BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

क्या आर्थिक मंदी में मोदी सरकार का 'सहारा' बनेगी आरबीआई से मिलने वाली सरप्लस रकम?

Tuesday - August 27, 2019 1:13 pm , Category : WTN HINDI
मोदी सरकार के लिए ‘मददगार’ साबित होगी आरबीआई से मिलने वाली सरप्लस रक़म
मोदी सरकार के लिए ‘मददगार’ साबित होगी आरबीआई से मिलने वाली सरप्लस रक़म

देश की अर्थव्यवस्था के लिए ‘संजीवनी’ साबित हो सकती है आरबीआई से मिलने वाली सरप्लस रक़म!

AUG 27 (WTN) – पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी ने 'दस्तक' दे दी है। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश अमेरिका समेत पूरी दुनिया के देश धीरे-धीरे आर्थिक मंदी की 'गिरफ़्त' में आते जा रहे हैं। आर्थिक मंदी के असर से भारत भी अछूता नहीं है। दुनिया की सातवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश भारत में भी मंदी का 'असर' दिखने लगा है। ऑटो सेक्टर से लेकर टेक्सटाइल सेक्टर तक हर कहीं मंदी के कारण कारोबार पर 'नकारात्मक' असर पड़ रहा है।

आर्थिक मंदी का सामना कर रही मोदी सरकार ने इससे निपटने के लिए उपाय करना शुरू भी कर दिये हैं। इसके बीच मोदी सरकार को भारत के केन्द्रीय बैंक, भारतीय रिज़र्व बैंक से एक बड़ी 'आर्थिक राहत' मिली है। पर बड़ा सवाल यह है कि क्या यह राहत वैश्विक मंदी से निपटने में मोदी सरकार की मदद कर पाएगी? लेकिन वहीं रिज़र्व बैंक से मिल रही इस राहत पर भारत में राजनीति भी तेज़ हो गई है। क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको विस्तार से बताते हैं।

भारतीय रिज़र्व बैंक ने भारत सरकार को 1.76 लाख करोड़ रुपए की सहायता देने का फ़ैसला किया है। दरअसल, रिज़र्व बैंक ने बिमल जालान कमेटी के सुझावों को मंज़ूरी दे दी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक के पूर्व गवर्नर बिमल जालान की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में भारतीय रिज़र्व बैंक के सरप्लस कैश रिज़र्व के ट्रांसफर का 'समर्थन' किया था। समिति ने सलाह दी थी कि सरप्लस कैश रिज़र्व का इस्तेमाल सरकार की 'मदद' के लिए किया जाना चाहिए। बिमल जालान कमेटी की सिफ़ारिश के बाद भारतीय रिज़र्व बैंक अपने कुल रिज़र्व कैश का 28 प्रतिशत केन्द्र सरकार की 'मदद' को देने के लिए राजी हो गया है।
 
भारतीय रिज़र्व बैंक बोर्ड ने भारत सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की मंज़री दे दी है। रिज़र्व बैंक ने सरप्लस ट्रांसफर को मंज़ूरी दे दी है, जिसकी कुल रक़म 1,23,414 करोड़ रुपये होगी। बता दें कि कॉन्टिजेंसी फंड, करेंसी तथा गोल्ड रवैल्यूएशन अकाउंट को मिलाकर भारतीय रिज़र्व बैंक के पास 9.2 लाख करोड़ रुपये का रिज़र्व है, जो कि रिज़र्व बैंक के टोटल बैलेंस शीट साइज़ का 25 प्रतिशत है। भारतीय रिज़र्व बैंक अपनी सरप्लस रक़म को चरणबद्ध तरीक़े से 3 से 5 साल में सरकार को ट्रांसफर करेगा।
 
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि रिज़र्व बैंक के सरप्लस रक़म से आख़िर सरकार को फ़ायदा क्या होगा? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस रक़म से सरकार को काफ़ी 'राहत' मिलने वाली है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबंदी के बाद से देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक नक़दी की तंगी से गुजर रहे हैं, जिसके कारण उनके पास पर्याप्त पूंजी नहीं है।

