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अब इस्तेमाल हुए खाने के तेल से चलेंगे वाहन!

Monday - August 12, 2019 12:23 pm , Category : WTN HINDI
खाने के लिए इस्तेमाल किये गये तेल से बनेगा बायोडीज़ल!
खाने के लिए इस्तेमाल किये गये तेल से बनेगा बायोडीज़ल!

खाने के इस्तेमाल किये गये तेल से बड़ी मात्रा में बायोडीज़ल बनाने की योजना

AUG 12 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि खाने के तेल का इस्तेमाल करने के बाद उसे आमतौर में घरों में फेंक दिया जाता है तो वहीं होटल्स,रेस्टारेंट्स और कैंटीन्स में इस्तेमाल किये गये तेल का कई बार उपयोग किया जाता है। लेकिन यदि हम आपसे कहें कि खाने के इस्तेमाल तेल से अब गाड़ियां चलाई जाएंगी तो यह पढ़कर आपको आश्चर्य हुआ होगा। क्या है यह पूरा मामला? इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।

दरअसल, जैसा कि आप जानते हैं कि मोदी सरकार पर्यावरण संरक्षण के लिए गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण को कम से कम करने का प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में मोदी सरकार साल 2030 तक ज़्यादा से ज़्यादा इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल के लिए नीति बना रही है। वहीं मोदी सरकार देश में बायोडीज़ल के उपयोग को बढ़ावा देने की लिए भी प्रयास कर रही है।

आपने शायद कहीं पढ़ा होगा या फ़िर सुना होगा कि गन्ने से बायोडीज़ल बनाया जाता है, लेकिन अब इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल से भी बायोडीज़ल बनाने की दिशा में मोदी सरकार आगे बढ़ रही है। जानकारी के मुताबिक़, इस्तेमाल किये गये खाने के तेल से बायोडीज़ल के प्लांट देश के 100 शहरों में लगाएं जाएंगे। मोदी सरकार की प्लानिंग है कि आने वाले समय में बायोडीज़ल के इस्तेमाल से भी गाड़ियां चलाई जाएं।

वैज्ञानिकों के मुताबिक़, बायोडीज़ल के प्रयोग से प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी। वहीं बायोडीज़ल के इस्तेमाल से गाड़ियों को भी काफ़ी फ़ायदे होते हैं। ऑटो एक्सपर्ट के अनुसार बायोडीज़ल से गाड़ियां चलाने से गाड़ियों के इंजन की सर्विस बढ़ जाती है, और इंजन ज़्यादा समय तक चलते हैं। वहीं बायोडीज़ल का इस्तेमाल बीएस 6 वाहनों में आसानी से किया जा सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस्तेमाल हो चुके खाने के तेल से बायोडीज़ल बनाने के लिए मोदी सरकार ने नई योजना को शुरू किया है। इसके लिए सरकार ने रीपर्पज यूज़्ड कुकिंग ऑयल (RUCO) स्टीकर, और यूज़़्ड कुकिंग ऑयल (UCO) के लिए मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है। कहा जा रहा है कि इसके जरिये यह नज़र रखी जाएगी कि इस्तेमाल हो चुका तेल दोबारा इस्तेमाल न किया जाए। इसके लिए बाकायदा होटल्स, रेस्टोरेंट्स और कैंटीन्स में स्टीकर लगाए जाएंगे। RUCO स्टीकर लगाकर होटल्स, रेस्टोरेंट्स और कैंटीन्स को यह बताना होगा कि वह बायोडीज़ल के लिए UCO की आपूर्ति करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुकिंग ऑयल के अलावा बायोडीजल कई अन्य रूपों में मौजूद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल क़रीब 2,700 करोड़ लीटर खाने का तेल इस्तेमाल होता है। होटल्स, रेस्टोरेंट्स और कैंटीन्स से क़रीब 140 करोड़ लीटर इस्तेमाल किये गये खाने के तेल को जमा किया जा सकता है। इस 140 करोड़ लीटर तेल से क़रीब 110 करोड़ लीटर बायोडीजल तैयार हो सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एक बार इस्तेमाल होने का बाद खाने का तेल स्वास्थ्य के लिए ख़राब होता है। इस्तेमाल हो चुके तेल को दोबारा इस्तेमाल करने से हाइपरटेंशन, ऐथिरोस्कलेरोसिस, अल्जाइमर और लिवर से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं। दरअसल, सरकार इस्तेमाल किये गये खाने के तेल को बायोडीज़ल बनाने के लिए इस्तेमाल कर लोगों की सेहत का ही ध्यान रख रही है। ऐसा इसलिए, क्योंकि जब तेल कम्पनियां होटल्स, रेस्टोरेंट्स और कैंटीन्स में इस्तेमाल किये गये तेल को बायोडीज़ल बनाने के लिए लेगी, तो इससे इस्तेमाल किया गया तेल फ़िर से इस्तेमाल नहीं होगा और लोगों की सेहत पर बुरा असर नहीं पड़ेगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत अपनी तेल ज़रूरतों का क़रीब 90 प्रतिशत तेल आयात करता है। विदेश से तेल मंगाने में भारत को अमेरिकी डॉलर के रूप में भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा को खर्च करना पड़ता है। ऐसे में मोदी सरकार की योजना है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग करके, और वाहनों में बायोडीज़ल का इस्तेमाल करके विदेश से आयात होने वाले तेल पर निर्भरता कम की जाए। इसी कड़ी में मोदी सरकार बायोडीज़ल के निर्माण को लेकर तेल कम्पनियों को हर सम्भव मदद का भरोसा दे रही है।

जानकारी के मुताबिक़, आने वाले समय में तेल कम्पनियां बायोडीज़ल के निर्माण के लिए प्राइवेट कम्पनियों से समझौता करेंगी। यह प्रायवेट कम्पनियां, तेल कम्पनियों की सहायता से बायोडीज़ल बनाने के लिए प्लांट लगाएंगी। शुरुआत में तेल कम्पनियां बायोडीजल 51 रुपये प्रति लीटर लेंगी और दूसरे साल इसकी क़ीमत बढ़कर 52.7 रुपये लीटर होगी। वहीं तीसरे साल एक लीटर बायोडीज़ल की क़ीमत बढ़कर 54.5 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। कहा जा सकता है कि इससे आने वाले समय में डीज़ल सस्ता होगा। डीज़ल सस्ता होगा तो ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम होगी, और ट्रांसपोर्टेशन की लागत कम होने से रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुएं सस्ती होंगी, जिससे महंगाई पर नियंत्रण होगा।