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रेलवे के ‘मेगा प्रोजेक्ट’ से जल्द ख़त्म होगी ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट

Wednesday - September 18, 2019 2:39 pm , Category : WTN HINDI
मालगाड़ियों के लिए बन रहा है अलग रूट
मालगाड़ियों के लिए बन रहा है अलग रूट

रेलवे की महत्वाकांक्षी DFC परियोजना से बदल जाएगा रेलवे नेटवर्क

SEP 18 (WTN) – विश्व के दूसरे सबसे अधिक जनसंख्या वाले देश भारत में यातायात के लिए ट्रेन सबसे सुलभ, सस्ता और तेज़ गति वाला साधन है। विश्व के बड़े रेल नेटवर्कों में शामिल भारतीय रेलवे समय के साथ तकनीक का प्रयोग कर अपने सिस्टम को आधुनिकतम बना रहा है। भारत जैसे विशाल देश में सैकड़ों की तादात में यात्री गाड़ियां चलती हैं, लेकिन विशाल जनसंख्या वाले देश भारत में यात्री गाड़ियों में वेटिंग लिस्ट होने से यात्री परेशानी रहते हैं।

समय-समय पर यात्रियों की मांग रही है कि ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए। इसी को ध्यान में रखते हुए जिससे कि यात्रियों को ट्रेनों में सीटें उपलब्ध हो सकें, मोदी सरकार एक बहुत बड़े मेगा प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। यदि सब कुछ सही रहा तो आने वाले समय में यात्रियों को ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट के झंझट से मुक्ति मिलेगी। क्या है मोदी सरकार का मेगा प्रोजेक्ट, जिसके चलते यात्रियों की वेटिंग लिस्ट की परेशानी दूर होगी। आइये आपको विस्तार से बताते हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रेलवे अगले चार सालों में दिल्ली-मुम्बई और दिल्ली-हावड़ा रूट पर 'मांग के आधार पर' यात्री रेलगाड़ी चलाने की कोशिश में है। ऐसा होने से यात्रियों को इन रूट्स पर ट्रेन में कन्फर्म सीट मिल सकेंगी। रेलवे साल 2021 तक समर्पित माल गलियारे यानी कि DFC (Dedicated Freight Corridor) का निर्माण करने जा रहा है।
 
दरअसल, Dedicated Freight Corridor परियोजना के तहत व्यस्ततम दिल्ली-मुम्बई और दिल्ली-हावड़ा रूट पर अतिरिक्त रूट का निर्माण किया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने पर मौजूदा रेललाइनों से मालगड़ियां हट जाएंगी, जिससे उन पर अधिक यात्री रेलगाड़ियां चलाई जा सकेंगी।

रेलवे का दावा है कि दिल्ली-मुम्बई और दिल्ली-हावड़ा की मौजूदा रेललाइनों से मालगाड़ियां पूरी तरह से हट जाने के बाद रेलवे मांग के आधार पर यात्री गाड़ियां चला सकेगी। वहीं इन रूट्स पर रेलगाड़ियों की गति बढ़ाकर 160 किलोमीटर प्रति घण्टा करने को पहले ही मन्ज़ूरी मिल गई है। रेलवे का कहना है कि यह काम आने वाले चार सालों में पूरा हो जाएगा।
 
वहीं रेलवे कोशिश कर रहा है कि आने वाले चार सालों में इन रूट्स पर यात्री रेल गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियां भी मांग के आधार पर चलाई जा सके। यानी कि इन चार सालों में रेलवे इन रूट्स पर आवागमन की ज़रूरतें पूरी कर सकेगी, जिससे चार सालों के बाद इन रूट्स पर यात्री गाड़ियों में वेटिंग लिस्ट पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगी।

वहीं दिल्ली-मुम्बई और दिल्ली-हावड़ा रूट के अलावा, दिल्ली-चेन्नई, मुम्बई-हावड़ा और खड़गपुर-विजयवाड़ा समर्पित माल गलियारे पर भी काम चल रहा है। रेलवे के मुताबिक़, अगले एक साल के अन्दर इन रूट्स के लिए लोकेशन सर्वे का काम पूरा हो जाएगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि DFC (Dedicated Freight Corridor) क़रीब 6,000 किलोमीटर लम्बा होगा और उसे अगले 10 साल में पूरा करने का लक्ष्य  है। रेलवे का कहना है कि उसके पास इस कॉरीडोर को पूरा करने की क्षमता है। और इस कॉरीडोर के पूरा होने से इन रूट्स पर कई रेलगाड़ियां चलाई जा सकेंगी।

इतना ही नहीं, रेलवे का कहना है कि इस कॉरीडोर के बन जाने के बाद रेलवे की क्षमता बढ़ेगी जिसके बाद रेल संचालन में निजी संचालकों को भी शामिल किया जा सकेगा। वहीं उत्पादन इकायों का निगमितीकरण भी किया जा सकेगा, जिससे देश में 160 किलोमीटर प्रति किलोमीटर की गति से चलने वाले आधुनिक डिब्बे उपलब्ध हो सकें और साथ ही उनका निर्यात भी किया जा सके।
 
कहा जा सकता है कि रेलवे का यह मेगा प्रोजेक्ट देश में रेलवे नेटवर्क का कायापलट करके रख देगा। बिजी दिल्ली-मुम्बई, दिल्ली-हावड़ा, दिल्ली-चेन्नई, मुम्बई-हावड़ा और खड़गपुर-विजयवाड़ा रूट्स पर अतिरिक्त रेल लाइन के निर्माण से मालगाड़ियों को अलग कॉरीडोर मिलेगा, जिससे यात्री गाड़ियों के लिए मौजूदा पूरा ट्रैक उपलब्ध रहेगा। ऐसा होने से यात्री गाड़ियां तेज़ गति से चल सकेंगी और उनके समय की बचत होगी।