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​शपथ ग्रहण समारोह और मोदी की ‘रणनीति’!

Wednesday - May 29, 2019 10:34 am , Category : WTN HINDI
मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में कई ‘विशेष’ लोगों को मिला आमंत्रण
मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में कई ‘विशेष’ लोगों को मिला आमंत्रण

कुछ ‘हटकर’ होगा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का शपथ ग्रहण समारोह!
 

MAY 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल से देश की जनता को काफ़ी आशाएं हैं, लेकिन उससे पहले मोदी सरकार के शपथ ग्रहण समारोह पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। रणनीति और कूटनीति के माहिर नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में जिन मेहमानों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है, वे सभी अपने आप में काफ़ी ख़ास हैं और उन्हें आमंत्रण भी ख़ास वजह से दिया गया है।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि कूटनीति के तहत प्रधानमंत्री मोदी ने BIMSTEC के सदस्य देशों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है तो राजनीतिक रणनीति के रूप में मोदी ने दूरगामी सोच रखते हुए कई ऐसे लोगों को आमंत्रित किया है, जिसके कई मायने निकाले जा रहे हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि इस बार के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पश्चिम बंगाल में जोरदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की 42 में से 18 सीटों पर जीत हासिल की है। बंगाल में अपना वर्चस्व हासिल करने के लिए भाजपा ने सालों से वहां पर मेहनत की है। भाजपा ने बंगाल में 18 सीटें जीतकर सभी को चौका दिया है। इस जीत पर भाजपा का कहना है कि इसके पीछे पार्टी के लाखों कार्यकर्ताओं की मेहनत छिपी हुई है।

वहीं भाजपा का आरोप है कि बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने राजनीतिक दुश्मनी निकालते हुए राज्य में अभी तक उसके 54 कार्यकर्ताओं की हत्या की है। भाजपा का कहना है कि 16 जून 2013 से 26 मई 2019 तक बंगाल में राजनीतिक हिंसा के कारण उसके 54 कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। प्रधानमंत्री मोदी खुद भाजपा कार्यकर्ताओं की कथित हत्या का जिक्र अपने भाषणों में करते रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने राजनीतिक रणनीति के तहत अपने शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल में राजनीतिक हिंसा में मारे गये 54 भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजनों को आमंत्रित किया है। प्रधानमंत्री मोदी का यह क़दम अपने आप में काफ़ी सराहनीय माना जा रहा है। जहां एक तरफ़ शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मौजूद रहेंगी, तो वहीं दूसरी तरफ़ सामान्य से भाजपा कार्यकर्ताओं के परिजन मौजूद रहेंगे। बंगाल की राजनीति के जानकारों का मानना है कि बंगाल में इसका एक बहुत बड़ा संदेश जाएगा, और इसका पूरा लाभ भाजपा को मिलेगा।

मोदी और शाह की जोड़ी राजनीति के सभी गुणा भाग अच्छी तरह से जानती है। इसी कड़ी में 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारी अभी से भाजपा कर रही है। भाजपा जानती है कि 2024 लोकसभा चुनाव के समय दस सालों की सत्ता विरोधी लहर होगी, ऐसे में जीत हासिल करने के लिए एनडीए में और अन्य पार्टियों को शामिल किया जाना ज़रूरी है। इसी रणनीति के तहत, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमत्री के.चन्द्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश के नव नियुक्त मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को ‘विशेष’ रूप से अपने शपथ ग्रहण समारोह में आमंत्रित किया है।

कहा जा रहा है कि 2024 लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा, एनडीए का विस्तार करना चाहती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवीन पटनायक की पार्टी बीजू जनता दल और के.चन्द्रशेखर राव की पार्टी टीआरएस, अटल बिहारी वाजपेयी के समय एनडीए का हिस्सा रह चुके हैं। इस लोकसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने ओडिशा और तेलंगाना में सेंध लगाई है, उससे इन दोनों ही पार्टियों में चिता फैल गई है। लोकसभा चुनाव में भाजपा ने ओडिशा और तेलंगाना में काफ़ी अच्छा प्रदर्शन किया और पहले से ज़्यादा सीटों पर जीत हासिल की।

ओडिशा और तेलंगाना में धीरे-धीरे मज़बूत होती भाजपा से टक्कर लेने के बजाय बीजेडी और टीआरएस जैसी क्षेत्रीय पार्टियां एक अलग रणनीति के तहत फ़ैसला ले सकती हैं। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन दोनों ही पार्टियों का अस्तित्व सिर्फ़ उनके राज्य तक ही सीमित है। ऐसे में अपने राज्य के लिए बेहतर पैकेज और परियोजनाओं के लिए ये दोनों ही पार्टियां एनडीए का हिस्सा बन सकती हैं।

वहीं बात करें जगन मोहन रेड्डी की तो वाईएसआर कांग्रेस के नेता जगन मोहन रेड्डी की कांग्रेस और टीडीपी से राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई है। आंध्र प्रदेश में भाजपा मज़बूत नहीं है, ऐसे में जगन मोहन भी चाहेंगे कि नये राज्य आंध्र प्रदेश के लिए बेहतर पैकेज हासिल करना है तो सत्तारूढ़ एनडीए का साथ ज़रूरी है। ऐसे में हो सकता है कि 2024 लोकसभा चुनाव के पहले जगन मोहन रेड्डी एनडीए में शामिल हो जाएं और आंध्रप्रदेश के लिए एक बढ़िया पैकेज हासिल कर सकें।

साफ़ जाहिर है कि नरेन्द्र मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में बंगाल में राजनीतिक हिंसा में मारे गये अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के परिजनों को बुलाकर ममता बनर्जी को एक बहुत बड़ा सन्देश दिया है। वहीं ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, तेलंगाना के मुख्यमत्री के.चन्द्रशेखर राव और आंध्र प्रदेश के नवनिर्वाचित मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी को विशेष रूप से बुलाकर एनडीए के विस्तार की सम्भावनाओं के दरवाजे बीजेडी, टीआरएस और वाईएसआर कांग्रस के लिए खोल दिये हैं।

यदि यह तीनों ही पार्टियां एनडीए में शामिल होती हैं, तो इसका फ़ायदा ना केवल इन राज्यों को मिलेगा बल्कि इसका फ़ायदा एनडीए को भी मिलेगा और 2024 में एक बार फ़िर से एनडीए की जीत के सम्भावना बढ़ जाएगी। यानी कि साफ़ जाहिर है कि मोदी ने अपने शपथ ग्रहण समारोह में विशेष रूप से कुछ मेहमानों को आमंत्रित कर दूरगामी सोच के तहत काम किया है, जिसका फ़ायदा भाजपा और एनडीए दोनों को मिल सकता है।