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मोदी सरकार की ‘इस’ योजना से महंगा पेट्रोल ख़रीदने से मिलेगी राहत!

Wednesday - July 17, 2019 3:41 pm , Category : WTN HINDI
वाहनों में अब होगा एथेनॉल का प्रयोग
वाहनों में अब होगा एथेनॉल का प्रयोग

देश में जल्द खुल सकते हैं एथेनॉल के पम्प, पेट्रोल से सस्ता पड़ेगा ईंधन

JULY 17 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि भारत अपनी ज़रूरत का क़रीब 90 प्रतिशत पेट्रोल-डीज़ल आयात करता है। खाड़ी देशों की राजनीतिक स्थिति और अमेरिकी डॉलर के मुक़ाबले भारतीय रूपये की क़ीमत के आधार पर हर दिन भारत में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतें तय होती हैं। स्वाभाविक है कि अन्य परिस्थितियों पर निर्भर रहने के कारण भारत में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में कमी और वृद्धि होती रहती है। कई बार पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में इतनी वृद्धि हो जाती है जिससे जनता में गुस्सा बढ़ जाता है। इसी कारण से अब मोदी सरकार देश में पेट्रोल-डीज़ल का विकल्प जनता के सामने ला रही है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2030 तक सरकार की योजना है कि दोपहिया और तिपहिया वाहनों को पेट्रोल-डीज़ल की बजाय बैट्री से चलाया जाए। इसी बीच सरकार अब एथेनॉल से चलने वाले वाहनों को भी बढ़ावा देने जा रही है। इस बार में केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि जल्द ही देश में एथेनॉल की बिक्री के लिए पम्प लगाए जा सकते हैं।
 
दरअसल, बाइक बनने वाली कम्पनी TVS ने देश की पहली एथेनॉल से चलने वाली बाइक को मार्केट में उतार दिया है। टीवीएस ने अपाचे आरटीआर 200 एफआई ई100 (TVS Apache RTR 200 Fi E100) को हाल ही में लॉन्च किया है, जो कि एथेनॉल से चलने वाली बाइक है। टीवीएस ने एथेनॉल से चलने वाली बाइक मार्केट में उतार तो दी है, लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में एथेनॉल की बिक्री के लिए एक भी पम्प इस समय मौजूद नहीं है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि एथेनॉल के पम्प कब से भारत में खुलने शुरू होंगे।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेट्रोल की जगह पर एथेनॉल के इस्तेमाल से वायू प्रदूषण से मुक्ति मिलती है। दिनों दिनों प्रदूषित होते राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली को वायु प्रदूषण से मुक्त बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने दो साल का लक्ष्य रखा है। यदि सरकार को इस लक्ष्य को हासिल करना है तो इसके लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रयोग और वाहनों में एथेनॉल का इस्तेमाल होना बहुत ज़रूरी है। एक योजना के तहत केन्द्र सरकार वाहनों में पेट्रोल के स्थान पर एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करेगी।

इस बारे में केन्द्रीय मंत्री गडकरी का कहना है कि एथेनॉल की सुचारू आपूर्ति के लिए वो तेल एवं गैस मंत्रालय को पत्र लिखकर एथेनॉल पम्पों की स्थापना के लिए कहेंगे। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एथेनॉल पम्पों की स्थापना शुरू में गन्ना उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से हो सकती है।

आप सोच रहे होंगे कि एथेनॉल का प्रयोग वाहनों में पेट्रोल की जगह पर कैसे हो सकता है तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एथेनॉल एक इको फ्रेंडली ईंधन है, जिसका निर्माण चीनी मिलों में गन्ने के रस से किया जाता है। जानकारी के मुताबिक़ एथेनॉल नॉन-टॉक्सिक और बायोडिग्रेडेबल होता है। इतना ही नहीं पेट्रोल की तुलना में इसे आसानी से स्टोर किया जा सकता है, और पेट्रोल की तुलना में इसका ट्रांसपोर्टेशन भी काफ़ी आसान है।

एथेनॉल एक ऑक्सीजनयुक्त ईंधन है, जिसमें 35 प्रतिशत ऑक्सीजन होती है। ऑटोमोबाइल इंजीनियर्स के मुताबिक़, एथेनॉल के इस्तेमाल से नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आती है। यही वो ख़ास कारण है जिसके कारण सरकार पेट्रोल की जगह पर एथेनॉल के इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है। इधर सरकार ने पेट्रोल में भी 10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण की मंज़ूरी दे दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय एक लीटर एथेनॉल की क़ीमत 52.43 रुपये है जो कि पेट्रोल की तुलना में क़रीब 20 रुपये सस्ता है। यदि देश में एथेनॉल से वाहन चलने लगेंगे तो देश की जनता का काफ़ी पैसा महंगा पेट्रोल ख़रीदने में बचेगा।

वैसे एथेनॉल का वाहनों में इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है। एथेनॉल का वाहनों में सबसे पहले इस्तेमाल आज से 40 साल पहले 1979 में ब्राजील में हुआ था। साल 1979 से ही ब्राजील की ऑटोमोबाइल कम्पनियां 10 प्रतिशत एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का निर्माण कर रही हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्राजील में सबसे ज़्यादा एथेनॉल का निर्माण किया जाता है। भारत की बात की जाए तो भारत में पिछले साल एथेनॉल का बाज़ार क़रीब 11 हजार करोड़ रुपये का था, जिसके इस साल क़रीब 20 हज़ार करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।

वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि केन्द्र सरकार ने पिछले साल ही गन्ने के रस या बी-श्रेणी के शीरा से एथेनॉल बनाने की अनुमति देने के निर्णय को अधिसूचित कर दिया है। इस बारे में गन्ना नियंत्रण आदेश 1966 को संशोधित किया गया है, और इसे केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा अधिसूचित किया गया है। इस निर्णय से अधिशेष वर्षों (जब गन्ने का उत्पादन अधिक होगा) में चीनी मिलों को सीधे गन्ने के रस से एथेनॉल का निर्माण करने में मदद मिलेगी। अब देखना होगा कि भारत में एथेनॉल से चलने वाले वाहनों का निर्माण, बिक्री और परिचालन कब से शुरू होता है और जनता को महंगे ईंधन से राहत मिलती है।