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​काम आई प्रधानमंत्री मोदी की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’, ‘मदद’ के लिए आगे आया यूएई!

Tuesday - June 25, 2019 10:27 am , Category : WTN HINDI
भारत में ‘नियंत्रण’ में रहेंगी तेल की क़ीमतें
भारत में ‘नियंत्रण’ में रहेंगी तेल की क़ीमतें

ईरान-अमेरिका ‘तनाव’ के बीच यूएई करेगा भारत को तेल की सप्लाई

JUNE 25 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंका बनी हुई है। ईरान द्वारा अमेरिकी द्रोण को मार गिराये जाने और फ़िर उसके बाद अमेरिका द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई से साफ़ है कि दोनों देश युद्ध की कगार पर खड़े हुए हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच क्रूड ऑयल की क़ीमतों में उछाल देखा जा रहा है। ईरान द्वारा अमेरिकी द्रोण को मार गिराये जाने के बाद क्रूड ऑयल की क़ीमतों में 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है जो कि जनवरी के बाद से सबसे ज़्यादा है।

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंका के बीच, क्रूड ऑयल के महंगा होने के कारण भारत को काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। तो वहीं अमेरिका पर ईरान के प्रतिबंध के कारण भारत, ईरान से तेल आयात नहीं कर पा रहा है। इन दोनों ही परिस्थितियों के कारण भारत में क्रूड ऑयल के आयात पर असर पड़ता दिख रहा है, जिसके कारण कहा जा रहा था कि आने वाले दिनों में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें 100 रुपये प्रति लीटर से ज़्यादा हो सकती हैं।

लेकिन इस सबके बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘ऑयल डिप्लोमेसी’ काम आई और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने भारत को ‘आश्वासन’ दिया है कि ईरान पर अमेरिका की ओर से लगाये गये प्रतिबंध के बाद भारत के लिए तेल आपूर्ति में आई कमी को वो (यूएई) पूरा करेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत को यह आश्वासन संयुक्त अरब अमीरात के राजूदत अहमद अल बन्ना ने दिया है। बन्ना के मुताबिक़ ईरान से तेल आयात बंद होने के बाद यूएई, भारत को ज़्यादा तेल की सप्लाई करेगा जिससे भारत में पेट्रोल और डीज़ल के दामों में ‘बेतहाशा’ वृद्धि नहीं हो पाएगी।

इधर, ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच भारत ने होर्मुज चैनल की घटनाओं पर चिंता ज़ाहिर की है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि होर्मुज चैनल पर तेल टैंकरों में विस्फोट के बाद से कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि देखी जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। कच्चे तेल के आयात में भारत को काफ़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा ख़र्च करना पड़ती है। भारत और ईरान के बीच कच्चे तेल का व्यापार सुचारू रूप से चल रहा था। लेकिन अमेरिका के ईरान के साथ परमाणु क़रार से अलग होने और ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत ने इस साल मई में ईरान से तेल का आयात रोक दिया था।

ईरान से तेल आयात बंद होने के बाद भारत के सामने संकट खड़ा हो गया था कि इसकी आपूर्ति कहां से की जाए। भारत ने तेल निर्यात करने वाले देशों के समूह ओपेक के एक महत्वपूर्ण सदस्य देश सऊदी अरब से गुजारिश की थी ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वो कुछ कदम उठाए।

ईरान से तेल आपूर्ति बंद होने और ईरान-अमेरिका तनाव के कारण भारत में तेल के क़ीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई को इस बात के लिए मना लिया है कि वो संकट की इस घड़ी में भारत को तेल आपूर्ति करेगा। यानि कि कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की कूटनीति के कारण ईरान-अमेरिका तनाव के बीच भी भारत को निर्बाध रूप से कच्चे तेल की आपूर्ति होती रहेगी और भारत में तेल की क़ीमतों में उतनी वृद्धि नहीं होगी जितनी वृद्धि की आशंका ज़ाहिर की जा रही थी।