BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

अब सिर्फ़ एक नम्बर से होगा पेमेंट!

Tuesday - August 6, 2019 11:22 am , Category : WTN HINDI
क्रेडिट-डेबिट कार्ड अब रहेंगे सुरक्षित
क्रेडिट-डेबिट कार्ड अब रहेंगे सुरक्षित

डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जगह पर अब सिर्फ़ टोकन नम्बर से होगा पेमेंट!

AUG 06 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि इंटरनेट युग में मनी ट्रांजैक्शन और शॉपिंग के लिए नेट बैकिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड का उपयोग किया जाता है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि यदि लापरवाही की तो क्रेडिट और डेबिट कार्ड के इस्तेमाल में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। देखा गया है कि इसी कारण से कई लोग किसी डिवाइस या ई-कॉमर्स वेबसाइटों पर अपने कार्ड के डेटा को स्टोर करने से डरते हैं।

लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अब डेबिट और क्रेडिट कार्ड से ट्रांजैक्शन और भी ज़्यादा सुरक्षित होने जा रहा है। दरअसल, अब आपको किसी पेमेंट के लिए अपना कार्ड नम्बर नहीं बताना होगा। किसी भी तरह के ट्रांजैक्शन से पहले हर बार एक नया नम्बर जारी किया जाएगा। इस नई व्यवस्था को शुरू करने के लिए भारत के केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक ने नये नियम जारी किये हैं।
 
आरबीआई के मुताबिक़ नए नियमों के तहत किसी भी लेनदेन के लिए डेबिट या क्रेडिट कार्ड की डिटेल्स देने की ज़रूरत नहीं होगी। अब डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट के लिए आपका बैंक एक टोकन नम्बर जारी करेगा, और इसी टोकन नम्बर के जरिये ट्रांजैक्शन हो जाएगा। आरबीआई के अनुसार नये सिस्टम में डेबिट और क्रेडिट कार्ड डिटेल को एक विशेष कोड यानी कि टोकन में बदल दिया जाएगा। अब जब आप किसी भी तरह के पेमेंट को किसी वेबसाइट या ऐप के जरिये करेंगे तो आपको कार्ड डिटेल की जगह पर सिर्फ़ टोकन नम्बर ही देना होगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल टोकन नम्बर की सुविधा रजिस्टर्ड मोबाइल नम्बर पर सिर्फ़ मोबाइल और टैबलेट पर ही मिलेगी। यदि यह व्यवस्था सुचारू रूप से और सुरक्षित तरीक़े से काम करती है तो फीडबैक के बाद टोकन नम्बर को दूसरे डिवाइस पर भी भेजा जाएगा।
 
टोकन सिस्टम का उपयोग करने के लिए यूज़र को टोकनाइजेशन के लिए कार्ड प्रदाता कम्पनियों से इसके लिए अनुरोध करना होगा। कम्पनी से रिक्वेस्ट करने के बाद यूज़र के कार्ड की डिटेल्स, टोकन रिक्वेस्ट करने वाली कम्पनी की डिटेल्स और यूज़र की डिवाइस (मोबाइल/टैबलेट) के आइडेंटिफिकेशन से टोकन जेनरेट होगा। एक बार टोकन जेनरेट होने के बाद उसे केवल उसी कम्पनी के साथ ही शेयर किया जा सकेगा, जिसके लिए इसे जनरेट किया गया है।
 
वैसे कार्ड के उपयोग करने के लिए टोकन सर्विस अनिवार्य नहीं है बल्कि यह टोकन सेवा ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करेगी। ग्राहक अपनी मर्ज़ी से खुद को कॉन्टैक्टलेस, क्यूआर कोड या इन-ऐप परचेज जैसी किसी भी सर्विस के लिए रजिस्टर और डी-रजिस्टर करा सकता है। टोकन सिस्टम से ट्रांजैक्शन के माध्यम से होने वाले लेनदेन के लिए ग्राहक हर ट्रांजैक्शन की लिमिट के साथ-साथ डेली ट्रांजैक्शन लिमिट भी तय कर सकते हैं। इस सुविधा में कार्ड प्रदाता कम्पनी को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्राहक आईडेंटिफाइड डिवाइस (मोबाइल/टैबलेट) खोने के दशा में जल्द से जल्द इसकी शिकायत कर सके और उसके अनाधिकृत दुरूपयोग को रोक सके।

आरबीआई का दावा है कि टोकन नम्बर के प्रयोग से किसी वेबसाइट या ऐप पर कार्ड डिटेल सेव होने का ख़तरा भी समाप्त हो जाएगा। इस नये सिस्टम से पीओएस और क्यूआर कोड के जरिए होने वाले पेमेंट में भी टोकन नम्बर का इस्तेमाल हो सकेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि हर पेमेंट के लिए अलग-अलग टोकन जारी होगा और इसके लिए यूज़र्स को किसी भी तरह का चार्ज नहीं देना होगा।
 
इस नये टोकन सिस्टम के बारे में आरबीआई का दावा है कि इस नये सिस्टम के लागू होने से यूज़र्स के डेबिट या क्रेडिट कार्ड का असली नम्बर किसी को भी पता नहीं चल सकेगा। दावा किया जा रहा है कि यूज़र्स के कार्ड का नम्बर इतना सुरक्षित रहेगा कि इसके बारे में बैंक के कर्मचारी को भी जानकारी नहीं होगी। लेकिन यदि कार्ड से पेमेंट के समय किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है तो इस हालत में ट्रांजैक्शन के लिए कार्ड पेमेंट कम्पनियां ही ज़िम्मेदार होंगी।