BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

क्या आप जानते हैं कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के बारे में ?

Wednesday - June 5, 2019 3:29 pm , Category : WTN HINDI
शुक्ल पक्ष में किये जाते हैं शुभ कार्य
शुक्ल पक्ष में किये जाते हैं शुभ कार्य

चन्द्रमा की कलाएं निर्धारित करती हैं पक्ष

JUNE 05 (WTN) – हिन्दू पंचांग के अनुसार एक साल में 12 महीने होते है। वहीं तीन साल बाद अधिक मास आता है तो चौथे साल 13 महीने हो जाते हैं। हर महीने के एक दिन को तिथि कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार तिथि की अवधि 19 से 24 घण्टों तक की हो सकती है। पंचांग में यह भी माना जाता है कि हर माह में तीस दिन होते है। इन दिनों की गणना चन्द्र की गति के अनुसार की जाती है।
 
हिन्दू पंचांग में आपने कई बार कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के बारे में सुना होगा। दरअसल चन्द्रमा की कलाओं के अधिक या कम होने के आधार पर ही हिन्दू माह को दो पक्षों में बांटा गया है। इन्हीं दो पक्षों में से एक को कृष्ण पक्ष और दूसरे को शुक्ल पक्ष कहा जाता है।
 
पहले जानते हैं कृष्ण पक्ष के विषय में। पूर्णिमा और अमावस्या के मध्य के भाग को कृष्ण पक्ष कहा जाता है। पूर्णिमा के अगले ही दिन से ही कृष्ण पक्ष शुरू माना जाता है जो कि लगभग 15 दिनों का रहता है। मान्यता है कि कृष्ण पक्ष में किसी भी शुभ कार्य को नहीं करना चाहिए। कोई भी शुभ काम नहीं करने के पीछे कई तर्क दिये जाते हैं। जैसे पूर्णिमा के बाद जब चन्द्रमा घटता है, यानि चन्द्रमा की कलाएं कम होती हैं तो चन्द्रमा की शक्ति कमज़ोर हो जाती है। इसके साथ ही चन्द्रमा के आकार में कमी आने से रातें अंधेरी होती है। इस कारण कृष्ण पक्ष को शुभ नहीं माना जाता है।
 
आइये अब जानते हैं शुक्ल पक्ष के विषय में। अमावस्या और पूर्णिमा के मध्य के अंतराल को शुक्ल पक्ष कहा जाता है। अमावस्या के बाद के लगभग 15 दिन इस पक्ष में आते है। अमावस्या के अगले ही दिन से चन्द्रमा का आकर बढ़ना शुरू हो जाता है, या ऐसा कहा जाए कि चन्द्रमा की कलाएं भी बढ़ती हैं। ऐसा होने से चन्द्रमा बड़ा होता जाता है और रातें अंधेरी नहीं रहतीं, बल्कि चांद की रोशनी से चमक जाती हैं।
 
इस दौरान चंद्र बल मजबूत होता है और यही कारण है कि कोई भी शुभ काम करने के लिए इस पक्ष को उपयुक्त और सर्वश्रेष्ठ हिन्दू पंचांग में माना जाता है। किसी भी नए काम की शुरुआत भी शुक्ल पक्ष में ही की जाती है।