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​नहीं सुधरे हालात तो ‘डिफॉल्टर’ होने की कगार पर पाकिस्तान!

Thursday - June 13, 2019 1:06 pm , Category : WTN HINDI
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने इमरान खान ने मांगी देश की जनता से ‘कुर्बानी’!
अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने इमरान खान ने मांगी देश की जनता से ‘कुर्बानी’!

आईएमएफ की कड़ी शर्तों से पाकिस्तान में महंगाई की मार

JUNE 13 (WTN) – अब तक के सबसे ख़राब आर्थिक हालत से गुजर रहे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय लिटमस टेस्ट से गुजर रही है। देश की अर्थव्यस्था को तबाह होने से बचाने के लिए आईएमएफ की शर्तों को मानना पाकिस्तान की जनता से साथ अत्याचार करने जैसा साबित हो रहा है। आने वाले समय में पाकिस्तानियों को महंगाई समेत काफ़ी आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, और परेशानियां भी ऐसी कि जिनकी कल्पना भी उन्होंने कभी ना की हो।

हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने अपने पहले पूर्णकालिक बजट में देश की जनता को महंगाई का करारा झटका दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान सरकार ने बजट में कई नए तरह के टैक्स लगाए हैं और कई कठोर नीतियां बनाई हैं। पाकिस्तान के बजट में अगले वित्तीय वर्ष के लिए 36.5 अरब डॉलर कर राजस्व का बेहद महत्वाकांक्षी लक्ष्य घोषित किया गया है, जो कि पिछले साल की तुलना में 30 प्रतिशत ज़्यादा है।

इतना ही नहीं, इमरान खान सरकार ने आयकर की अधिकतम दर को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 35 प्रतिशत कर दिया है और टैक्स स्लैब को भी बढ़ा दिया है। पिछले साल सत्ता में आई इमरान खान सरकार के पास खर्च करने के लिए पैसा ही नहीं बचा है। कर राजस्व जुटाने के लिए पाकिस्तान की सरकार ने पहले ही गैस और बिजली की दरें बढ़ा दी हैं। हालत यह हो गई है कि अब मोबाइल फोन के स्क्रैच कार्ड पर भी टैक्स लगा दिया है।

आने वाले दिनों में पाकिस्तान की जनता को आर्थिक मोर्चे पर काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि इमरान खान ने राष्ट्र को सम्बोधित कर देश की जनता से साथ देने की गुजारिश की है। इमरान खान ने खुद का उदाहरण देते हुए देशवासियों से 'कुर्बानी' देने की भावुक अपील की है। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इमरान खान सरकार अपने बजट-व्यापार घाटे को घटा रही है और दूसरी तरफ टैक्स बढ़ाकर अर्थव्यवस्था को डिफॉल्ट होने से बचाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इमरान खान सरकार के इस क़दम से पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ने वाली है।

जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान ने आईएमएफ से 6 अरब डॉलर का बैलआउट पैकेज लिया है। बैलआउट पैकेज की शर्तों के मुताबिक़ पाक सरकार को अर्थव्यवस्था को दुरस्त करना होगा। दरअसल, पाकिस्तान सरकार के खर्च उसकी आय से बहुत ज़्यादा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पिछले 10 सालों में पाकिस्तान का आयात लगातार बढ़ा है, जबकि निर्यात उसी जगह पर है।

इसी व्यापार असंतुलन के कारण पाकिस्तान का डॉलर का खजाना बिल्कुल खाली हो चुका है, जिसके कारण कच्चे तेल समेत ज़रूरी वस्तुओं के आयात और विदेशी कर्ज़ के लिए भुगतान का संकट पैदा हो गया है। अगर पाकिस्तान का डॉलर का खजाना जल्दी नहीं भरता है तो फिर पाकिस्तान डिफॉल्टर घोषित हो सकता है।

पाकिस्तान को दिये कर्ज़ के लिए आईएमएफ ने सरकार से खर्च कम करने और कर राजस्व बढ़ाने समेत कई कड़ी शर्तें रखी हैं। अर्थशास्त्र के नियमानुसार जब अर्थव्यवस्था में गति आती है तो व्यापार बढ़ता है, जिससे ज़्यादा नौकरियां पैदा होती हैं। इसी क्रम में लोगों का प्रमोशन होता है और वेतन बढ़ने के कारण उनके खर्च भी बढ़ जाते हैं और विदेश से आयात बढ़ जाता है। लेकिन वहीं जब अर्थव्यवस्था सिकुड़ती है तो इसका पूरी तरह से उल्टा होता है।

आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक पाकिस्तान की सरकार यही करना चाहती है कि फिलहाल महंगाई खूब बढ़े। जब महंगाई बढ़ेगी तो नौकरियां भी कम होंगी और अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ जाएगी। इस सबसे लोग कम खर्च करेंगे, जिससे आयात भी घट जाएगा। आयात घटने से डॉलर की कमी खत्म हो जाएगी और व्यापार घाटा भी कम हो जाएगा। लोगों के खर्चे कम होने से सरकार बजट घाटा भी कम कर पाएगी और विकास कार्यों के लिए पैसे भी बचा पाएगी। लेकिन लगता नहीं है कि इमरान सरकार महंगाई बढ़ाकर टैक्स वसूली का लक्ष्य हासिल कर पाएगी, क्योंकि उनसे पहले वाली सरकारें इस तरह से राजस्व बढ़ाने में नाकामयाब ही रही हैं।

अर्थशास्त्र के जानकारों का मानना है कि आने वाले दो साल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए काफ़ी मुश्किल और चुनौतीपूर्ण हैं। यदि पाकिस्तान सरकार आईएमएफ के दिखाए गये रास्ते पर चलकर देश की अर्थव्यस्था में सुधार लाने में सफल होती है तो ठीक है, नहीं तो एक बार फ़िर से पाकिस्तान सरकार को आईएमएफ से कर्ज़ के लिए गुहार लगाना पड़ेगी। वो तो ठीक है, लेकिन इन दौरान महंगाई के कारण दो बदतर हालत पाकिस्तान की जनता की होगी उससे उबर पाना उनके बस की बात नहीं।

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