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तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में भारत के सामने ‘यह' समस्याएं बन सकती हैं बाधा!

Saturday - July 13, 2019 12:48 pm , Category : WTN HINDI
2025 तक भारत होगा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था – रिपोर्ट
2025 तक भारत होगा दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था – रिपोर्ट

यदि समस्याओं पर पाया ‘नियंत्रण’ तो भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था

JULY 13 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल भारत दुनिया की 6वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मोदी सरकार की नीतियों के कारण भारत साल 2019-20 में ब्रिटेन को पीछे छोड़कर दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। इस सम्बन्ध में आईएचएस मार्किट ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में भारत की आर्थिक प्रगति की तारीफ़ करते हुए कहा गया है कि साल 2025 तक जापान को पीछे छोड़कर भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। लेकिन यह लक्ष्य इतना आसान नहीं है, क्योंकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत के सामने कई समस्याएं हैं।आख़िर क्या-क्या समस्याएं विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में भारत के सामने आ सकती हैं, आइये इसी का विश्लेषण करते हैं।
 
आईएचएस मार्किट का अनुमान है कि साल 2019 में भारत की अर्थव्यवस्था ब्रिटेन को पीछे छोड़ देगी। यदि भारत ऐसा करने में सफल रहता है तो भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। वहीं इस रिपोर्ट में कहा गया है कि साल 2015 तक भारत की जीडीपी 5,900 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगी, जो कि सरकार द्वारा रखे गये लक्ष्य से काफ़ी ज़्यादा है।
 
यदि ऐसा होता है, और भारत की अर्थव्यवस्था 5,900 अरब डॉलर से ज़्यादा होती है तो भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हो जाएगा। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि साल 2025 तक भारतीय उपभोक्ता बाज़ार का आकार 3,600 अरब डॉलर का होगा, जो कि साल 2019 में फ़िलहाल 1,900 अरब डॉलर का है।

इधर मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में वित्त मंत्रालय ने अपनी ताजा वार्षिक आर्थिक समीक्षा में कहा है कि साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन (5 अरब डॉलर) करने का लक्ष्य है। वित्त मंत्रालय ने इसी के साथ आर्थिक समीक्षा में भारत को दुनिया के उच्च मध्य आय वर्ग के देशों में शामिल करने का भी लक्ष्य रखा है।

आईएचएस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत की रैंकिंग तेजी से विश्व की बड़ी अर्थव्यवस्था की सूची में आगे बढ़ रही है। इतना ही नहीं भारत की वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में हिस्सेदारी भी बढ़ रही है, जो दर्शाता है कि भारत अब दुनिया की एक बड़ी आर्थिक महाशक्ति बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का कंज़्यूमर मार्केट भी तेजी से बढ़ रहा है। भारत के कंज़्यूमर मार्केट में तेजी से भारत की एशिया प्रशांत क्षेत्र में इकोनॉमिक ग्रोथ इंजन के रूप में भूमिका भी बढ़ रही है। ऐसा होने से एशियाई क्षेत्र को ट्रेड और निवेश के प्रवाह को बढ़ाने में भारत से काफ़ी मदद मिलगी।

लेकिन रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को अपने इन लक्ष्यों को हासिल कर पाना आसान नहीं होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए भारत को अपने नए इकोनॉमिक रोडमैप में विभिन्न निवेशों, सेविंग्स और एक्सपोर्ट पर ज़ोर देना होगा, जिससे अगले पांच सालों में आर्थिक वृद्धि को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। कहने को तो तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए यह लक्ष्य आसान हैं, लेकिन इन लक्ष्यों को पाने में कोई भी बाधा ना आए इसलिए भारत को अपने यहां पर बढ़ती हुई जनसंख्या, भ्रष्टाचार और लालफीताशाही पर लगाम लगानी होगी। यदि भारत ऐसा करने में  सफल होता है तो निश्चित ही साल 2025 तक भारत दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगा।
 
वहीं भारत के आर्थिक विकास में कुछ परेशानियां हैं, जिन्हें जल्द से जल्द भारत को दूर करना होगा जिससे भारत अपने आर्थिक विकास के लक्ष्य को बिना किसी बाधा के तय समय में हासिल कर सके। भारत की जीडीपी वृद्धि में सरकार का रोजकोषीय घाटा एक बड़ी समस्या रहता है। आमतौर पर सरकारों द्वारा चलाई जाने वाले जनकल्याणकारी योजनाओं के कारण राजकोषीय घाटा बढ़ता है। हालांकि, समय-समय पर सरकारें दावा करती रहती हैं कि वे राजकोषीय घाटे को एक सीमा के भीतर रखेंगी लेकिन सरकारों के यह वादे हमेशा से ही असफल साबित होते आएं हैं, क्योंकि उन्हें जनकल्याणकारी योजनाओं पर पैसा ख़र्च करना पड़ता है।

वहीं यदि देश के आर्थिक विकास को गति देना है तो धीमी विकास दर, सरकारी राजस्व में कम वृद्धि और ख़र्च में अनुमान से ज़्यादा वृद्धि भी चिंता के कारण हैं। देश में व्यापार सुलभ माहौल बनाने के लिए अभी भी देश में काफ़ी काम किये जाने की ज़रूरत है। अब जबकि भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार इस समय पूर्ण बहुमत में हैं, तो ऐसे में मोदी सरकार को जल्द से जल्द नीतिगत सुधारों की तरफ़ अविलम्ब ध्यान देना होगा ताकि देश में विदेश निवेश को सुरक्षित और सुलभ वातावरण मिल सके। सरकार की पूरी कोशिश होना चाहिए कि देश में ज़्यादा से ज़्यादा विदेशी निवेश आए। यदि मोदी सरकार ने इन समस्याओं को दूर करने में सफल हो गई तो रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत साल 2025 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आसानी से बन सकता है।