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एक देश, एक नागरिक और एक कार्ड!

Monday - September 23, 2019 4:08 pm , Category : WTN HINDI
इस बार डिजिटल तरीक़े से होगी जनगणना
इस बार डिजिटल तरीक़े से होगी जनगणना

मोदी सरकार का देश के नागरिकों का एक बहुउद्देशीय पहचान पत्र बनाने का विचार
 
SEP 23 (WTN) – यदि हम आपसे कहें कि आने वाले समय में आपको कई तरह के अलग-अलग पहचान पत्र जैसे कि आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और पासपार्ट अलग-अलग रखने की ज़रूरत नहीं होगी और यह सभी पहचान पत्र एक बहुउद्देशीय पहचान पत्र में समाहित हो सकते हैं, तो यह पढ़कर आप सोच में पड़ गये होंगे कि आख़िर भविष्य में ऐसा क्या होने जा रहा है? दरअसल, मोदी सरकार देश में एक ऐतिहासिक योजना पर विचार कर रही है, यदि इस योजना को अमलीजामा पहनाया जाता है तो आधार कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खाते, ड्राइविंग लाइसेंस और वोटर कार्ड जैसी सभी पहचान पत्रों को एक बहुउद्देशीय पहचान पत्र में समाहित किया जा सकेगा। क्या है यह पूरी योजना? इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि 2021 में देश की जनगणना होना जा रही है। किसी भी देश की जनगणना उस देश के भविष्य के विकास की योजनाएं बनाने का एक बहुत बड़ा और मज़बूत आधार होती है। भारत में जनगणना की शुरूआत अंग्रेजों के समय साल 1865 में हुई थी, जिसके बाद 2021 में होने जा रही जनगणना भारत की 16वीं जनगणना होने जा रही है। इस बार की जनगणना की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इस बार की जनगणना काग़ज़ पर नहीं बल्कि डिजिटल तरह से होने जा रही है।
 
इस बार जनगणना के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसमें डिजिटल तरीक़े से आंकड़े उपलब्ध होंगे। देश के गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक़ जितनी बारीक़ी से इस बार जनगणना होगी, ऐसा पहली बार होने जा रहा है।  सरकार का दावा है कि बारीक़ी से हो रही जनगणना से देश की आर्थिक और सामाजिक हक़ीकत का सही तरह से पता चल सकेगा। जनगणना से प्राप्त इन्हीं आंकड़ों के आधार पर देश के भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।

दरअसल, मोदी सरकार अपने पहले कार्यकाल से ही डिजिटाइजेशन पर काफ़ी ज़ोर दे रही है। मोदी सरकार का कहना है कि सरकार 22 योजनाओं का रेखांकन जनगणना के आधार पर कर रही है, जिसमें आधार कार्ड  के इस्तेमाल का काफ़ी फ़ायदा हो रहा है। इस बार की जनगणना को डिजिटल तरीक़े से करने से आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउण्ट, ड्राइविंग लाइसेंस समेत समस्त पहचान पत्रों की जानकारी एक ही जगह पर आ जाएगी। हालांकि, सभी तरह के कार्डों की जगह एक कार्ड की योजना पर विचार किया जा रहा है और इसके लिए कोई क़ानून या अधिनियम अभी नहीं बनाया गया है।

डिजिटल जनगणना के आधार पर ही गृह मंत्री अमित शाह ने देश के सभी नागरिकों के लिए एक बहुउद्देश्यीय पहचान पत्र का विचार रखा है, जिसमें आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस और बैंक खाते जैसी सभी सुविधाएं जुड़ी हुई होंगी। सरकार का तर्क है कि जनगणना के डिजिटल होने से सभी कार्डों की जगह एक कार्ड की योजना को धरातल पर लाया जा सकेगा। अपनी इसी महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर लाने के लिए मोदी सरकार इस बार की जनगणना पर अभी तक हुई सभी जनगणनाओं में सबसे ज़्यादा ख़र्च करने जा रही है। जानकारी के मुताबिक़, इस बार जनगणना में क़रीब 12,000 करोड़ रूपये ख़र्च होने जा रहे हैं।

सरकार का दावा है कि डिजिटल जनगणना होने से जनगणना का डिजिटल डाटा उपलब्ध होगा, जिसका इस्तेमाल कई तरह के विश्लेषण के लिए किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि जनगणना के डिजिटलीकरण से देश के लोगों को कई फायदे होंगे। सरकार के मुताबिक़, इससे राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) समते अन्य मुद्दों को हल करने में सरकार को मदद मिलेगी।

वहीं मोदी सरकार 2021 की जनगणना में पहली बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) शुरू करने जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि एनपीआर देश में एक गेम-चेंजर साबित होगा। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि डिजिटल जनगणना के कई फायदे हैं। जैसे कि यदि कोई बच्चा जन्म लेता है और उसकी 18 वर्ष तक की आयु तक मृत्यु नहीं होती है, तो ऐसे में उसका वोटर आईडी कार्ड आवेदन किया बिना ही बन जाएगा और यदि वोटर आईडी कार्ड नहीं भी बनता है तो उसे मतदान करने का अधिकार मिलेगा।
 
कहा जा सकता है कि मोदी सरकार की यह महत्वाकांक्षी योजना यदि अमल में लाई जाती है तो इसके दूरगामी परिणाम हासिल होंगे। जैसा कि आप जानते हैं कि देश घुसपैठियों की समस्या से सालों से परेशान है। राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) बनने से सरकार घुसपैठियों की पहचान करने में कामयाब हो सकेगी। वहीं डिजिटल तरीक़े से जनगणना होने से सरकार के पास कई तरह के आंकड़े उपलब्ध रहेंगे, जिसका उपयोग नीतियां बनाने में किया जा सकेगा। अब देखना होगा कि डिजिटल जनगणना के बाद बहुउद्देश्यीय पहचान पत्र की दिशा में मोदी सरकार क्या क़दम उठाती है?