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खाने की बेहतर सर्विस के लिए रेलवे ने उठाए ‘बड़े’ और ‘कड़े’ क़दम

Thursday - September 19, 2019 10:54 am , Category : WTN HINDI
यात्रियों को अब ट्रेनों में मिलेगी खाने की बेहतर क्वालिटी
यात्रियों को अब ट्रेनों में मिलेगी खाने की बेहतर क्वालिटी

ट्रेन में पैकेड बंद खाने पर अब होगा क्यूआर कोड, मिलेगी खाने के पैकिंग की सही जानकारी

SEP 19 (WTN) – दुनिया के बड़े रेल नेटवर्क्स में शामिल भारतीय रेलवे वैसे तो यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए हमेशा तत्पर रहती है, लेकिन भारतीय ट्रेनों की टाइमिंग और ट्रेनों में मिलने वाले खाने की सर्विस से यात्रियों को हमेशा से ही शिकायतें रही हैं। बात करें यात्री गाड़ियों में मिलने वाले खाने की, तो देखा गया है कि आईआरसीटीसी से अनुबन्धित पैंट्री कार में मिलने वाले खाने की क्वालिटी और उसके दाम दोनों से ही यात्री संतुष्ट नहीं हैं।
 
पैंट्री कार और रेलवे स्टेशन पर अधिकृत वेण्डर से मिलने वाला खाना कई बार बासी होता है, या फ़िर गंदा रहता है। वहीं खाने के दाम भी आईआरसीटीसी द्वारा निर्धारित दर से ज़्यादा वसूले जाते हैं। हज़ारों की तादात में यात्री हर साल बासी, गंदे और महंगे खाने की शिकायतें रेलवे से करते रहते हैं। ऐसा नहीं है कि यात्रियों की शिकायतों पर रेलवे कोई कार्रवाई नहीं करती है, लेकिन कार्रवाई होने के बाद भी पैंट्री कार और रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले खाने की क्वालिटी में सुधार होते नहीं दिख रहा है।

ट्रेनों और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को खाने-पीने की बेहतरीन सुविधा देने के लिए रेल मंत्रालय अब एक नया क़दम उठाने जा रहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेनों में यात्रियों को दिये जाने वाले खाने के पैकेट पर अब उससे सम्बन्धित जानकारी बक़ायदा क्यूआर कोड (QR Code) के ज़रिये दी जाएगी। इसके लिए IRCTC नियम तैयार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक़, इस नये सिस्टम को चरणबद्ध तरीक़े से लागू किया जाएगा।

जीहां अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशन पर मिलने वाले पैकेट बंद खाने पर QR कोड जरूरी होगा। रेलवे का इस योजना के पीछे मक़सद है कि क्यूआर कोड को स्कैन कर यात्री जान सकेंगे कि पैकेट बंद खाने की पैकिंग कहां, कब और किस समय पर हुई है। इतना ही नहीं, क्यूआर कोड से यात्री यह भी जान सकेंगे कि जो पैकेट बंद खाना उन्होंने खरीदा है, उसका सही दाम क्या है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेन और रेलवे स्टेशन पर पैकेट बंद खाने पर छपे क्यूआर कोड को रीड करने के लिए स्मार्टफोन में क्यूआर कोड स्कैनर एप होना ज़रूरी है। इस एप की सहायता से बड़े ही आसानी से खाने के पैकेट पर प्रिंट क्यूआर कोड को स्कैन किया जा सकेगा, और यह पता किया जा सकेगा कि पैकेट बंद खाना कब और कहां बना है, और खाने बनने के बाद उसकी पैकिंग कितने किस समय पर हुई है।

वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ट्रेनों और रेलवे स्टेशन पर यात्रियों से खाने के ज़्यादा पैसे वसूले जाने की शिकायतों के बाद रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए No Bill, No Payment नीति को लागू किया है। इस नीति के तहत यदि ट्रेन और रेलवे स्टेशन पर अधिकृत वेण्डर खाने के सामान का बिल नहीं देता है, तो ग्राहक उसे खाने के सामान के पैसे देने से इनकार कर सकता है। इतना ही नहीं, ग्राहक इसकी शिकायत रेलवे के सम्बन्धित अधिकारी से भी कर सकता है।

इतना ही नहीं, खाने की क्वालिटी की लगातार शिकायतें मिलने के बाद रेलवे ने खाने की गुणवत्ता और उसको बनाने वाले रसोइयों पर नज़र रखने के लिए इण्डियन रेलवे कैटरिंग एण्ड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) की वेबसाइट पर अब किचन में बन रहे खाने को बनते देखने की सुविधा उपलब्ध करा दी है। खाने कैसे बन रहा है, इसकी जानकारी के लिए रेलवे ने बनते हुए खाने की लाइव स्ट्रीमिंग वेबसाइट शुरू की है।

तो हमारी आपको सलाह है कि रेलवे द्वारा यात्रियों को दी जा रही सुविधाओं का लाभ उन्हें ज़रूर उठाना चाहिए। कई बार देखा गया है कि यात्रियों को अपने अधिकारों की जानकारी ही नहीं होती है। जानकारी के अभाव में यात्री कई बार धोखे का शिकार हो जाते हैं, या फ़िर उन्हें संतोषजनक सर्विस नहीं मिल पाती है। एक जागरूक यात्री बनें और रेलवे द्वारा दी जा रही सुविधाओं का पूरा उपयोग करें, क्योंकि यह आपका अधिकार है।