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क्या दूर होगी बीजेडी और बीजेपी के बीच की दूरी?

Tuesday - May 21, 2019 3:33 pm , Category : WTN HINDI
ज़रूरत पड़ने पर एनडीए में वापसी कर सकती है बीजेडी!
ज़रूरत पड़ने पर एनडीए में वापसी कर सकती है बीजेडी!

लोकसभा चुनाव के परिणाम पर टिकी नवीन पटनाटक की ‘राजनीतिक रणनीति’!
 
MAY 21 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि राजनीति में कोई भी किसी का स्थायी मित्र या शत्रु नहीं होता है। राजनीतिक परिस्थितियों के हिसाब से मित्रता और शत्रुता बदलती रहती है। एक समय था, जब बीजेडी यानि कि बीजू जनता दल एनडीए का एक घटक दल हुआ करती थी। अटल बिहारी वाजपेयी के सरकार में बीजेडी के अध्यक्ष और ओडिशा के वर्तमान मुख्यमंत्री नवीन पटनायक केन्द्रीय मंत्री थे। लेकिन राजनीतिक घटनाचक्र कुछ ऐसा बदला कि आज बीजेडी, एनडीए का हिस्सा नहीं है।

1998 से 2009 तक बीजेडी और बीजेपी दोनों ही पार्टियां एनडीए का हिस्सा थीं। साल 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद बीजेडी ने एनडीए से अलग होने का फ़ैसला लिया, और आज की तारीख तक बीजेडी और बीजेपी की राजनीतिक राहें अलग-अलग हैं। बीजेडी और बीजेपी ने 1999 और 2004 के लोकसभा चुनाव में मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव से दोनों ही पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।

अब जबकि 23 मई को लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने हैं। ऐसे में एग्ज़िट पोल के मुताबिक़ एक बार फ़िर से केन्द्र में भाजपा की सरकार बन रही है। वहीं एग्ज़िट पोल के अनुसार ओडिशा में इस बार भाजपा अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है। कहा जा रहा है कि ओडिशा की 21 लोकसभा सीटों में से भाजपा 5 से लेकर 15 सीटों तक पर जीत हासिल कर सकती है। वैसे ओडिशा की वर्तमान राजनीति में बीजेडी और बीजेपी के बीच ही मुख्य चुनावी मुक़ाबला है, क्योंकि ओडिशा में कांग्रेस इन दिनों अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेडी ने ओडिशा राज्य की 21 में से 20 सीटों पर जीत हासिल की थी, वहीं भाजपा सिर्फ़ एक ही सीट पर जीत हासिल कर सकी थी।

वैसे तो एग्ज़िट पोल के मुताबिक़ केन्द्र में एक बार फ़िर से भाजपा की सरकार बन रही है, लेकिन फ़िर भी यदि एक्ज़िट पोल की भविष्यवाणी ग़लत साबित हुई तो एनडीए को सरकार बनाने के लिए अन्य दलों की सहायता की ज़रूरत पड़ सकती है। राजनीतिक गलियारों से मिली जानकारी के मुताबिक़, कभी एनडीए का हिस्सा रही बीजेडी, एनडीए में वापसी कर सकती है। जी हां बीजेडी के नेता और पार्टी प्रवक्ता अमर पटनायक की मानें तो उनकी पार्टी उस दल को समर्थन देगी जिसकी केन्द्र में सरकार में आने की सम्भावना ज़्यादा है।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारतीय राजनीति में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने और लेने के लिए 'सौदेबाज़ी' आम बात है। कुछ इसी तरह की 'सौदेबाज़ी' बीजेडी किसी भी दल को केन्द्र में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने के एवज में कर सकती है। कहा जा रहा है कि जो भी गठबंधन ओडिशा राज्य के मुद्दों को तवज्जो देगा और उसकी वैध मांगों को पूरा करेगा, बीजेडी का समर्थन उसी गठबंधन को मिलेगा।

दरअसल, ओडिशा विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में बीजेडी और बीजेपी दोनों ही दल एक दूसरे के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ते हैं। लेकिन फ़िर भी दोनों दलों के बीच कभी भी राजनीतिक कटूता नहीं देखी गई है। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फोनी तूफ़ान से निपटने के लिए ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की तारीफ़ की थी। वहीं चुनाव प्रचार के दौरान भी नरेन्द्र मोदी ने जो तीखे हमले कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर किये थे, उस तरह के हमले उन्होंने बीजेडी पर नहीं किये।

हालांकि, ओडिशा में धीरे-धीरे बीजेपी, बीजेडी के लिए एक बहुत बड़ी राजनीतिक चुनौती बनकर उभर रही है। एग्ज़िट पोल के मुताबिक़, इस बार लोकसभा चुनाव में बीजेपी ओडिशा में काफ़ी चौकाने वाले नतीज़े दे सकती है। राज्य विधानसभा चुनाव में भी बीजेपी ने बीजेडी को कड़ी टक्कर दी है। ऐसे में हो सकता है कि बीजेपी से सम्भावित नुकसान की आशंका को देखते हुए जल्द ही बीजेडी एनडीए में शामिल हो जाए और ज़रूरत पड़ने पर भाजपा को समर्थन दे दे।

वैसे नवीन पटनायक बहुत ही सुलझे हुए नेता माने जाते हैं। कहा जाता है कि उनके राजनीतिक फ़ैसले दूरगामी होते हैं। राज्य में बीजेपी से मिल रही चुनौती के चलते हो सकता है कि नवीन पटनाटक एनडीए में वापसी कर लें। या यह भी हो सकता है कि ओडिशा विधानसभा में नवीन पटनायक की पार्टी बीजेडी को बीजेपी समर्थन दे दे, और केन्द्र में भाजपा सरकार को बीजेडी समर्थन दे दे। राजनीति में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता है? 23 मई को आने वाले लोकसभा चुनाव के नतीजों से साफ़ हो जाएगा कि बीजेडी और बीजेपी के बीच की दूरी कम होती है या नहीं।