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केबल टीवी के बाद अब मोबाइल पर टीवी देखना होगा ‘महंगा’!

Wednesday - May 22, 2019 10:17 am , Category : WTN HINDI
मुफ्त में मोबाइल पर टीवी देखना अब नहीं होगा मुमकिन
मुफ्त में मोबाइल पर टीवी देखना अब नहीं होगा मुमकिन

मोबाइल ऐप्स पर टीवी चैनल्स देखने के लिए अब चुकाने पड़ सकते हैं पैसे!
 
MAY 22 (WTN) – यदि आप केबल टीवी और डीटीएच के बढ़े हुए दामों के कारण परेशान हैं, और आपको टीवी पर मनोरंजन पहले की तुलना में काफ़ी महंगा लग रहा है तो यह ख़बर आपके काम की है। क्योंकि अब टीवी के साथ-साथ मोबाइल ऐप्स पर भी टीवी देखना महंगा हो सकता है। सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब से ट्राई ने इसी साल 1 फरवरी से नए टीवी केबल और डीटीएच नियम लागू किए हैं, तभी से टीवी उपभोक्ताओं का कहना है कि टीवी देखना पहले की तुलना में महंगा हो गया है।

कहा जा रहा था कि ट्राई ने केबल टीवी उपभोक्ताओं पर महंगे पैकेज का भार कम करने के लिए यह क़दम उठाया था, लेकिन लगता है कि उसका असर विपरित पड़ा और पहले की तुलना में केबल टीवी और डीटीएच के पैकेज का ख़र्च 40 से 60 प्रतिशत बढ़ गया। हालांकि, ट्राई का अभी भी दावा है कि केबल टीवी और डीटीएच के नए नियमों को टीवी चैनल की क़ीमतों को किफ़ायती करने के लिए बनाया गया था, पर ऐसा हुआ नहीं। लेकिन मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, टीवी दर्शकों के बीच बढ़ती नाराज़गी और गुस्से को देखते हुए जल्द ही ब्रॉडकास्टिंग टैरिफ की क़ीमतों को घटाने के लिए नई योजना तैयार की जा रही है।

ट्राई अब कोशिश कर रहा है कि यह जांच की जाए कि किस तरह के मैकेनिजम का इस्तेमाल किया जाए, जिससे केबल टीवी और डीटीएच के दाम कम किये जा सकें। यदि ट्राई सच में इस प्रकार की किसी योजना पर काम कर रहा है जिससे टीवी मनोरंजन का खर्च कम हो जाए, तो ख़बर टीवी ग्राहकों के लिए बहुत बड़ी है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केबल टीवी और डीटीएच की क़ीमतें कम करने के लिए ट्राई एक कंसल्टेशन पेपर लाने जा रहा है, जिसके जरिये टैरिफ कम करने की कोशिश की जाएगी। दरअसल, जब से ट्राई के नये नियम लागू हुए हैं, तभी से टीवी दर्शकों का कहना है कि उन्हें लगा था कि कम क़ीमत पर ज़्यादा चैनल देखने को मिलेंगे, लेकिन ऐसा ना होकर केबल टीवी का ख़र्च ज़्यादा हो गया। इस बारे में ट्राई का कहना है कि नियामक ने टीवी चैनल की क़ीमतों को पारदर्शी बनाने और चैनल्स का कंट्रोल ग्राहकों के हाथ में देने का काम किया है, लेकिन यह योजना उस तरह से सफ़ल नहीं हो सकी जितनी कि इसकी उम्मीद का जा रही थी।

केबल टीवी और डीटीएच पैकेज महंगा होने के बाद लोगों ने मोबाइल ऐप्स पर टीवी देखना शुरू कर दिया था, लेकिन अब वहां पर भी टीवी देखना महंगा होने जा रहा है। दरअसल, ट्राई उन ऐप्स पर भी अपना नियंत्रण करने की कोशिश में है, जो टीवी चैनल्स की लाइव स्ट्रिमिंग करते हैं। अब इन ऐप्स को भी देश में टीवी चैनल्स चलाने के लिए ट्राई से लाइसेंस लेना होगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि फिलहाल इन मोबाइल ऐप्स पर टीवी चैनलों की स्ट्रिमिंग मुफ्त में होती है। वहीं इन ऐप्स पर ट्राई का नियंत्रण भी नहीं है। ट्राई का इस बारे में कहना है कि उसने ब्रॉडकास्टिंग कम्पनियों को कंटेट देने का लाइसेंस सिर्फ़ केबल ऑपरेटर्स या फिर डीटीएच कम्पनियों को देने के लिए दे रखा है। लेकिन मोबाइल ऐप्स जैसे तीसरी पार्टी अगर चैनल्स को मुफ्त में दिखाती है, तो यह ट्राई के नियमों का उल्लंघन है। इसलिए अब इन मोबाइल ऐप्स को चैनल्स की स्ट्रीमिंग के लिए लाइसेंस लेना होगा।

कहा जा रहा है कि ट्राई जुलाई-अगस्त के बीच इस बारे में एक ड्राफ्ट लेकर आएगा, जिस पर लोगों से सुझाव मांगे जाएंगे। हालांकि, मोबाइल ऐप्स चलाने वाली कम्पनियों ने ट्राई के इस फ़ैसले का विरोध किया है। मोबाइल ऐप चलाने वाली कम्पनियों का तर्क है कि ट्राई को ऐसा करने का कोई भी अधिकार नहीं है, क्योंकि मोबाइल ऐप्स आईटी एक्ट के अंतर्गत आते हैं।

मोबाइल ऐप्स कम्पनियों का कहना है कि यदि ट्राई ने इस तरह के कोई भी नियम बनाए, तो इससे कम्पनियों पर काफ़ी नकारात्मक असर पड़ेगा। ट्राई के नये मसौदे से मोबाइल ऐप्स कम्पनियों पर ही नहीं, बल्कि आप पर भी काफ़ी असर पड़ने वाला है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अगर ट्राई इन मोबाइल ऐप्स को भी लाइसेंस की सीमा में लाता है, तो फिर लोग मोबाइल पर फ्री में चैनल नहीं देख पाएंगे और ऐप में टीवी चैनल देखने के लिए आपको पैसा चुकाने होंगे।

अब जबकि टीवी पर चैनल्स देखना महंगा हो गया है, और यदि ट्राई ने मोबाइल ऐप्स को भी लाइसेंस के दायरे में ले लिया तो ऐप्स पर भी चैनल्स देखना महंगा हो जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आजकल के व्यस्त जीवन में लोगों के पास टीवी देखने के लिए कम ही समय मिल पाता है। वहीं केबल टीवी और डीटीएच महंगा होने के बाद शहरी इलाकों में लोगों ने मोबाइल ऐप्स पर टीवी देखना ज़्यादा शुरू कर दिया है। पर ट्राई के नये क़दम के बाद अब मोबाइल पर भी टीवी देखना महंगा होने जा रहा है।