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व्हाट्सएप, हाइक और स्काइप को अब नहीं मिलेगी ‘छूट’, करना होगा नियमों का पालन!

Wednesday - April 24, 2019 12:28 pm , Category : WTN HINDI
ओटीटी सेवाएं के विनियमन पर अब ट्राई की ‘नज़र’
ओटीटी सेवाएं के विनियमन पर अब ट्राई की ‘नज़र’

ट्राई के दायरे में आ सकती हैं व्हाट्सएप, हाइक और स्काइप जैसे सेवाएं, मसौदे पर चर्चाएं जारी

APR 24 (WTN) – ओटीटी सर्विसेस यानि कि Over-the-top सेवाएं क्या ट्राई के नियमों के दायरे में आनी चाहिए कि नहीं, अब इस मामले में देश में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आख़िर ओवर द टॉप सेवाएं होती क्या हैं। दरअसल, ओटीटी ऐसे ऐप और सेवाओं को कहा जाता है जो इंटरनेट के जरिए हासिल की जाती हैं और दूसरे इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के सहारे चलती हैं। व्हाट्सएप, विबर, हाइक और स्काइप जैसी सेवाएं इसी श्रेणी में आती हैं और इन्हें ही ओटीटी सेवाएं कहा जाता है।



भारतीय दूरसंचार विनियामक प्रधिकरण (ट्राई) के मुताबिक़, व्हाट्सएप और स्काइप जैसी ओटीटी (ओवर-दी-टाप) सेवाओं को ट्राई के नियमों के दायरे में लाने पर कोई भी राय अगले महीने के आख़िरी तक तय की जा सकती है। कहा जा रहा है कि ट्राई को इस मामले में एक खुली सोच रखना होगी और यूरोपीय मॉडल तथा अन्य देशों में अपनाए गए अच्छे उपायों को ध्यान में रख कर ही कोई फ़ैसला करना चाहिए।



वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई ने यूरोपीय संघ की नियामकीय संस्था (यूरोपीयन इलेक्ट्रानिक कम्यूनिकेशन कोड) और अन्य देशों में प्रचलित कुछ सबसे अच्छी व्यवस्थाओं के अध्ययन का दावा किया है, जिसके बाद उम्मीद लगाई जा रही है कि इस मामले में किसी भी फ़ैसले पर पहुंचने से पहले सबसे अच्छी व्यवस्थाओं को समयोजित किया जाएगा और उसके बाद कोई भी फ़ैसला लिया जाएगा।



ट्राई इस मसले पर आम लोगों की राय जान रही है ताकि पता चल सके कि आख़िर लोगों का इस बारे में क्या सोचना है। ट्राई का मानना है कि कोई भी फ़ैसला लेने से पहले हम अपनी परम्परा के अनुसार परिचर्चाओं के माध्यम से लोगों की राय जानना चाहेंगे, जिसके बाद मई के आख़िरी तक हम किसी भी निर्णय पर पहुंच सकते हैं।



आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्राई ने ओटीटी सेवाओं के बारे में परिचर्चा पत्र पिछले साल 2018 में जारी किया था। इस पत्र में प्रश्न किया गया था कि ओटीटी सेवाओं को भी क्या अन्य सेवा प्रदाताओं की तरह विनियामकीय दायरे में लाया जाए? देखा गया है कि हाल के दिनों में ऐसी सेवाओं की जांच परख तेज़ हुई है। वहीं सरकार का रूख भी इस मामले में साफ़ है। सरकार भी सूचना प्रौद्योगिकी सम्बन्धित नियमों की समीक्षा कर रही है ताकि ऐसी सेवाओं को अधिक जवाबदेह बनाया जा सके।



वहीं जानकारों का कहना है कि इस मामले में एक बड़ा मुद्दा 'विनियामकीय असंतुलन' का है। यानी कि सवाल उठ रहा है कि विनयमन के दायरे में आने वाले लाइसेंसधारी दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के मुक़ाबले ओटीटी सेवा प्रदाताओं को देश में खुली छूट तो नहीं मिली हुई है और इसी कारण इन पर किसी भी तरह का कोई नियंत्रण नहीं है। समय-समय पर इस पर चर्चाएं होने के बाद कहा जा रहा है कि इसी सवाल का जवाब देने और विषमताओं को दूर करने के लिए ओटीटी सेवाओं के लिए भी लाइसेंस प्रणाली लागू करने की बात की जा रही है ताकि उन्हें भी ट्राई के दायरे में लाया जा सके।