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कम होते एटीएम का सामने आया विकल्प!

Monday - July 1, 2019 10:24 am , Category : WTN HINDI
एटीएम की कमी को पूरा करेगा आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम
एटीएम की कमी को पूरा करेगा आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम

अब दुकानों में खुलेंगे मर्चेंट पाइंट्स, पैसा जमा करने और निकालने की मिलेगी सुविधा

JULY 01 (WTN) – एटीएम से पैसा निकालना आजकल सामान्य सी बात है। बैंक में लगने वाली लम्बी-लम्बी लाइनों में परेशान होकर पैसा निकालने से आपको राहत मिल जाती है, जब आप एटीएम से पैसा निकालते हैं। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि अब आपको एटीएम से पैसा निकालने के लिए एटीएम का मिलना मुश्किल हो जाएगा तो यह पढ़कर आप आश्चर्यचकित हो गये होंगे। दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि देश में धीरे-धीरे एटीएम की संख्या कम होती जा रही है।
 
कंफेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) के मुताबिक, सॉफ्टवेयर और अपग्रेडेशन की ऊंची मेंटेनेंस लागत को कम करने के लिए देश भर से क़रीब 50 प्रतिशत एटीएम हटाने का फ़ैसला लिया गया है। यदि ऐसा होता है तो एटीएम से पैसा निकालने के लिए शायद आपको आसपास एटीएम ही ना मिले, और यदि एटीएम मिले भी तो वहां पर भीड़ के कारण आपको लाइन में लगना पड़े।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत में आज भी एटीएम की संख्या ज़रूरत के हिसाब से कम ही है। प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत करोड़ों की तादात में लोगों के बैंक में अकाउंट तो खुल गये हैं, लेकिन उस तादात में बैंकों की शाखाएं और एटीएम नहीं हैं, और जो हैं उनकी संख्या भी कम होती जा रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक 10 लाख लोगों पर सिर्फ़ 49 बैंक शाखाएं हैं। वहीं मेट्रो शहरों में यह आंकड़ा 139 बैंक ब्रांचों का है। बात करें एटीएम की तो ग्रामीण और अर्ध-ग्रामीण क्षेत्रों में जहां 10 लाख लोगों पर सिर्फ़ 110 एटीएम हैं, तो वहीं शहरी क्षेत्रों में 10 लाख लोगों पर सिर्फ़ 305 एटीएम हैं।

वैसे इन दिनों नक़द लेन-देन की जगह पर डिजिटल लेनदेन के प्रति लोगों का रूझान बढ़ा है। इंटरनेट बैकिंग, यूपीआई और मनी ट्रांसफर के ऐप होने के कारण शहरों और कस्बों के लोग इनका उपयोग कर लेनदेन कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीण इलाकों में फ़िलहाल यह स्थिति नहीं है। माना कि जनता लेन-देन के लिए डिजिटल तरीक़ा अपना रही है, पर एटीएम की संख्या में 50 प्रतिशत की कमी होने से स्वाभाविक है कि लोगों को नकदी की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा भारी तादात में एटमी बंद होने से लाखों लोगों को बेरोज़गारी का भी सामना करना पड़ रहा है।

वैसे दिनों दिन कम होते एटीएम के कारण, एटीएम के विकल्प के रूप में एक नया समाधान सामने आया है। इन दिनों स्पाइस मनी का माइक्रो एटीएम कम होते एटीएम की कमी को पूरा करने का काम कर रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्पाइस मनी, स्पाइस डिजिटल की एक बिजनेस यूनिट है, जो दुकानों बैंक की ब्रांच की तरह एक मर्चेंट पाइंट्स खोलने का काम रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बैंक ब्रांच की तरह के इन मर्चेंट पाइंट्स में आधार इनेबल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS) का उपयोग किया जाएगा। इस मर्चेंट पाइंट्स में कोई भी सिर्फ़ अपने अंगूठे की छाप से बेसिक बैंकिंग सर्विसेज का उपयोग कर सकेगा। इस आउटलेट में कैश जमा करना और निकालना, बैलेंस की जानकारी, आधार से आधार में फण्ड ट्रांसफर और मिनी स्टेटमेंट जैसे सुविधाएं लोगों को मिल सकेंगी। AePS के जरिये सिर्फ़ फिंगरप्रिंट और माइक्रोएटीएम के जरिये कोई भी अपने डेबिट कार्ड से पैसा निकाल सकता है।
 
जानकारी के मुताबिक़ स्पाइस मनी ने पूरे देश में क़रीब 2 लाख मर्चेंट पाइंट्स स्थापित किए हैं, जहां पर आधार इनबिल्ड पेमेंट सिस्टम (AePS ) के जरिये पैसा निकाला जा सकता है। कम्पनी हर महीने अपने मर्चेंट पाइंट्स की संख्या में लगातार इज़ाफा कर रही है। ऐसा होने से लगातार कम होते एटीएम से लोगों को शायद अब ज़्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।

कहने को तो यह सुविधा काफ़ी अच्छी है, लेकिन इस तरह के मर्चेंट पाइंट्स की ज़्यादा ज़रूरत कस्बों और बड़े गांवों में है, क्योंकि इन जगहों पर अभी भी डिजिटल लेनदेन के प्रति लोग ज़्यादा जागरुक नहीं है। आशा की जाना चाहिए कि कम होते एटीएम के विकल्प के रूप में मर्चेंट पाइंट्स लोगों की परेशानियां को दूर करेगा।