BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

​‘उम्मीदों’ की मोदी सरकार से जनता को काफ़ी ‘आशाएं’!

Wednesday - June 19, 2019 10:48 am , Category : WTN HINDI
प्रधानमंत्री मोदी के सामने पहले 100 दिनों की ‘चुनौतियां’
प्रधानमंत्री मोदी के सामने पहले 100 दिनों की ‘चुनौतियां’

विकास के लक्ष्य को हासिल करने प्रधानमंत्री मोदी बनाएंगे ‘रोडमैप’

JUNE 19 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी जानते हैं कि देश की जनता को उनसे काफ़ी उम्मीदे हैं। भारत के लोकसभा चुनाव के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कांग्रेस को छोड़कर किसी अन्य राजनीतिक दल को दूसरी बार पूर्ण बहुमत हासिल हुआ हो। देश की जनता ने प्रधानमंत्री मोदी पर विश्वास जताते हुए उन्हें एक बार फ़िर से देश की कमान सौंपी है। ऐसे में मोदी जानते हैं कि उनसे देश की जनता को बहुत सी आशाएं है कि उनकी सरकार आने वाले पांच सालों में कुछ हटकर बेहतरीन काम करेगी।

प्रधानमंत्री मोदी के सामने अपने दूसरे कार्यकाल में काफ़ी चुनौतियां हैं, जिसमें  सबसे बड़ी चुनौती है सुस्त पड़ती देश की अर्थव्यवस्था। प्रधानमंत्री जानते हैं कि नोटबंदी और जीएसटी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को जो झटके लगे थे उसके बाद धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था ने गति पकड़ी थी, लेकिन जिस गति से देश की अर्थव्यवस्था को इस समय आगे बढ़ना चाहिए वो गति अर्थव्यवस्था की नहीं है। इसी से चिंतित प्रधानमंत्री मोदी अपनी सरकार के 100 दिन के एजेंडा को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। ताकि इसी के आधार पर आने वाले पांच सालों के लिए रोडमैप तैयार किया जा सके।

प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है कि आने वाले पांच सालों में भारत की अर्थव्यवस्था पांच हजार अरब डॉलर की हो। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी अभी से प्लानिंग में जुट गये हैं। सबसे पहले प्रधानमंत्री जानते हैं कि देश में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए राजस्व की ज़रूरत होती है। ऐसे में राजस्व बढ़ाने के उपायों पर मोदी सरकार काफ़ी गम्भीरता से काम कर रही है।

देश में जीडीपी में वृद्धि की रफ़्तार तेज़ रहे इसके लिए भी ज़मीनी स्तर पर काफ़ी काम किये जाने की ज़रूरत है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 6.8 प्रतिशत पर आ गई है, जो कि पिछले पांच सालों में सबसे कम है। महंगाई के मोर्चे पर भी मोदी सरकार को काफ़ी चुनौतियां का सामना आने वाले पांच सालों में करना होगा।

आंकड़ों के अनुसार वैसे तो इस समय मुद्रास्फीति यानी कि महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के संतोषजनक स्तर के दायरे में है, लेकिन जनवरी-मार्च की तिमाही के दौरान आर्थिक वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत के स्तर पर आ गई जो कि पांच साल में सबसे कम है। और इसी कारण से वृद्धि दर के मामले में भारत अब चीन से पिछड़ गया है।

देश की अर्थव्यवस्था को गति देने के अलावा प्रधानमंत्री मोदी के सामने कई और भी चुनौतियां हैं, जैसे किसानों की आय दोगुना करना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लिए बजट जुटाना, प्रधानमंत्री आवास योजना में सभी को घर मिलना, सबको पेयजल और बिजली। जैसा कि आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी समय-समय पर किसानों से वादा करते आए हैं कि उनकी सरकार किसानों की आय को दोगुना करेगी। लेकिन वादा करने में और उसे पूरा करे में बहुत अन्तर होता है।

किसानों की आय दोगुनी करना आसान नहीं है, क्योंकि यदि फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ाया जाएगा तो उससे महंगाई बढ़ेगी। यदि ऐसा होता है तो यह भी एक बहुत बड़ी समस्या मोदी सरकार के सामने रहेगी। लेकिन किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए मोदी सरकार कृषि क्षेत्र में ढांचागत सुधार कर सकती है, वहीं इस क्षेत्र में निजी निवेश को भी बढ़ावा दे सकती है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए उन्हें बाज़ार समर्थन उपलब्ध कराने और लॉजिस्टिक व्यवस्था को दुरुस्त करने पर भी मोदी सरकार को ध्यान देना होगा।

देश की अर्थव्यवस्था और कृषि क्षेत्र में सुधार के साथ-साथ कई अन्य चुनौतियां भी मोदी सरकार के सामने है, जैसे बैंकों में फंसे कर्ज़ में वृद्धि, गैर-बैंकिग वित्तीय कम्पनियों में नक़दी संकट, बढ़ती बेरोज़गारी औऱ रोज़गार के अवसर, विदेशी निवेशी, निर्यात में वृद्धि। अब देखना होगा कि आने वाले समय में मोदी सरकार इन चुनौतियों से किस तरह से निपटती है और अपने दूसरे कार्यकाल के पहले 100 दिनों में प्रधानमंत्री मोदी देश की जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाते हैं।