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कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भी मात खाएगा पाकिस्तान

Thursday - August 22, 2019 1:32 pm , Category : WTN HINDI
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भी पाकिस्तान की ‘बेइज़्ज़ती’ होना तय
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भी पाकिस्तान की ‘बेइज़्ज़ती’ होना तय

मोदी सरकार की ‘आक्रामक कूटनीति’ के सामने फ़िर ‘फेल’ होगा पाकिस्तान!

AUG 22 (WTN) – जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटाकर और राज्य का विभाजन कर मोदी सरकार ने एक ऐतिहासिक फ़ैसला लिया है। भारत सरकार के इस आंतरिक फ़ैसले से बौखलाया पाकिस्तान इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उठाकर भारत को घेरने और इस मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने की असफ़ल कोशिश में लगा हुआ है। चीन और तर्की के अलावा किसी अन्य देश ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में हुए एक औपचारिक बैठक में भी चीन के अलावा किसी अन्य देश ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ नहीं दिया।

अमेरिका से लेकर फ्रांस और बिट्रेन से लेकर रूस जैसे देशों ने कश्मीर मुद्दे पर अपना रूख़ साफ़ करते हुए कहा है कि कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाने का फ़ैसला भारत सरकार का आंतरिक मामला है। कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर हर कहीं मात खाने के बाद पाकिस्तान अब इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) में ले जाने की तैयारी में है। कश्मीर मुद्दे पर हताश और बौखलाया पाकिस्तान, अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में कश्मीर का मुद्दा मानवाधिकारों के कथित हनन को आधार बनाते हुए उठाएगा।
 
यह तय है कि मोदी सरकार की कूटनीति के आगे पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में भी मात खाएगा, लेकिन लगता है कि पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बेइज्ज़ती कराने में ज़्यादा दिलचस्पी रखता है। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय एक सलाहकारी संस्था है, और किसी भी केस में इसकी सलाह मानना बाध्यकारी नहीं है। हालांकि, पाकिस्तान इस भ्रम में है कि कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में ले जाकर वो इसका अंतर्राष्ट्रीयकरण करने में सफ़ल हो जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत के राज्य जम्मू-कश्मीर पर फ़ैसले लेने का सम्प्रभूता के साथ पूरा संवैधानिक अधिकार भारत सरकार को है। पाकिस्तान, कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में ले ज़रूर जाना चाहता है, लेकिन आईसीजे के प्रावधानों के मुताबिक़ कश्मीर मामले में भारत को कठघरे में खड़ा कर पाना पाकिस्तान के लिए लगभग नामुमकिन साबित होने जा रहा है।

आपको बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना साल 1945 में हुई थी और यह संयुक्त राष्ट्र संघ की एक प्रमुख न्यायिक इकाई है। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में केवल देशों को ही अपने मामले ले जाने की अनुमति होती है; कोई व्यक्ति, निजी संगठन और ग़ैर-सरकारी संस्था इस कोर्ट में किसी भी मुद्दे के लिए अपील नहीं कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में वर्तमान में 11 न्यायाधीश हैं, जिनका कार्यकाल 9 साल का होता है। इन न्यायाधीशों की नियुक्ति संयुक्त राष्ट्र महासभा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद मिलकर करते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ देशों ने आईसीजे के न्यायिक क्षेत्र को अनिवार्य तौर पर स्वीकार किया है। भारत सरकार ने साल 1974 में और पाकिस्तान ने साल 2017 में डेक्लेयरेशन फाइल कर कोर्ट के अधिकार क्षेत्र को मान्यता दी थी। बता दें कि आईसीजे के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार करने वाले देश एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कोर्ट में किसी विवाद को ले जा सकते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के न्यायिक क्षेत्र के अंतर्गत दो तरह के काम तय किए गए हैं। पहला यह कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय दुनिया के देशों के द्वारा ले जाए गए क़ानूनी विवादों पर अपना फैसला सुनाता है, दूसरा यह संयुक्त राष्ट्र की किसी एजेंसी या संगठन की अपील पर किसी क़ानूनी विवाद पर परामर्श जारी कर सकता है।

तो जैसा कि पाकिस्तान कह रहा है कि वो कश्मीर मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में ले जाएगा, लेकिन सवाल उठता है कि आख़िर कश्मीर मुद्दा अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है भी कि नहीं? जैसा कि आप जानते हैं कि भारत पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाने का फ़ैसला उसका आंतरिक मामला है। वैसे यदि आईसीजे के न्यायिक क्षेत्र को लेकर कोई विवाद होता है, तो फिर इसका फ़ैसला आईसीजी के अनुच्छेद-36 के प्रावधानों के तहत ख़ुद आईसीजे ही करता है।

सबसे पहले तो कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में उठाना ही पाकिस्तान के लिए काफ़ी कठिन है। ऐसा इसलिए, क्योंकि एकतरफ़ा आवेदन के मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के नियमों के अंतर्गत पाकिस्तान को यह बताना होगा कि आईसीजे के अधिकार क्षेत्र के किस क़ानून के तहत कश्मीर मुद्दे को वो कोर्ट में उठा रहा है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान को अपने दावे से सम्बन्धित तमाम तथ्य और आधार पेश करने होंगे कि वो किस आधार पर कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मामले को अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में चुनौती देने जा रहा है, जबकि भारत सरकार का यह दावा है कि यह पूरी तरह से भारत सरकार का आंतरिक मामला है।
 
वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में दो या अधिक देशों के बीच विवाद पर सुनवाई तब तक शुरू नहीं होती है, जब तक कि दूसरा देश या अन्य देश भी किसी मामले को आईसीजे के न्यायिक क्षेत्र में ले जाने को लेकर अपनी सहमति नहीं दे देते हैं। इसी कारण से ऐसे मामलों में शुरुआती चरण में न्यायिक क्षेत्र को तय करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय सभी पक्षों से क़ानून और तथ्यों के सभी सवालों पर बहस करने और सबूत पेश करने का अनुरोध करता है।

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के कामकाज की प्रक्रिया के जानकारों के मुताबिक़, कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का पक्ष काफ़ी कमज़ोर है। सबसे पहले तो पाकिस्तान को यह साबित करना होगा कि आईसीजे के अधिकार क्षेत्र के किस क़ानून के तहत वो कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के मुद्दे को कोर्ट में उठा रहा है। वहीं दूसरी तरफ़ भारत किसी भी परिस्थिति में कश्मीर मुद्दे को आईसीजे में उठाने की अनुमति नहीं देगा।

हाल ही में कुलभूषण जाधव मामले में अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में मात खा चुका पाकिस्तान लगता है कि एक बार फ़िर से आईसीजे में भारत से हारने की तैयारी कर रहा है। पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे के अंतर्राष्ट्रीयकरण की कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन मोदी सरकार की आक्रामक कूटनीति के सामने उसे हर बार मात ही खानी पड़ेगी।