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यदि की ‘यह ग़लतियां’ तो ख़ाली हो जाएगा बैंक अकाउंट!

Saturday - August 3, 2019 10:36 am , Category : WTN HINDI
इंटरनेट का उपयोग करते समय रहें ‘सावधान’!
इंटरनेट का उपयोग करते समय रहें ‘सावधान’!

आपकी ‘सावधानी’ में ही है आपकी ‘सुरक्षा’!
 
AUG 03 (WTN) – इंटरनेट के आधुनिक युग में भारतीय लोग अब धीरे-धीरे कैशलेस सिस्टम को अपना रहे हैं। यानी कि वस्तुओं और सेवाओं की ख़रीदी का पैमेंट अब कैश की बजाय डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, यूपीआई या फ़िर नेट बैंकिंग के जरिये किया जा रहा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका उपयोग करते समय आपकी कुछ ग़लतियों से आपका बैंक अकाउंट ख़ाली हो सकता है? दरअसल, इंटरनेट फ्रॉड करने वालों की नज़र आपकी ग़लतियों पर रहती है। जैसे ही आपने कोई ग़लती की, उधर आपका बैंक अकाउंट ख़ाली।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट फ्रॉड करने वाले इंटरनेट चोरी के लिए ‘फिशिंग’ का उपयोग करते हैं। फिशिंग का सामान्य सा मतलब है कि इंटरनेट पर चोरी के लिए किसी को अपने जाल में फंसाना। फिशिंग के जरिये इंटरनेट के माध्यम से फ्रॉड करने वाले किसी व्यक्ति की बैंकिंग सम्बन्धित गोपनीय जानकारी हासिल कर लेते हैं, जैसे बैंक का अकाउंट नम्बर, क्रेडिट-डेबिट कार्ड की पूरी जानकारी, नेट बैंकिंग पासवर्ड और व्यक्तिगत पहचान की पूरी जानकारी आदि।

किसी भी व्यक्ति की गोपनीय जानकारियों को चुराने के बाद हैकर्स इसका इस्तेमाल टॉरगेट किये गये व्यक्ति के बैंक खाते से पैसा निकालने में कर सकता है। वहीं पीड़ित व्यक्ति के क्रेडिट कार्ड का उपयोग बिलों के भुगतान के लिए भी कर सकता है। दरअसल, कैशलेस सिस्टम को अपनाते समय यदि आपने सावाधानी नहीं बरती तो आपकी ग़लतियों से आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। आइये आपको बताते हैं कि आप किस तरह से इंटरनेट फ्रॉड करने वालों से बच सकते हैं।
 
फिशिंग करने वाले नेट बैंकिंग यूज़र्स को एक ऐसा ई-मेल भेजते हैं जिस पर ज़्यादातर यूज़र्स विश्वास कर लेते हैं। फिशिंग करने वाले ई-मेल पर एक ‘हाइपरलिंक’ देते हैं और उस पर क्लिक करने के लिए यूज़र्स को कहते हैं। जैसे ही यूज़र्स इस हाइपरलिंक पर क्लिक करते हैं, एक नक़ली वेबसाइट ओपन हो जाती है जो कि बिल्कुल असली इंटरनेट बैंकिंग साइट की तरह ही दिखती है।

इस तरह के फ्रॉड ई-मेल में यूज़र्स को तरह-तरह के ‘लालच’ दिये जाते हैं, जैसे कि कोई लॉटरी या ईनाम खुल गया है। वहीं कभी-कभी ई-मेल में यूज़र्स को ‘डराया’ जाता है कि उनकी किसी ग़लती के कारण बैंक ने उन पर कोई पेनाल्टी लगाई है। यदि यूज़र्स इस तरह के फ्रॉड ई-मेल के चक्कर में पड़ गये तो वे यूज़र्स से उनकी गोपनीय जानकारियां मांगना शुरू कर देते हैं। यदि यूज़र्स ने अपनी गोपनीय जानकारी इस तरह के ई-मेल पर दीं और जैसे ही सबमिट बटन पर क्लिक किया, यूज़र के सामने एरर पेज आता है। इस एरर पेज का मतलब है कि यूज़र फिशिंग हमेल की चपेट में आ गया है।

हमारी आपको सलाह है कि ऐसे किसी भी लिंक पर कभी भी क्लिक ना करें जो कि किसी अज्ञात ई-मेल के जरिये आया है। कभी भी एक पॉप-अप विंडो के रूप में आने वाले किसी भी पेज पर कोई भी जानकारी न दें। कभी भी किसी को भी अपने बैंकिंग सम्बन्धित पासवर्ड ना दें।

जब भी नेट बैंकिंग का प्रयोग करें तो सही यूआरएल टाइप करने के बाद ही साइट पर लॉगऑन करें। केवल अधिकृत लॉगइन पेज पर ही अपना यूज़र आईडी और पासवर्ड का प्रयोग करें। याद रखें कि लॉगइन पेज का असली URL 'https:// के साथ ही शुरू होता है। यदि यह 'http://' से शुरू होता है तो इस पर लॉगइन ना करें। 'https:// पर 'S'  का मतलब है कि यह पेज 'Secure' है और इस पर एन्क्रिप्शन का इस्तेमाल किया गया है। याद रखें कि ब्राउज़र और वेरीसाइन प्रमाण पत्र के दाहिनी ओर सबसे नीचे स्थित लॉक चिह्न को खोजें, जो दर्शाता है कि आप सुरक्षित हैं।

याद रखिये कि आपकी हर नेट गतिविधि पर इंटरनेट फ्रॉड करने वालों की नज़र है। यदि आपने सावधानी नहीं बरती तो आप इंटरनेट फ्रॉड का शिकार हो सकते हैं। तो हमारी आपको सलाह है कि इंटरनेट पर हमेशा सावधान से ही काम करें, क्योंकि आपकी एक ग़लती से आपका बैंक अकाउंट ख़ाली हो सकता है। यानी कि आपकी सावधानी में ही आपकी सुरक्षा है।