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​HTTP की तुलना में HTTPS है ज़्यादा सुरक्षित!

Friday - May 17, 2019 3:27 pm , Category : WTN HINDI
 क्योंकि आपका जानना ज़रूरी है...
क्योंकि आपका जानना ज़रूरी है...

जानिए HTTP और HTTPS में अंतर
 
MAY 17 (WTN) – आप यदि इंटरनेट यूज़ करते हैं, तो कई बार आपने HTTP और HTTPS के बारे में सुना ही होगा। लेकिन क्या आप इन दोनों के बीच के अंतर को जानते हैं, यदि नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर HTTP और HTTPS होते क्या हैं, और इनके बीच क्या अंतर होता है?
 
आइये सबसे पहले जानते हैं HTTP के बारे में, तो HTTTP का पूरा नाम है Hyper Text Transfer Protocol। यह एक एप्लीकेशन प्रोटोकाल है जिसका इस्तेमाल इन्टरनेट के जरिये हाइपर मीडिया या हाइपर टेक्स्ट भेजने के लिए किया जाता है। तकनीकी भाषा में इसके ज़रिये क्लाइंट अपनी ब्राउज़र एप्लीकेशन के ज़रिये सर्वर से डाटा को ट्रांसफर कर पाते हैं।
 
HTTP प्रोटोकाल के कारण ही क्लाइंट और सर्वर के बीच कनेक्शन बन पाता है। इसका इस्तेमाल करके ही हम www यानि कि वर्ल्ड वाइड वेब के जरिये डाटा भेज पाते हैं। हम इंटरनेट के ज़रिये जितनी भी websites और डाटा खोलते हैं या डाउनलोड करते हैं, वो सभी HTTP की कारण ही सम्भव हो पाता है।
 
आइये अब जानते हैं HTTPS के बारे में, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि HTTP  की सिक्यूरिटी काफ़ी कमज़ोर होती है, और इसको आसानी से हैक किया जा सकता है। इसलिए इसका इस्तेमाल पेमेण्ट गेटवे या सेंसिटिव इनफॉर्मेशन को भेजने के लिए बिलकुल भी नहीं किया जा सकता है। HTTP की इसी कमी को पूरा करने के लिए ही HTTPS यानी Hyper Text Transfer Protocol Secure बनाया गया है।
 
HTTPS, HTTP का नया और अपडेटेड वर्जन है। HTTPS के इस्तेमाल से वेबसाइट बहुत सुरक्षित हो जाती है। HTTPS प्रोटोकाल के ज़रिये भेजा गया डाटा पूरी तरह से एन्क्रिप्ट करके यानी कि कूट भाषा में भेजा जाता है। जिससे इसे आसानी से हैक करना सम्भव नहीं है| HTTPS में डाटा को SSL यानि कि Secure Sockets Layer के द्वारा भेजा जाता है।
 
HTTPS अपने आप में HTTP की तुलना में काफ़ी सुरक्षित है। सर्च इंजन भी इस पर ज़्यादा विश्वास करते हैं। इसलिए हमें HTTPS वाली वेबसाइट गूगल सर्च में सबसे ऊपर दिखाई देती है, हालांकि इसका इस्तेमाल तभी ज़रूरी है जब हम अपनी वेबसाइट पर किसी भी तरह का पेमेण्ट गेटवे लगाते हैं या यूजर से उसकी गोपनीय जानकारी लेते हैं।
 
वैसे HTTPS भी ठीक HTTP की तरह ही काम करता है, लेकिन फ़र्क इतना है कि यह सर्वर या क्लाइंट द्वारा भेजे गए डाटा को एन्क्रिप्ट कर देता है जिससे डाटा और भी ज़्यादा सुरक्षित हो जाता है।
 
उदाहरण के तौर पर जैसे अगर आप अपने कुछ डिटेल जैसे पासवर्ड वगैराह किसी HTTP सर्टिफिकेशन वाली वेबसाइट में डालें तो आपका डाटा नार्मल टेक्स्ट के फॉर्म में जाएगा जिसे आसानी से पड़ा जा सकता है। जबकि अगर उसी वेबसाइट के पास HTTPS सर्टिफिकेशन है तो आपका डाटा सुरक्षित कोड में जाएगा जिसे आसानी से पढ़ा नहीं जा सकता है।