देश के सार्वजनिक क्षेत्र के क़रीब आधा दर्जन कमज़ोर बैंक, रिज़र्व बैंक के त्वरित सुधार कार्रवाई ढांचे के तहत लाए गए हैं। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि सार्वजनिक बैंकों को 70,000 करोड़ रुपये की पूंजी दी जाएगी, हालांकि कहा जा रहा है कि बैंकों को इससे भी ज़्यादा पूंजी की 'ज़रूरत' है। ऐसे में रिज़र्व बैंक से मिली सरप्लस रक़म का इस्तेमाल सरकार बैंकों को और पूंजी देने के लिए कर सकती है। ऐसा होने से आने वाले पांच सालों में बैंकों पर दबाव कम होगा।

प्रचण्ड बहुतमत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार ने आने वाले पांच सालों में बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक से मिलने वाली सरप्लस रक़म का एक बड़ा हिस्सा बुनियादी ढांचे के विकास के लिए मोदी सरकार खर्च कर सकती है।

कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के तहत किसानों, ग़रीबों और छोटे उद्यमियों के कल्याण के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती है, जिसका बोझ आख़िरकार बैंकों पर ही पड़ता है। बैंकों की शिकायत है कि कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्च करने के बाद भी सरकारी एजेंसियों से उन्हें कोई वित्तपोषण नहीं मिल पाता है। ऐसे में हो सकता है कि रिज़र्व बैंक से मिली सरप्लस रक़म का इस्तेमाल मोदी सरकार नेशनल हाउसिंग बैंक (एनएचबी), सिडबी और नाबार्ड जैसी एजेंसियों की पूंजी बढ़ाने में कर सकती है।

देखा गया है कि पिछले कई सालों से सरकार का उधारी या क़र्ज़ लेने का सिलसिला बढ़ता ही जा रहा है। वित्त वर्ष 2019-20 के लिए सरकार क़रीब 7 लाख करोड़ रुपये का क़र्ज़ लेने की योजना बना रही है। ऐसे में रिज़र्व बैंक से मिली सरप्लस रक़म का इस्तेमाल सरकार अपनी उधारी को कम करने में कर सकती है।

इधर, बिमल जालान कमेटी की सिफ़ारिशों के बाद रिज़र्व बैंक से मोदी सरकार को मिलने वाली 1.76 लाख करोड़ रुपये की सरप्लस रक़म पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाए हैं कि प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री ने जो आर्थिक संकट पैदा किया है, उसे वह खत्म नहीं कर पा रहे हैं। मोदी सरकार पर तंज कसते हुए राहुल गांधी ने कहा, “अब आरबीआई से खजाने की चोरी काम नहीं आएगी। यह किसी डिस्पेंसरी से बैंड-एड चुराकर गोली के जख़्म पर लगाना जैसा है, जो काम नहीं आएगी।”

कांग्रेस का आरोप है कि आरबीआई के आकस्मिक रिज़र्व का इस्तेमाल अत्यधिक वित्तीय आपात स्थितियों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के समय किया जाता है। लेकिन आरबीआई के आकस्मिक रिज़र्व का इस्तेमाल मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर अपनी गड़बड़ी को रोकने के लिए कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक की साख कम कर दी है।

विपक्ष के तमाम आरोपों और वैश्विक आर्थिक मंदी के बीच मोदी सरकार को रिज़र्व बैंक से चरणबद्ध तरीक़े से मिलने वाली सरप्लस रक़म बहुत बड़ी राहत साबित होगी। बैंकों की हालात सुधारने, बुनियादी ढांचे पर ख़र्च करने, कल्याणकारी योजनाओं के लिए रक़म जुटाने और अपने क़र्ज़ को चुकाने के लिए यह रक़म सरकार के काम आ सकती है। कहा जा सकता है कि वैश्विक आर्थिक मंदी का सामना कर रही मोदी सरकार के लिए रिज़र्व बैंक से मिलने वाली सरप्लस रक़म देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बड़ा सहारा साबित होगी।