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​मोदी सरकार को जल्द मिल सकती है 3 लाख करोड़ रुपये की पूंजी!

Friday - May 31, 2019 1:33 pm , Category : WTN HINDI
सरकार को रिज़र्व बैंक से 3 लाख करोड़ रुपये की रकम मिलने की ‘आशा’
सरकार को रिज़र्व बैंक से 3 लाख करोड़ रुपये की रकम मिलने की ‘आशा’

आरबीआई से मिल सकती है 'बड़ी रकम', कल्याणकारी योजनाओं में खर्च कर सकती है मोदी सरकार!
 
MAY 31 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार के लिए जल्द ही क़रीब 3 लाख करोड़ रुपयों की सौगात मिल सकती है। पढ़कर चौक गये होंगे आप कि आख़िर ऐसा क्या होने जा रहा है कि मोदी सरकार को इतनी बड़ी रकम मिलने जा रही है। क्या है यह पूरा मामला इसके बारे में आइये आपको विस्तार से बताते हैं।

दरअसल, भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 10 लाख करोड़ रुपए से अधिक की बफर पूंजी रखी हुई है। मोदी सरकार कुछ अंतर्राष्ट्रीय नियमों का हवाला देकर इस पूंजी का कुछ हिस्सा लेना चाहती है ताकि उसका उपयोग विकास कार्यों में किया जा सके। सरकार का तर्क है कि आरबीआई के पास जो रकम रखी हुई है वो अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार नहीं है।

इसी तर्क का हवाला देते हुए सरकार रिज़र्व बैंक के पास जमा पूंजी में से कुछ हिस्सा चाहती है। अब रिज़र्व बैंक की इस जमा राशि में से कितना हिस्सा सरकार को दिया जा सकता है, इसके लिए आरबीआई के पूर्व गवर्नर बिमल जालान के नेतृत्व में एक समिति का गठन किया गया है। 13 जून को इस समिति की बैठक होने जा रही है, जिसके बाद साफ़ होगा कि मोदी सरकार को रिज़र्व बैंक की 10 लाख करोड़ रूपये की जमा पूंजी में से कितनी रकम मिल सकती है। हालांकि, अभी तक बिमल जालान समिति ने अपनी रिपोर्ट को अन्तिम रूप नहीं दिया है।

अनुमान लगाया जा रहा है कि जालान कमेटी, मोदी सरकार को रिज़र्व बैंक के पास जमा पूंजी का 30 प्रतिशत के क़रीब देने की सिफारिश कर सकती है। यानी कि रिज़र्व बैंक से मोदी सरकार को क़रीब 3 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 6 सदस्यों वाली बिमल जालान कमेटी का गठन 26 दिसम्बर 2018 को किया गया था। कमेटी को शुरू में तीन महीने का समय अपनी रिपोर्ट देने के लिए दिया गया था, लेकिन बाद में इसकी समय सीमा बढ़ा दी गई।

मोदी सरकार का मानना है कि आरबीआई अपने पास रिज़र्व के रूप में जो रकम रखती है, वह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है। इस विवाद के सामने आने के बाद ही आरबीआई का इकोनॉमिक कैपिटल फ्रेमवर्क तय करने के लिए बिमल जालान कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी को आरबीआई के प्रावधानों, भंडारण और बफ़र स्टॉक की स्थिति, आवश्यकता और औचित्य की समीक्षा करना है। बिमल जालान की अध्यक्षता वाली यह छह सदस्यीय समिति यह सिफारिश करेगी कि किन आधारों पर आरबीआई जोखिम का आकलन कर यह तय करे कि कितनी पूंजी उसे अपने पास रखनी चाहिए और कितनी सरकार को दे देनी चाहिए।

बिमल जालान कमेटी अपने रिपोर्ट में सुझाव देगी कि किन प्रावधानों के तहत कितना बफर स्टॉक आरबीआई को अपने पास रखना चाहिए। कमेटी यह भी निर्धारित करेगी कि आरबीआई अधिशेष या आरक्षित स्तरों में कमी के प्रावधान, भण्डार और बफ़र स्टॉक को मैनटेन कर रहा है कि नहीं। दरअसल, वित्त मंत्रालय का कहना है कि आरबीआई के पास अपनी कुल सम्पत्ति के 28 प्रतिशत के बराबर बफर पूंजी है, जो कि वैश्विक स्तर पर केन्द्रीय बैंकों द्वारा रखी जाने वाली रिज़र्व पूंजी की तुलना में कहीं ज़्यादा है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पूरी दुनिया में केन्द्रीय बैंकों द्वारा रखी गई बफर पूंजी का अनुपात 14 प्रतिशत है, जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा रखी गई बफर पूंजी का अनुपात 28 प्रतिशत है। केन्द्र सरकार और आरबीआई के बीच इसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जिसके बाद आरबीआई के तत्कालीन गवर्नर उर्जित पटेल ने व्यक्तिगत कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।  

यदि मोदी सरकार को बिमल जालान कमेटी के सिफारिश के बाद रिज़र्व बैंक से 3 लाख करोड़ रूपये की रकम मिल जाती है तो इससे सरकार को कई कल्याणकारी योजनाओं के लिए पैसा आवंटित करने में सहायता मिलेगी। कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक से मिली पूंजी का इस्तेमाल किसानों की कल्याणकारी योजनाओं में खर्च हो सकता है।