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​अब ‘इन’ परिस्थितियों में भी भरना होगा इनकम टैक्स रिटर्न!

Monday - July 8, 2019 10:00 am , Category : WTN HINDI
बजट में इनकम टैक्स रिटर्न बढ़ाने ‘नये’ प्रस्ताव
बजट में इनकम टैक्स रिटर्न बढ़ाने ‘नये’ प्रस्ताव

टैक्स छल रोकने और टैक्स आधार बढ़ाने मोदी सरकार ने बजट मे किये कुछ ठोस उपाय

JULY 08 (WTN) – प्रचण्ड बहुमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले पूर्ण बजट पर सभी की निगाहें टिकी हुई थीं कि बजट में क्या-क्या सौगातें मोदी सरकार आम जनता को देती है। देश की पहली महिला वित्त मंत्री के रूप में निर्मला सीतारमण के बजट पर सभी की अलग-अलग राय है। लेकिन अपने पहले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर से सम्बन्धित जो कुछ नये नियम प्रस्तावित किये हैं, उसके बारे में आपका जानना ज़रूरी है।

दरअसल, इनकम टैक्स रिटर्न भरने के लिए इस बार के बजट से कुछ नये नियम प्रस्तावित हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आम बजट 2019-20 में मोदी सरकार ने टैक्स छल रोकने और टैक्स आधार बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रस्ताव लाएं हैं। बजट के साथ प्रस्तुत वित्त विधेयक (दो)-2019 में आयकर अधिनियम की धारा-139 में कुछ संशोधन के प्रस्ताव हैं किये गये हैं। इसके तहत कुछ मदों पर किसी भी व्यक्ति के द्वारा एक निश्चित राशि से ज़्यादा का लेनदेन करने पर उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य होगा फ़िर भले ही उसका सालाना आय 5 लाख रूपये के कम हो क्यों ना हो।
 
जैसे कि यदि किसी व्यक्ति ने विदेश यात्रा पर 2 लाख रुपये से ज़्यादा ख़र्च किये हैं तो उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य होगा, भले ही उसकी सालाना आय 5 लाख रूपये से कम हो। वहीं यदि किसी का साल भर का बिजली का बिल एक लाख रुपये से ज़्यादा है या फ़िर कोई व्यक्ति एक साल में किसी बैकिंग कम्पनी या फ़िर बैंक में एक या एक से अधिक चालू खाते में कुल एक करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा कराता है, तो इन सभी परिस्थितियों में भी सम्बन्धित व्यक्ति की सालाना आय भले ही 5 लाख रूपये वार्षिक से कम हो, उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना अनिवार्य होगा।
 
यानि कि इस बार के बजट में प्रस्तावित है कि इन तीनों ही परिस्थितियों में यदि सम्बन्धित व्यक्ति की सालाना टैक्स योग्य आय 5 लाख रुपये से भले ही कम हो तो भी उसे इनकम टैक्स रिटर्न भरना ही होगा। वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इनकम टैक्स अधिनियम की धारा-54 के अंतर्गत दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर टैक्स छूट का दावा करने वाले व्यक्तियों को भी अब इनकम टैक्स विवरण देना अनिवार्य होगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल पूंजीगत लाभ को मकान और बांड जैसी परिसम्पत्तियों में निवेश करने पर भी इनकम टैक्स में छूट मिल जाती है, और अभी तक इसके लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की ज़रूरत नहीं पड़ती थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि बजट में प्रस्तावित सभी संशोधन अगले साल एक अप्रैल से प्रभावी होंगे, और आकलन वर्ष 2020-21 और उसके बाद के वर्षों के लिए लागू होगा।

वहीं आपको पता होना चाहिए कि इस बार के बजट में देश में नक़द लेनदेन को सीमित करने और चेक और ऑनलाइन टांजैक्शन को प्रोत्साहित करने के लिए आयकर अधिनियम में एक नयी धारा-194एन जोड़ने का प्रस्ताव है। इस नये प्रस्ताव के तहत, यदि किसी व्यक्ति ने बैंक, सहकारी बैंक या फ़िर डाकघर के खातों से सालभर में एक करोड़ रुपए से अधिक की नक़दी निकासी की है, तो उस निकासी पर दो प्रतिशत की दर से स्त्रोत पर टैक्स कटौती यानि टीडीसी लगेगा।
 
पर आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह प्रावधान सरकार, बैंकिंग कम्पनियों, बैंकिंग काम में लगी सहकारी समितियों, डाकघर, बैंकिंग प्रतिनिधियों और व्हाइट लेबल एटीएम परिचालन करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन सभी को व्यवसाय के अंतर्गत भारी मात्रा में नक़द धन का इस्तेमाल करना होता है।

तो देखा आपने कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों से इनकम टैक्स रिटर्न भराने और नक़द लेनदेन को हतोत्साहित करने के लिए मोदी सरकार ने कुछ प्रस्ताव इस बार के बजट में पेश में किये हैं। इन प्रस्तावों के जरिये मोदी सरकार का दावा है कि टैक्स छल रूकेगा, और इससे टैक्स आधार बढ़ाने में मदद मिलेगी। अब देखना होगा कि मोदी सरकार के इन बजटीय प्रस्तावों से कितना फ़ायदा होता है, और सरकार के राजस्व में कितनी वृद्धि होती है।