BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

क्या अमेरिका-ईरान युद्ध का काउंटडाउन शुरू हो गया है?

Monday - September 16, 2019 4:31 pm , Category : WTN HINDI
एक बार फ़िर से अमेरिका और ईरान आमने-सामने
एक बार फ़िर से अमेरिका और ईरान आमने-सामने

सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमलों के बाद मण्डराया अमेरिका-ईरान युद्ध का ख़तरा

SEP 16 (WTN) – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के कारण पूरी दुनिया में इन दोनों देशों के बीच युद्ध का ख़तरा मंडराता रहता है। मौजूदा समय में कई ऐसे मौक़े आए, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने की नौबत आ गई थी, लेकिन दोनों ही देशों में से किसी ने भी युद्ध की पहल नहीं की। लेकिन सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी अरामको के तेल संयंत्रों पर हुए हमले के बाद ईरान-अमेरिका के बीच तनातनी एक बार फ़िर से बढ़ गई है।

सऊदी अरब में दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी आरामको के दो संयंत्रों में क़रीब 10 द्रोणों से हमलों के बाद अमेरिका हमले की इस कार्रवाई में ईरान का हाथ होने की आशंका जता रहा है। अमेरिकी खुफिया विभाग से मिली जानकारी का हवाला देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। तो क्या इस चेतावनी के बाद मान लिया जाए कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध होने जा रहा है?

सऊदी अरब में दो तेल संयंत्रों पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने एक ट्वीट में लिखा, “सऊदी अरब की तेल आपूर्ति पर हमला किया गया है। हमें हमले के दोषी की जानकारी है, लेकिन हम सऊदी से इसकी पुष्टि होने का इंतज़ार कर रहे हैं। हमारी सेना पूरी तरह से तैयार है।” वहीं अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल आपूर्ति कम्पनी पर हमले के लिए ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से ज़िम्मेदार ठहराया है।

आपकी जानकारी के लिए हम बता चुके हैं कि अमेरिका और ईरान के बीच काफ़ी पहले से तनाव चल रहा है। अमेरिका द्वारा ख़ुद को परमाणु समझौते से अलग करने और ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर पहले से ही दोनों देशों के बीच युद्ध की आशंकाएं रहती हैं। वैसे तो इस हमले के लिए यमन के हूती विद्रोहियों को ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है, लेकिन अमेरिका को आशंका है कि इसके पीछे ज़रूर ईरान का ही सहयोग रहा होगा।
 
अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि ईरान ने इस हमला को अंजाम दिया है, या फ़िर इस हमले में सहयोग किया है तो साफ़ ज़ाहिर है कि ईरान ने अमेरिका से बहुत बड़ी दुश्मनी मोल ले ली है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सऊदी अरब खाडी में अमेरिका का निकटतम सहयोगी है। यदि सच में ईरान का हाथ तेल संयंत्रों में हमलों में पाया जाता है, तो अमेरिका इसका जवाब ईरान को ज़रूर देगा, जिसका बहुत बड़ा परिणाम ईरान को भुगतना पड़ सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी साल जून के महीने में जब ईरान ने अमेरिकी सर्विलांस ड्रोन को मार गिराया था, तो उस समय भी डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी थी। हालांकि, बाद में ट्रम्प ने ईरान पर हमला करने की पूरी तैयारी होने के बाद यह कहकर हमला करने का फ़ैसला बदल दिया था कि इस अमेरिकी हमले में क़रीब 150 लोग मारे जाते।

जैसा कि हमने आपसे पहले कहा कि अमेरिकी प्रशासन फिलहाल ईरान के ख़िलाफ़ सबूत जुटाने में लगा हुआ है कि इस हमले में उसका हाथ है या नहीं? वैसे सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि संयंत्रों पर हमला ईरान या इराक की दिशा से हुआ है। जानकारी के मुताबिक़, सऊदी तेल संयंत्र की तरफ़ क़रीब 17 हथियार तैनात किए गए थे, जिसमें से 10 ही अपने लक्ष्य को भेद सके। अब हमले के बाद बरामद हुए हथियारों की फॉरेंसिक रिपोर्ट से यह पता चल जाएगा कि हमले में इस्तेमाल हथियारों को किसने बनाया और उन्हें किसने लॉन्च किया?

हालांकि, सऊदी अरब के दो तेल संयंत्रों पर हमले के लिए अमेरिका, ईरान पर आरोप लगा रहा है। लेकिन हमेशा की तरह ईरान ने इस बार भी हमले में अपना हाथ होने से इनकार किया है। इस बारे में ईरान के विदेश मंत्री का कहना है कि यह सबसे बड़ा झूठ है कि ईरान ने इस हमले को अंज़ाम दिया है। वहीं दूसरी तरफ़ इराक के प्रधानमंत्री अदेल अब्दुल महदी ने इस बात को ख़ारिज किया है कि तेल संयंत्रों पर हमले के लिए इराक की ज़मीन का इस्तेमाल किया गया है।
 
दरअसल, अमेरिकी द्वारा ईरान पर लगाए गये आर्थिक प्रतिबंधों के बाद से ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ा है। दुनिया के बड़े तेल ख़रीददार देश अब ईरान से तेल नहीं ख़रीद रहे हैं, जिसके कारण हर दिन ईरान को बड़ा आर्थिक नुकसान हो रहा है। आर्थिक प्रतिबंधों के बाद से ईरान, खाड़ी में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए परेशानी के साथ-साथ धीरे-धीरे ख़तरा बनता जा रहा है। वैसे अमेरिका और ईरान के बीच सुलह की कोशिशें विश्वस्तर पर जारी हैं। ख़ुद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने भी इसी महीने कहा था कि वे ईरान के राष्ट्रपति हसन रोहानी के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं।

वैसे अभी तक तेल संयंत्रों पर हमले का शक यमन के हूती विद्रोहियों पर है। इधर, जानकारों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन और उनके सहयोगी देशों को इस हमले को एक चेतावनी की तरह लेना चाहिए, क्योंकि यदि अगर कुछ हूती विद्रोही इतनी तबाही मचा सकते हैं, तो सैन्य संघर्ष की स्थिति में ईरान, अमेरिका और उसके खाड़ी के सहयोगी देशों के ख़िलाफ़ कुछ भी कर सकता है।

वैसे अमेरिका को लगता है कि तेल संयंत्रों पर हमला यदि हूती विद्रोहियों ने किया है, तो वे बिना ईरान की मदद से ही इतना बड़ा हमला नहीं कर सकते हैं। ईरान समय-समय पर अमेरिका को चेतावनी देता रहा है कि उसके पास अमेरिका से लड़ने की इच्छाशक्ति और ताक़त दोनों है। वैसे अब देखना होगा कि तेल संयंत्रों पर हमले के लिए ईरान को ज़िम्मेदार ठहराने के बाद अमेरिका उस पर हमला करता है कि नहीं।

वहीं यदि अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इतना तय है कि इस बार का खाड़ी युद्ध काफ़ी विनाशकारी होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि आर्थिक प्रतिबंध झेल रहे ईरान के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। ऐसे में युद्ध होने की दशा में ईरान, अमेरिका और उसके खाड़ी के सहयोगी देशों पर जमकर प्रहार करेगा और इस दशा में अमेरिका अपने और अपने सहयोगियों के बचाव में किसी भी हद तक जा सकता है।