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अब फण्ड ट्रांसफर के पहले लेना पड़ सकती है इजाज़त!

Friday - August 23, 2019 11:01 am , Category : WTN HINDI
बैंक से फण्ड ट्रांसफर के नियमों में हो सकता है ‘बदलाव’
बैंक से फण्ड ट्रांसफर के नियमों में हो सकता है ‘बदलाव’

अवैध ट्रांजैक्शन और काले धन पर लगाम कसने की तैयारी

AUG 23 (WTN) – एक समय था जब बैंक सम्बन्धित कामों के लिए उपभोक्ताओं को बैंक में लम्बी-लम्बी लाइनों में लगना पड़ता था। पैसा निकालने से लेकर पैसा जमा करने जैसे कामों के लिए बैंकों में उपभोक्ताओं का क़ीमती समय ख़राब होता था। लेकिन देश में इंटरनेट क्रांति आने के बाद पूरी परिस्थिति बदल गई है। सस्ते डेटा और स्मार्टफोन के कारण भारत में करोडों लोग स्मार्टफोन पर इंटनरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इंटरनेट क्रांति के कारण बैंक सम्बन्धित लगभग सारे काम ऑनलाइन हो रहे हैं।

एक समय था जब किसी को पैसा भेजने के लिए या तो मनीऑर्डर करना होता था, या फ़िर चेक भेजना होता था। इस सबके कारण पैसा काफ़ी समय के बाद सम्बन्धित व्यक्ति के पास पहुंचता था। लेकिन इंटरनेट क्रांति आने के बाद से नेट बैंकिंग के कारण चंद सेकेण्ड में पैसा एक अकाउंट से दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो जाता है। लेकिन अब इस तरह ‘एकतरफ़ा’ फण्ड ट्रांसफर और फण्ड ट्रांसफर के ज़रिये ‘अवैध’ मनी ट्रांसफर पर लगाम लगाने की तैयारी मोदी सरकार ने कर ली है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ऑनलाइन फण्ड ट्रांसफर के लिए नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रांसफर (NEFT), रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) और इमीडिएट पेमेण्ट सर्विस (IMPS) का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि फिलहाल कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति के बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर ऊपर लिखे किसी भी एक सिस्टम से करता है, तो पहले उस सम्बन्धित व्यक्ति को रजिस्टर करना पड़ता है। रजिस्ट्रेशन की इस प्रक्रिया में जिसे पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है इसमें ना तो उसकी सहमति लेना पड़ती है, और ना ही पैसा ट्रांसफर करते समय उसकी सहमति लेना पड़ती है।
 
लेकिन नेट बैंकिंग के ज़रिये हो रहे अवैध ट्रांजैक्शन को रोकने के लिए अब फण्ड ट्रांसफर करने से पहले जिस व्यक्ति के अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है उसकी मन्ज़ूरी लेना आवश्यक हो सकता है। यानी कि किसी व्यक्ति कि सहमति के बाद ही उसके अकाउंट में नेट बैंकिंग के जरिये पैसा ट्रांसफर हो सकेगा।

दरअसल, मोदी सरकार नेट बैंकिंग के ज़रिये अवैध ट्रांजैक्शन को रोकने के लिए इस योजना पर काम कर रही है। इसके लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बैंकों को एक प्रस्ताव दिया है, जिसके मुताबिक़ यदि किसी व्यक्ति के बैंक अकाउंट में पैसा ट्रांसफर किया जा रहा है, तो इसके लिए उसकी सहमति होना ज़रूरी है। वैसे मोदी सरकार का यह फ़ैसला सराहनीय है, लेकिन बैंकिंग इंडस्ट्री के जानकारों के मुताबिक़, इस नई प्रणाली के लागू होने से फण्ड ट्रांसफर में देरी होगी, वहीं इस नई प्रणाली को लागू करने के लिए बैंकों को अपने सॉफ्टवेयर में बदलाव भी करना पड़ेगा।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि फ़िलहाल ऑनलाइन पेमेण्ट के तीन मोड हैं। NEFT, RTGS और IMPS। इसमें से RTGS के ज़रिये 2 लाख रुपये से ज़्यादा का फण्ड ट्रांसफर किया जाता है। वहीं NEFT और IMPS का इस्तेमाल ज़्यादातर आम उपभोक्ता करते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि IMPS को फण्ड ट्रांसफर का इस समय सबसे बेहतर ज़रिया माना जाता है, क्योंकि इससे कम समय में ही फण्ड ट्रांसफर हो जाता है। वहीं NEFT के ज़रिये फण्ड ट्रांसफर में 30 मिनट से 2 घण्टे तक का समय लगता है।

जानकारों का कहना है कि यदि फण्ड ट्रांसफर के लिए सम्बन्धित बैंक खाताधारक की मन्ज़ूरी ली गई, तो इससे फण्ड ट्रांसफर का समय बढ़ जाएगा। ऑनलाइन पेमेण्ट करते समय खाताधारक की सहमति का सिस्टम जुड़ने से फण्ड ट्रांसफर में समय लगेगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि जिस खाताधारक को पैसा ट्रांसफर दिया जा रहा है, उसकी ऑनलाइन सहमति पर ही फण्ड ट्रांसफर की आगे की प्रक्रिया निर्भर करेगी। ऐसे में यदि सम्बन्धित व्यक्ति व्यस्त है तो फण्ड ट्रांसफर में देरी होना स्वाभाविक है।

लेकिन मोदी सरकार के इस फ़ैसले के काफ़ी फ़ायदे भी हैं। सबसे पहले तो इस नये सिस्टम का सबसे बड़ा फ़ायदा यह होगा कि इससे ग़लत खाते में पैसा ट्रांसफर नहीं हो पाएगा। वहीं इससे पैसों के अवैध ट्रांसजैक्शन का पता आसानी से लग सकेगा। इस सिस्टम के लागू होने के बाद किसी भी बैंक खाते में पैसा खाताधारक की सहमति के बिना जमा नहीं होगा। ऐसे में इनकम टैक्स या काले धन के मामले में सरकार के पास बैंक अकाउंट से जानकारी हासिल हो जाएगी कि कौन ने कब, कितना पैसा अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करना स्वीकार किया था।