BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

जानिए इमरजेंसी के समय भारत कहां से करेगा देशवासियों को तेल की आपूर्ति?

Monday - September 16, 2019 2:26 pm , Category : WTN HINDI
भारत के पास है 5.38 मिलिटन मीट्रिक टन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व
भारत के पास है 5.38 मिलिटन मीट्रिक टन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व

कठिन परिस्थितियों के लिए भारत के पास है 10 दिनों का तेल रिज़र्व

SEP 16 (WTN) – जल्द ही देश में पेट्रोल-डीज़ल की क़ीमतों में 10 से 12 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी आरामको के दो तेल संयंत्रों पर हमले के बाद पूरी दुनिया को होने वाली तेल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। तेल संयंत्रों पर हमलों के बाद कच्चे तेल की क़ीमत में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं यदि समय रहते क्षतिग्रस्त तेल संयंत्रों में काम शुरू नहीं हुआ, तो आने वाले समय में कच्चे तेल के दाम में और भी ज़्यादा वृद्धि हो सकती है।

आरामको के तेल संयंत्रों में हमले के बाद कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि का असर भारत समेत अन्य देशों पर भी पड़ने वाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कच्चे तेल की सप्लाई में बाधा और कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि के बाद भारत सरकार के पास क्या उपाय है कि इमरजेंसी के समय किस तरह से तेल की आपूर्ति देश में सुचारू रूप से की जाए ? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कच्चे तेल की आपूर्ति में इस तरह की सम्भावित बाधाओं को ध्यान में रखते हुए ही भारत समेत कई देशों के पास SPR यानि कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (Strategic Petroleum Reserve) है। आइये आपको बताते हैं कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व होता क्या है?

सबसे पहले आपको बता दें कि सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी अरामको के दो संयंत्रों अबक्वाइक और खुराइस पर क़रीब 10 ड्रोन से हमले किए गए हैं। हमले का आरोप यमन के हूती विद्रोहियों पर है। आरामको के संयंत्रों पर हमले के बाद तेल कम्पनी का आधे से ज़्यादा तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अरामको तेल कम्पनी के धहरान मुख्यालय से 60 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अबक्वाइक संयंत्र कम्पनी के सबसे बड़े तेल प्रसंस्करण संयंत्र का गढ़ है। पहले भी आतंकवादी इसे निशाना बनाते रहे हैं। फरवरी 2006 में अल-कायदा के आत्मघाती विस्फोटकों ने इस तेल कम्पनी पर हमला करने की कोशिश की थी, लेकिन वे नाकामयाब साबित रहे थे।
 
आरामको के संयंत्रों पर हमले के बाद प्रति दिन क़रीब 57 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन तब तक बंद रहेगा, जब तक कि संयंत्र फ़िर से काम करने योग्य नहीं हो जाते हैं। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि हमले के बाद कम्पनी का क़रीब आधे से ज्यादा तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि वह तेल की आपातकालीन स्थिति में स्थिरता बनाए रखने के लिए स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (Strategic Petroleum Reserve - SPR) से तेल का इस्तेमाल करने के लिए तैयार हैं।

अमेरिका के तरह ही भारत के पास भी ऐसे स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व (SPR) में इमरजेंसी के लिए कच्चे तेल को सुरक्षित रखा जाता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा करने से कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा आने पर इमरजेंसी के दौरान इस रिज़र्व से तेल की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके और देश में तेल की किल्लत ना हो।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व बनाने का फ़ैसला भारत सरकार ने खाड़ी युद्ध के दौरान लिया था, जब देश को गम्भीर तेल संकट का सामना करना पड़ा था। खाड़ी संकट के समय भारत के पास सिर्फ़ 3 दिनों का तेल ही बचा था। भविष्य में इस तरह की परेशानियों का सामना ना करना पड़े, इसके लिए भारत सरकार ने देश में 3 स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व बनाए हैं।

भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम, कर्नाटक के मैंगलोर और पडूर में बनाए गए हैं। इन तीन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व की कुल क्षमता 5.38 मिलिटन मीट्रिक टन है। इन्हें बनाने में कुल 4,098 करोड़ रुपये ख़र्च हुए हैं। इन तीनों रिज़र्व की क्षमता इतनी है कि इमरजेंसी के दौरान ज़रूरत पड़ने पर इन रिज़र्व से पूरे देश को 10 दिनों तक तेल की सप्लाई की जा सकती है।

स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व काफ़ी सुरक्षित रूप से ज़मीन या पहाड़ काटकर काफ़ी गहराई में गुफाओं के रूप में बनाये जाते हैं। विशाखापट्टनम का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व 67 एकड़ ज़मीन पर 1,178.35 करोड़ रुपये में बना है। इस रिज़र्व की स्टोरेज क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है। वहीं मैंगलोर का रिज़र्व 104.73 एकड़ जमीन पर 1,227 करोड़ रुपये में बनाया गया है, जिसकी क्षमता 1.55 मिलियन मीट्रिक टन है। बात करें पडूर स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व की तो इसे 179.21 एकड़ ज़मीन पर 1,693 करोड़ रुपए से बनाया गया है। इसकी क्षमता 2.50 मिलियन मीट्रिक टन है।

इधर, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट ने पिछले साल जून में दो अतिरिक्त स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व बनाने को स्वीकृति दी थी। ये स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिज़र्व ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पडूर में बनाए जाएंगे। चांदीखोल रिज़र्व की क्षमता 4 मिलियन मीट्रिक टन है, जबकि कर्नाटक के पडूर में बन रहे नये रिज़र्व की क्षमता 2.5 मिलियन मीट्रिक टन है। दो अतिरिक्त स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व बनने के बाद देश की कुल स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व क्षमता 11.88 मिलियन मीट्रिक टन की हो जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी भी अंतर्राष्ट्रीय कारण से यदि कच्चे तेल का आयात प्रभावित होता है, तो स्वाभाविक है कि इससे कच्चे तेल की क़ीमतों में वृद्धि होगी। ऐसे में देश में कच्चे तेल की आपूर्ति सुलभ बनाने और तेल की क़ीमतों में होने वाली बेतहाशा वृद्धि को रोकने के लिए ही स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व बनाए गये हैं, जिनसे तेल की आपूर्ति सुचारू रूप से की जा सके।

भारत के पास इस समय तीन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व हैं, जिनकी कुल क्षमता 5.38 मिलियन मीटिक टन है। इन तीनों ही रिज़र्व से इमरजेंसी के समय देश में 10 दिनों तक तेल की सप्लाई हो सकती है। वहीं दो अतिरिक्ति स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व का काम पूरा होने के बाद देश के पास कुल 23 दिनों का तेल रिज़र्व में रहेगा। यानी कि कच्चे तेल के आयात में बाधा के समय इमरजेंसी के समय भारत 23 दिनों तक रिज़र्व में रखे तेल का इस्तेमाल कर सकता है।