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​रेलवे की ‘इस’ योजना से यात्रियों को अब आसानी से उपलब्ध होंगी सीटें!

Thursday - July 11, 2019 12:51 pm , Category : WTN HINDI
ट्रेनों में पूरे देश में बढ़ जाएंगी 4 लाख से ज़्यादा सीटें
ट्रेनों में पूरे देश में बढ़ जाएंगी 4 लाख से ज़्यादा सीटें

ट्रेनों से जनरेटर डिब्बा अब होगा अलग, बढ़ेंगे डिब्बे तो बढ़ेंगी सीटें!
 
JULY 11 (WTN) – भारतीय रेल और भीड़ एक दूसरे के पर्याय हैं। भारतीय ट्रेनों में दिनों-दिन भीड़ बढ़ती ही जा रही है, जिसके कारण यात्रियों को ट्रेन में रिज़र्व सीट मिलना दिनों-दिन मुश्किल होता जा रहा है। लम्बी-लम्बी वेटिंग लिस्ट के कारण कई बार यात्रियों को अपनी यात्रा कैंसिल करना पड़ती है। वैसे समय-समय पर रेलवे दावा करता रहता है कि यात्रियों की वेटिंग लिस्ट कम करने के लिए वह पूरे प्रयास कर रहा है, लेकिन सीमित ट्रेनों और उसमें सीमित सीटों के कारण यात्रियों को ट्रेन में रिज़र्व सीटें मिलना कठिन होता जा रहा है।
 
इस सबके बीच भारतीय रेलवे का दावा है कि आने वाले समय में ट्रेन का रिज़र्व टिकिट बड़ी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेलवे एक ऐसा उपाय करने जा रही है, जिससे अक्टूबर से ट्रेनों में आरक्षित यात्रा के लिये पूरे देश में रोज़ाना 4 लाख से अधिक सीटें बढ़ जाएंगी। ट्रेनों में सीटों को बढ़ाने के उद्देश्य से रेलवे अब ऐसी टेक्नोलॉजी अपनाने जा रहा है, जिससे ट्रेन के डिब्बों में रोशनी, पंखों और एसी के लिए बिजली को लेकर अलग से पावर कार (जनरेटर डिब्बा) लगाने की ज़रूरत नहीं होगी। रेलवे का कहना है कि बिजली की आपूर्ति के लिए अब रेल इंजन से ही काम लिया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) डिब्बों वाली प्रत्येक रेलगाड़ी में एक से दो जनरेटर बोगी लगी रहती हैं। इन्हीं डीज़ल जनरेटर बोगियों से सभी डिब्बों को बिजली की सप्लाई की जाती है। इसे ‘एण्ड ऑन जनरेशन’ (ईओजी) टेक्नोलॉजी के तौर पर जाना जाता है। लेकिन अब भारतीय रेलवे ने दुनिया भर में प्रचलित ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने का फ़ैसला लिया है। इस नई टेक्नोलॉजी में रेलगाड़ी के ऊपर से जाने वाली बिजली तारों से ही डिब्बों के लिए भी बिजली की आपूर्ति की जाती है, जिन बिजली के तारों से रेलवे का इंजन पावर लेता है।

रेलवे के मुताबिक़, अक्टूबर 2019 से भारतीय रेल के क़रीब 5,000 डिब्बे एचओजी टेक्नोलॉजी से परिचालित होने लगेंगे। ऐसा होने से ट्रेनों से जनरेटर बोगियां धीरे-धीरे हटाई जाएंगी, जिससे ट्रेन में अतिरिक्त डिब्बे लगाए जा सकेंगे। रेलवे का दावा है कि हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने से हर साल रेलवे के ईंधन पर ख़र्च होने वाले 6,000 करोड़ रूपये की बचत होगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेन के एक नॉन एसी डिब्बे को बिजली आपूर्ति करने के लिए प्रति घण्टा 120 यूनिट बिजली की ज़रुरत होती है। इस बिजली की आपूर्ति के लिए प्रति घण्टा 40 लीटर डीज़ल की खपत होती है। वहीं ट्रेन के एक एसी डिब्बे के लिए प्रति घण्टा 65 से 70 लीटर तक डीज़ल लग जाता है। यानी कि 18 से 24 डिब्बों वाली एक ट्रेन में इस तरह एक दिन में सैकड़ों लीटर डीजल सिर्फ़ बिजली की आपूर्ति के लिए ही ख़र्च हो जाता है।
 
रेलवे का कहना है कि नई टेक्नोलॉजी अपनाने से ईंधन की बचत के साथ-साथ वायु और ध्वनि प्रदूषण नहीं होगा, क्योंकि नई टेक्नोलॉजी से धीरे-धीरे ट्रेनों से जनरेटर डिब्बा हटा दिया जाएगा जिससे रोजाना हज़ारों लीटर डीज़ल की रोजाना बचत होगी। वहीं डीज़ल की ख़पत नहीं होने से कार्बन उत्सर्जन में 700 टन वार्षिक की कमी आएगी।
 
रेलवे का दावा है कि ट्रेनों में एचओजी टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने से ट्रेनों से एक जनरेटर डिब्बा कम हो जाएगा। ऐसा करने से ट्रेन में एक अतिरिक्त डिब्बा लगाया जा सकेगा, जिससे हर दिन क़रीब 4 लाख बर्थों का अलॉटमेंट यात्रियों को हो सकेगा। ऐसा करने से ना केवल यात्रियों की वेटिंग लिस्ट क्लीयर होगा, बल्कि रेलवे की आय में भी वृद्धि होगी।