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​बजट में मोदी सरकार ले सकती है कारों को लेकर बढ़ा ‘फ़ैसला’!

Thursday - June 20, 2019 10:47 am , Category : WTN HINDI
सीएनजी कारों पर कम हो सकता है जीएसटी
सीएनजी कारों पर कम हो सकता है जीएसटी

सीएनजी कारों पर जीएसटी कम करने से सरकार को हैं कई ‘फ़ायदे’!

JUNE 20 (WTN) – कहा जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड जीत के बाद मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में आम लोगों को काफ़ी सौगातें दे सकती है। जहां एक तरफ़ किसानों, व्यापारियों और युवाओं के लिए मोदी सरकार नई योजनाओं के जरिये उन्हें लाभान्वित कर सकती है, तो वहीं देश के मध्यम वर्ग को भी खुश करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी उन्हें कुछ राहत दे सकती है।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में मध्यम वर्ग एक बहुत बड़ा वोट बैंक है। कहा जाता है कि यही मध्यम वर्ग सालों से भाजपा का परम्परागत वोटर रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी मध्यम वर्ग ने लगातार दूसरी बार भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया है। अपने परम्परागत वोट बैंक को खुश करने के लिए हो सकता है कि मोदी सरकार CNG कारों पर GST की दर कम करे।
 
दरअसल, भारत में इन दिनों मध्यम वर्ग की क्रय क्षमता बढ़ी है। इसी कारण से भारत में पिछले 5 सालों से कारों की ख़रीदी में मध्यम वर्ग ने ज़्यादा रूचि दिखाई है। इसी मध्यम वर्ग के लिए मोदी सरकार सीएनजी कारों पर जीएसटी की दर को कम कर सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय CNG कारों पर 28 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है। ऑटो क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस बार बजट में CNG कारों पर जीएसटी की दर 18 प्रतिशत हो सकती है। ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री से जुड़े लोगों की भी मांग है कि मोदी सरकार को CNG कारों पर GST की दर कम करना चाहिए।

ऑटो क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि CNG कारों पर जीएसटी की दर कम करने से कई लाभ हो सकते हैं। एक तो इससे इम्पोर्ट बिल कम होगा साथ ही प्रदूषण कम करने में भी इससे मदद मिलेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत को पेट्रोल-डीज़ल आयात करने में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ती है। यदि देश में सीएनजी कारों को बढ़ावा मिलेगा तो इससे पेट्रोल-डीज़ल आयात करने में खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वहीं प्रदूषण को ध्यान में रखते हुए भी यह ज़रूरी हो गया है कि सरकार सीएनजी से चलने वाली कारों को बढ़ावा दे।

वैसे केन्द्र सरकार ने इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने के लिए इन पर सिर्फ़ 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाया है। लेकिन सीएनजी कार समेत बाक़ी गाड़ियों पर जीएसटी की दर 28 प्रतिशत है। वहीं हाइब्रिड गाड़ियों पर इस समय 43 प्रतिशत टैक्स लगता है, जिसमें 28 प्रतिशत जीएसटी शामिल है।

ऑटो क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि सीएनजी से चलने वाले वाहन एक तो प्रदूषण नहीं फैलाते और दूसरा माइलेज अच्छा देते हैं, जिसके कारण इनके उपभोक्ता इनसे काफ़ी संतुष्ट हैं। वहीं पेट्रोल-डीज़ल की तुलना में सीएनजी गाड़ियों का ख़र्चा और रखरखाव भी सस्ता है। इतना ही नहीं, सीएनजी सप्लाई के लिए कई सोर्स हैं और इसका भण्डार प्रचूरता में है। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को सीएनजी कारों पर जीएसटी कम करना चाहिए, जिससे इन गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि हो।

मोदी सरकार भी जानती है कि आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीज़ल से चलने वाली गाड़ियों की बिक्री में कमी आएगी और लोगों का रुझान पर्यावरण हितैषी गाड़ियों की तरफ़ होगा। ऐसे में मोदी सरकार बायोफ्यूल, बायो-CNG, एथेनॉल, मिथेनॉल जैसे साफ ईंधन को बढ़ावा देने के काफ़ी प्रयास कर रही है। इसी के कारण मोदी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले दस सालों में देश में 10,000 CNG फिलिंग स्टेशन स्थापित किये जाएं।

अब देखना होगा कि मोदी सरकार पर्यावरण और इम्पोर्ट बिल को ध्यान में रखते हुए सीएनजी गाड़ियों पर जीएसटी को कम करती है कि नहीं। यदि मोदी सरकार ने सीएनजी गाड़िय़ों पर जीएसटी दर कम की और सीएनजी फिलिंग स्टेशनों की संख्या में इजाफ़ा किया तो इससे देश में सीएनजी गाड़ियों की बिक्री में वृद्धि होगी। ऐसा होने से जहां एक तरफ़ पेट्रोल-डीज़ल के आयात में कमी से देश की बहुमूल्य विदेशी मुद्रा बचेगी, वहीं दूसरी तरफ़ प्रदूषण पर काफ़ी हद तक नियंत्रण लगाया जा सकेगा।