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​उपभोक्ताओं की शिकायतों के बाद जागा एसबीआई, करेगा अपने कई नियमों में बदलाव!

Thursday - September 12, 2019 12:04 pm , Category : WTN HINDI
एक अक्टूबर से बदल रहे हैं एसबीआई के कुछ नियम
एक अक्टूबर से बदल रहे हैं एसबीआई के कुछ नियम

नियम तो बदले, लेकिन बैंककर्मियों के व्यवहार में भी सुधार लाए एसबीआई!

SEP 12 (WTN) – देश के सबसे बड़े बैंक यानी कि स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया (SBI) की कार्यप्रणाली से नाराज़ बैंक के उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार आती रहती हैं। एसबीआई के उपभोक्ताओं की शिकायत है कि एक तो एसबीआई कर्मियों का व्यवहार संतोषनजक नहीं रहता है, वहीं बैंक द्वारा इतने तरह के चार्ज लगाए जाते हैं जिससे उपभोक्ताओं को आर्थिक हानि होती है। मिनिमम बैलेंस के नाम पर उपभोक्ताओं पर चार्ज लगाने और उससे सैकड़ों करोड़ रुपये एसबीआई को हासिल होने का मामला राष्ट्रीय बहस का मुद्दा भी बन चुका है। समय-समय पर एसबीआई की कार्यप्रणाली का विरोध होता रहा है।

ऐसे में लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद, एसबीआई एक अक्टूबर से अपने उपभोक्ताओं के हित के लिए कुछ नियमों में बदलाव करने जा रहा है। एसबीआई का दावा है कि नियमों में बदलाव से बैंक के उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा। एसबीआई सबसे पहला बड़ा बदलाव मंथली एवरेज बैलेंस (MAB) को लेकर करने वाला है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एसबीआई के बैंक अकाउण्ट में मंथली एवरेज बैलेंस मेंटेन नहीं करने पर लगने वाले चार्ज में कटौती होने वाली है। जानकारी के मुताबिक़, यह कटौती लगभग 80 प्रतिशत तक हो सकती है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, एसबीआई उपभोक्ता को अभी अपने बैंक अकाउण्ट में मेट्रो सिटी की ब्रांच में 5,000 रुपये और शहरी इलाके की ब्रांच में 3,000 रुपये कम से कम रखना होते हैं। लेकिन एक अक्टूबर से लागू होने जा रहे एसबीआई के नये नियमों के अनुसार, दोनों ही मेट्रो सिटी और शहरी इलाके में स्थित ब्रांच में अकाउण्ट होने पर एवरेज मंथली बैलेंस 3,000 रुपये ही रह जाएगा। यानी कि मेट्रो सिटी की ब्रांच में अकाउण्ट वाले उपभोक्ताओं को एवरेज मंथली बैलेंस रखने में 2,000 रुपये की छूट दी गई है।

वहीं एसबीआई ने पूर्ण शहरी इलाके के एसबीआई अकाउण्ट होल्‍डर को मिनिमम बैलेंस नहीं रखने पर लगने वाली पेनाल्टी में राहत दी है। पूर्ण शहरी इलाकों में स्थित बैंक की ब्रांच में अकाउण्ट होने पर उपभोक्ता के अकाउंट का मिनिमम बैलेंस 3,000 रुपये से 75 प्रतिशत से ज़्यादा कम हुआ तो 15 रुपये और इस पर जीएसटी का जुर्माना उसे देना होगा। फ़िलहाल जुर्माने की राशि 80 रुपये के साथ जीएसटी है। वहीं 50 से 75 प्रतिशत तक कम बैलेंस रखने वालों को 12 रुपये और इस पर जीएसटी चुकाना होंगे, जो कि अभी 60 रुपये और जीएसटी है।

वहीं अब एक अक्टूबर से एसबीआई ब्रांच से NEFT/ RTGS करने पर पहले की तुलना में कम चार्ज लिया जाएगा। अब एक अक्टूबर से 10,000 रुपये तक की ब्रांच से NEFT पर 2 रुपये चार्ज लगेगा। वहीं  एक लाख से दो लाख रुपये तक की NEFT पर 12 रुपये, 2 लाख से ज़्यादा की NEFT पर 20 रुपये के अलावा जीएसटी देना होगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एसबीआई ने ऑनलाइन NEFT/ RTGS ट्रांजेक्‍शन को पहले ही फ्री कर दिया है।

एक अक्टूबर से एसबीआई के एटीएम नियम भी बदलने वाले हैं। अब एसबीआई बैंक के उपभोक्ता मेट्रो शहरों में स्थित एसबीआई एटीएम से अधिकतम 10 बार मुफ़्त डेबिट ट्रांजेक्शन कर सकेंगे, जबकि अभी यह लिमिट सिर्फ़ 6 ट्रांजेक्‍शन की है। वहीं मेट्रो शहरों के एसबीआई एटीएम के अलावा अन्य जगहों के एसबीआई एटीएम से अधिकतम 12 मुफ़्त ट्रांजेक्शन किये जा सकेंगे।

वहीं एसबीआई के नये बदलाव के चलते एक अक्टूबर से सेविंग बैंक अकाउण्ट होल्‍डर को पहले 10 चेक मुफ़्त में मिलेंगे। इसके बाद 10 चेक वाली चेकबुक के लिए 40 रुपये जीएसटी चार्ज के साथ चुकाने होंगे। वहीं 25 चेक वाली चेकबुक के लिए 75 रुपये और जीएसटी चार्ज चुकाना होगा।
 
कहा जा सकता है कि एक अक्टूबर से एसबीआई उपभोक्ताओं के हित में जो बदलाव कर रही है उससे उपभोक्ताओं को फ़ायदा होगा। लेकिन सबसे ज़रूरी है एसबीआई बैंककर्मियों का स्वभाव उपभोक्ताओं के प्रति विनम्र और सहयोगात्मक हो। समय-समय पर एसबीआई उपभोक्ताओं को बैंक में बैंककर्मियों के असहयोगात्मक रवैये के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा है, आशा की जानी चाहिए कि एसबीआई प्रबंधन अपने अधिकारियों और कर्मचारियों को उपभोक्ताओं के साथ विनम्रता के साथ पेश आने की ट्रेनिंग, सलाह और हिदायत देगा।