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​...तो क्या तीसरे विश्व युद्ध का 'काउंटडाउन' शुरू हो गया है?

Friday - June 21, 2019 10:20 am , Category : WTN HINDI
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण दे खेमों में बंट रही दुनिया!
ईरान-अमेरिका तनाव के कारण दे खेमों में बंट रही दुनिया!

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ी 'तनातनी', मंडराया तीसरे विश्व युद्ध का 'ख़तरा'!

JUNE 21 (WTN) – क्या दुनिया तीसरे विश्वयुद्ध के कगार पर खड़ी हुई है? हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे 'विवाद' के कारण पूरी दुनिया के देश दो हिस्सों में बंटते नज़र आ रहे हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ता है तो 'आशंका' जताई जा रही है कि दुनिया के अन्य देश भी इस युद्ध में दोनों में से किसी एक पक्ष का साथ ले सकते हैं, और यदि ऐसा होता है तो इसके साथ ही तीसरे विश्व युद्ध का 'आगाज़' हो जाएगा!

वैसे तो अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले काफ़ी समय से बना हुआ है। लेकिन इसी तनाव के बीच दोनों देशों के बीच तनातनी और भी बढ़ गई जब ईरान ने अमेरिका नौसेना के एक शक्तिशाली ड्रोन MQ-4C ट्राइटन को मार गिराया। अमेरिका के ड्रोन को मार गिराने के पीछे ईरान का 'तर्क' है कि उसने ड्रोन को इसलिए मार गिराया, क्योंकि वह उनकी (ईरान) सीमा में घुस रहा था। लेकिन अमेरिका ने ईरान के दावे को 'ग़लत' क़रार देते हुए कहा है कि उसका ड्रोन ईरान की सीमा में नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में था।

ईरान द्वारा अमेरिका के ड्रोन को मार गिराए जाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को 'चेतावनी' देते हुए कहा है कि ईरान ने बहुत 'बड़ी ग़लती' कर दी है। विवाद अमेरिका और ईरान के बीच है, लेकिन इन दोनों देशों के विवाद में दुनिया के कई देश दो 'हिस्सों' में बंट गये हैं। ईरान का साथ लेते हए अब रूस अमेरिका के 'ख़िलाफ़' आ खड़ा हुआ है। इतना ही नहीं, खाड़ी के देश सऊदी अरब ने भी ईरान को 'चेतावनी' दे दी है।

शीत युद्ध के समय एक दूसरे के ख़िलाफ़ मिसाइल ताने खड़े रहे रूस और अमेरिकी की 'पुरानी कटुता' एक बार फ़िर से सामने आ रही है। ईरान पर अमेरिकी 'दबाव' के ख़िलाफ़ रूस ने कहा है कि अगर अमेरिका ने ईरान के विरुद्ध कोई भी एक्शन लिया तो उससे 'तबाही' मचेगी। वहीं, अमेरिका के 'नज़दीकी' सऊदी अरब ने अमेरिका का पक्ष लेते हुए ईरान पर 'दोषारोपण' करते हुए कहा कि ईरान के कारण ही खाडी में गम्भीर हालात पैदा हो गए हैं।

रूस का अमेरिका को यह कहना है कि युद्ध की स्थिति में वह (रूस) ईरान के साथ है, अपने आप में तीसरे विश्व युद्ध की 'आहट' है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन, ईरान के क़रीबी माने जाते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव में कई बार रूस ने ईरान का साथ दिया है। पुतिन ने साफ़ तौर पर अमेरिका को धमकी देते हुए कहा है कि यदि वॉशिंगटन किसी भी तरीक़े से यदि इस क्षेत्र में हिंसा को बढ़ावा देगा तो इसकी 'भरपाई' करना मुश्किल होगा।

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत की बात की जाए तो भारत की स्थिति अभी 'तटस्थ' है। लेकिन भारत जानता है कि यदि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध छिड़ता है तो इससे वो भी 'अछूता' नहीं रहेगा, क्योंकि खाड़ी में युद्ध होने से क्रूड ऑयल महंगा होगा जिसका सबसे ज़्यादा 'असर' भारत पर पड़ेगा। इसी के मद्देनज़र भारतीय नौसेना ने ओमान की खाड़ी में अपने दो युद्धपोत तैनात कर दिए हैं। दरअसल, भारत ने यह इसलिए किया है, क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ रहे तनाव के बीच भारत को अपने तेल टैंकरों को 'सुरक्षित' लाना है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय नौसेना ने विध्वंसक INS चेन्नै और गश्ती पोत INS सुनयना को ओमान की खाड़ी में तैनात कर दिया है। भारत ने अपने इस प्लान को 'ऑपरेशन संकल्प' नाम दिया है। कहा जा रहा है कि नेवी ने यह 'क़दम' सुरक्षा चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ही उठाया है। भारतीय नौसेना के मुताबिक़, भारतीय नौसेना इस क्षेत्र में मैरीटाइम ट्रेड और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए 'प्रतिबद्ध' है। इतना ही नहीं, भारतीय नौसेना हिन्द महासागर क्षेत्र में शान्ति बनाए रखने के लिए भी काम कर रही है।

दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता टूटने के बाद से ही 'तनाव' बना हुआ है। अमेरिका द्वारा परमाणु समझौता ख़त्म होने के बाद अमेरिका ने दोबारा ईरान पर कई प्रतिबंध लगा दिए थे। वहीं, पिछले सप्ताह ओमान की खाड़ी में तेल टैंकरों पर हुए 'हमलों' के बाद से खाड़ी क्षेत्र में सैन्य टकराव का 'ख़तरा' और भी बढ़ गया है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ती है, तो स्वाभाविक है कि रूस और सऊदी अरब जैसे देश भी इस युद्ध का हिस्सा होंगे। यदि ऐसा होता तो एक बार फ़िर से दुनिया विश्व युद्ध की 'विभीषिका' झेलेगी।