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इस बार गुलामी का ‘बजट’ नहीं बल्कि भारतीय परम्परा वाला ‘बही-खाता’ हुआ पेश!

Friday - July 5, 2019 2:17 pm , Category : WTN HINDI
मोदी सरकार ने बदली एक और परम्परा!
मोदी सरकार ने बदली एक और परम्परा!

जानिए बजट की जगह मोदी सरकार ने क्यों पेश किया बही-खाता?
 
JULY 05 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कठोर निर्णय लेने और परिवर्तन करने के लिए पहचाने जाते हैं। अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसे कई फ़ैसले लिये जो काफ़ी कठोर थे, तो कई फ़ैसले परिवर्तन लाने वाले थे। उदाहरण के तौर पर नोटबंदी को एक कठोर फैसला, और नीति आयोग के गठन को एक बड़ा परिवर्तन कहा जा सकता है। परिवर्तन की इसी कड़ी में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने आईं तो दो बड़े परिवर्तन इस बार देखने को मिले।
 
सबसे पहला परिवर्तन तो पूरी दुनिया ने यह देखा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का बजट एक महिला पेश करने जा रही है। जीहां यह भारतीय संसदीय इतिहास में पहली बार हुआ कि बजट को एक महिला वित्त मंत्री पेश कर रहीं थीं। वहीं दूसरा परिवर्तन तब देखने मिला, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने संसद आईं तो उनके हाथों में बजट के दस्तावेज़ परम्परागत ब्रीफकेस में ना होकर, लाल रंग के मखमली कपड़े में बंधे हुए थे।

जैसा कि आप जानते हैं कि सालों से भारतीय संसदीय परम्परा रही है कि जब भी वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करने आते हैं तो बजट के दस्तावेज़ एक ब्रीफकेस में रखकर लाए जाते हैं। लेकिन इस बार जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट पेश करने आईं तो उनके हाथों में बजट के दस्तावेज़ परम्परागत ब्रीफकेस में ना होकर लाल रंग के मखमली कपड़े में थे। दरअसल, बजट दस्तावेज़ों को ब्रीफकेस में लाने की परम्परा अंग्रेजों के समय से चली आ रही है, लेकिन मोदी सरकार ने सालों पुरानी इस परम्परा को ख़त्म कर दिया।

दरअसल, मोदी सरकार का कहना है कि वे इस बार बजट नहीं पेश कर रहें बल्कि देश की अर्थव्यवस्था का बही-खाता पेश कर रहे हैं। आर्थिक हिसाब किताब के दस्तावेज़ों को लाल रंग के कपड़े में रखने की परम्परा भारत में प्राचीन समय से रही है। आज भी कई व्यापारियों के बही-खाते लाल रंग के कपड़े में लपेट कर रखे जाते हैं। मोदी सरकार ने इसी प्राचीन परम्परा को अपनाया, और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट के दस्तावेज़ ब्रीफकेस में ना लाकर लाल रंग के कपड़े में लपेटकर लाईं। मोदी सरकार ने इस तरह से देश में बजट की जगह पर बही-खाता पेश करने की एक नई परम्परा की शुरुआत कर दी है।
 
इस बारे में मुख्य आर्थिक सलाहकार कृष्णमूर्ति वी. सुब्रमण्यम का कहना है कि बही-खाता की परम्परा भारत की प्राचीन परम्परा है। इस परम्परा को अपनाने से गुलामी और पश्चिम के विचारों वाली ब्रीफकेस बजट वाली मानसिकता से भारत को आज़ादी मिली है। सुब्रमण्यम ने साफ़ कहा कि इस बार यह बजट नहीं, बल्कि बही-खाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट शब्द फ्रैंच भाषा के बुजेट शब्द से बना है, जिसका मतलब होता है लैदर बैग। यानी कि साफ़ जाहिर है कि इस बार से बजट की जगह पर मोदी सरकार ने देश के सामने बही-खाता पेश किया है।
 
दरअसल, देश के सालभर के आर्थिक हिसाब किताब के विवरण को बजट कहने की परम्परा की शुरुआत साल 1733 में तब शुरू हुई थी जब ब्रिटिश के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल साल भर का आर्थिक लेखा जोखा पेश करने आए थे। उस समय उनके हाथों में चमड़े का एक थैला था, और इसी थैले में बजट से जुड़े दस्तावेज़ रखे हुए थे। चुंकि चमड़े के थैले को फ्रेंच भाषा में बुजेट कहा जाता था, इसी कारण कहा जाने लगा कि सरकार ने बजट पेश किया। उसी दिन के बाद से सरकार द्वारा साल भर के आर्थिक हिसाब किताब के पेश किये जाने को बजट कहा जाने लगा।
 
भारत में अंग्रेजों ने भी ब्रिटिश परम्परा को अपनाया, और आज़ादी के समय तक बजट पेश करने के लिए चमड़े के थैले में ही बजट के दस्तावेज लाने की परम्परा कायम रही। आज़ादी के बाद भी चमड़े के थैले में बजट पेश करने की परम्परा को कांग्रेस सरकार ने कायम रखा। देश के पहले वित्त मंत्री आर.के. शानमुखम चेट्टी ने जब पहली बार बजट पेश किया तो वे भी बजट के दस्तावेज चमड़े के थैले में लेकर संसद पहुंचे थे। चमड़े के थैले में बजट दस्तावेज़ लाने की यह परम्परा भारत में सालों तक चलती रही।
 
साल 1958 में देश के पहले प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने चमड़े के थैले में बजट दस्तावेज़ लाने की परम्परा को बदला और वे काले रंग के ब्रीफकेस में बजट के दस्तावेज लेकर पहुंचे। साल 1991 तक काले ब्रीफकेस में ही बजट पेश करन की परम्परा देश में बनी रही। लेकिन 1991 में तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने काले रंग की जगह पर लाल रंग के ब्रीफकेस में बजट पेश किया। इसके बाद सालों तक ब्रीफकेस में ही बजट के दस्तावेज़ वित्त मंत्री लाते रहे, लेकिन ब्रीफकेस का रंग बदलता रहा। 1 फरवरी 2019 को जब पीयूष गोयल ने मोदी सरकार का अंतरिम बजट पेश किया था तो वे बजट के दस्तावेज लाल रंग के ब्रीफकेस में ही लेकर आए थे।
 
लेकिन मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट में मोदी सरकार ने पुरानी सारी परम्पराओं को तोड़ते हुए लाल रंग के ब्रीफकेस को अलविदा कहते हुए बजट के दस्तावेज लाल रंग के कपड़े में पेश किये। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी भारतीय परम्पराओं को मानने वाले हैं। इस बार बजट के दस्तावेज लाल रंग के कपड़े में लाकर, और बजट की जगह पर देश का बही-खाता पेश करके मोदी सरकार ने देश की एक प्राचीन परम्परा को अपनाया है। वैसे बजट पेश करना कहा जाए, या फ़िर बही-खाता पेश करना बात एक ही है। लेकिन बही-खाता पेश करना एक शुद्ध भारतीय परम्परा है, जिसे अपनाकर मोदी सरकार ने सालों पुरानी अंग्रेजों के समय से चली आ रही गुलामी की परम्परा को बदल दिया है।