल मोहम्मद उमर फारूक खत्री द्वारा पहली बार विशेष रूप से भौपाल में बाग प्रिन्ट के चाहने वालो के लिये बनाया गया हैं। लिनन कपड़ा गरमी में बहुत कम्फर्टेबल होता हैं।
 
इस बार बाग उत्सव में कुछ खासः
 
इस बार बाग उत्सव में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त शिल्पी मोहम्मद उमर फारूक खत्री द्वारा कि “गद” प्रिन्ट कि विशाल श्रंखला लाई गई हैं। गद कि जो प्रिन्ट होती है वह बहोत जटिल कार्य हैं। इस काम को करना बाग प्रिन्ट के शिल्पकार के लिए आसान नही होता हैं लेकिन यह हमारा पुश्तैनी काम हैं और इस काम की बारीकियां हमने हमारे पिता इस्माईल जी से सिखी हैं।
 
क्या है ”गद“ प्रिन्ट:
 
गद प्रिन्ट के लिए विशेष प्रकार का ब्लाक इस्तेमाल किया जाता हैं। उस ब्लाक के खाली स्थान में भेड़ के उन से बना एक मोटा कपड़ा जिसे नमदा बोला जाता हैं। नमदा को ब्लाक में फिल किया जाता हैं, उसके बाद उस ब्लाक से छपाई कि जाती हैं जिससे कपड़े पर भरी भरी प्रिन्ट नजर आती हैं फिर उस डिज़ाइन के उपर दुसरे कलर से दुसरा ब्लाक लगाया जाता हैं। गद कि प्रिन्ट को देश और विदेश में बहोत ज्यादा स्तर पर पसन्द किया जाता हैं।


 
‘‘बाग प्रिन्ट‘‘ का प्रदर्शन
 
प्रतिदिन दोपहर 1 बजे से शाम 4 बजे तक गोहर महल में सिटी के फाइन आट्र्स स्टूडेन्ट्स के लिये डिमाॅन्स्टेशन रखा गया है। इसमें बाग प्रिन्ट बनाने संबधी महीन पहलुओं पर फोकस किया जायेगा।
 
 
ऐसे बनता है ‘‘बाग प्रिंट‘‘:
 
ओरिजनल बाग प्रिंट मुख्यतः धार जिले के बाग गांव मे ही बनता है। सबसे पहले कपड़े को पानी मे भिगोया जाता है कपड़े को नरम करने के लिये संचोरा अरण्डी का तेल बकरी की मेंगनी के घोल बनाकर 24 से 48 घण्टे तक रखना होता है, बाद में दो-तीन पानी से धोया जाता है। फिर हरड़ पेस्ट में डुबोया जाता है। सुकने के बाद कपड़ा प्रिन्टींग के लिये तैयार है। ‘‘बाग प्रिन्ट‘‘ मे मुख्यतः दो रंग होते है काला रंग लोहे के जंग से एंव लाल रंग फिटकरी से इन दोनो रंगो से प्रिन्टींग करने के बाद कपडे़ को 10 से 15 दीनो बाद, बाग गाँव की बाघनी नदी की खास बात यह है कि इसके पानी में एसे प्राकृतिक कण पाये जाते है जो रंगो में प्राकृतिक निखार लाते है बाग प्रिन्ट से जुडी एक और खास बात यह है की इन्हें बाघनी नदी के बहते हुए पानी में ही निखारा जाता है। स्थिर जल में इसका प्रभाव बहुत ही कम होता है और अन्त मे आल की जड़ और धावड़ी के फुलों के साथ भट्टी की जाती हैं।


 
20 हजार से ज्यादा कलेक्शन उपलब्ध एंव नये रंगो मे बाग:
 
बाग उत्सव में 10 हजार मीटर से अधिक काॅटन ड्रेस मटेरियल्स उपलब्ध है, फारूक खत्री द्वारा बेहतरीन डिज़ाइन कीये गये ड्रेस मटेरियल्स इनमे स्ट्राइब, बुटी, पट्टे, जाल, ट्रिपल, प्रिन्टींग सामील है। बाग प्रिंट में इन्डीगो ब्ल्यु, ग्रिन, पिन्क कलर में पिला, लाल, काला ड्रेस मटेरियल्स व सुट खास है। प्रत्येक सुट मे औसतन 10 से 12 डिज़ाइन बनाए गए हैं। इनमें सबसे खास पिस है 1000 साल पुराने डिजाइनों से बने है- केरी, डाकमांडवा, जुवारिया, एवं चोकड़े आदि। 
 
सुट में एक्स्ट्रा वर्क: 
 
सुट में एक्स्ट्रा वर्क किया गया है, उमर फारूक द्वारा सुट के कुर्तो को कुछ डिफरेंट अन्दाज मे डिज़ाइन कीया गया है, सुट के दुपट्टो मे फोर साइड बार्डर व फोर साइड बुटे वाले दुपट्टो में एक्स्ट्रा वर्क देखा जा सकता है। यहाँ उपलब्ध ड्रेस मटेरियल में काॅटन सिल्क, महेश्वरी के सुट जरी बार्डर क्रेप, शिफान, महेश्वरी की साड़ियां, चादरे, पुरानी डिजाइन व नेचुरल कलर्स मे उपलब्ध है। 
 
ड्रेस मटेरियल विभिन्न प्रकार के कपड़े में उपलब्ध हैं:
 
इस बार कई प्रकार का ड्रेस मटेरियल लाया गया हैं जिसमे काथा काॅटन जो कि बहुत ही सुन्दर धारी वाला कपड़ा हैं और साथ में रेयोन, ग्लेस काटॅन, मोडाल, मसरू, मोडाल सातीन फैब्रिक हैं।अभी तक बाग उत्सव में इतने प्रकार का फैब्रिक के उपर बाग प्रिन्ट का काम पहली बार देखने मिलेगा।  - Window To News