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जानिए एसबीआई के 1 अक्टूबर से बदलने वाले नियम

Wednesday - September 25, 2019 11:07 am , Category : WTN HINDI
देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है एसबीआई
देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक है एसबीआई

डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने एसबीआई कर रहा है अपने नियमों में बदलाव

SEP 25 (WTN) – देश के सबसे बड़े बैंक यानी कि स्टेट बैंक ऑफ़ इण्डिया (एसबीआई) में 1 अक्टूबर से कई नियमों में बदलाव होने जा रहा है। यदि आप एसबीआई के उपभोक्ता हैं, तो इन नियमों से आपको काफ़ी फ़र्क़ पड़ सकता है। क्या हैं यह नये नियम और एसबीआई ने आख़िर क्यों इन नये नियमों को लागू करने का फ़ैसला लिया है? इसके बारे में विस्तार से आपको जानकारी देते हैं।

1 अक्टूबर से एसबीआई अपने नियमों में बदलाव करने जा रही है, जिनका सीधा असर बैंक के उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। सबसे पहले, सबसे बड़ा बदलाव एसबीआई बैंक खाते में रुपये जमा करने के नियम को लेकर करने जा रही है। एसबीआई द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार 1 अक्टूबर 2019 से एसबीआई के उपभोक्ता एक महीने में सिर्फ़ तीन बार ही अपने खाते में मुफ़्त में रुपये जमा कर पाएंगे।

यदि एसबीआई उपभोक्ता ने महीने में चौथी बार अपने बैंक अकाउण्ट में पैसा जमा किया, तो उसे ट्रांजेक्शन के लिए 50 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) का चार्ज देना होगा। यानी कि 12 प्रतिशत सर्विस चार्ज के साथ चौथी बार या उससे अधिक बार बैंक में रुपये जमा कराने पर एसबीआई उपभोक्ता को 56 रुपये ज़्यादा देना होंगे। वैसे आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अभी किसी भी अन्य बैंक में खाते में रुपये जमा करने सम्बन्धित ऐसा कोई भी नियम नहीं है कि तय सीमा से ज़्यादा बार रुपये जमा करने पर चार्ज लगे।
 
1 अक्टूबर से बदल रहे एसबीआई के नियमों के मुताबिक़ अब एसबीआई ने चेक बुक में पन्नों की संख्या भी कम कर दी है। एसबीआई अब बचत खाते पर एक वित्त वर्ष में 25 की जगह केवल 10 चेक ही मुफ़्त देगा। इसके बाद 10 पन्नों वाली चेक बुक लेने पर 40 रुपये देने होंगे और इसके लिए जीएसटी भी चुकाना होगा। जबकि पहले मुफ़्त चेकबुक के बाद 10 पन्नों वाली चेक बुक लेने पर 30 रुपये लगते थे। वहीं 25 पन्नों वाली चेकबुक के लिए अब उपभोक्ता को 75 रुपये और जीएसटी चार्ज देना होगा।

एसबीआई ने तकनीकी कारण से चेक वापस होने पर लगने वाले चार्ज को भी बढ़ा दिया है। एसबीआई के सर्कुलर के मुताबिक़, 1 अक्टूबर के बाद कोई भी चेक किसी तकनीकी कारण (बाउंस के अलावा) से लौटता है तो चेक जारी करने वाले को जीएसटी सहित 168 रुपये का चार्ज देना होगा।
 
इधर, एसबीआई ने मंथली मिनिमम बैलेंस के नियम को भी बदल दिया है। एसबीआई ने शहरी क्षेत्रों की ब्रांचों में मिनिमम बैलेंस को 5,000 रुपये से घटाकर 3,000 रुपये कर दिया है। वहीं अर्ध-शहरी इलाकों में स्थित एसबीआई ब्रांच में ग्राहकों को अपने खाते में मंथली मिनिमम बैलेंस के तौर पर 2,000 रुपये मेंटेन करना होगा। वहीं ग्रामीण इलाकों में स्थित एसबीआई ब्रांच में 1,000 रुपये मिनिमम बैलेंस का एवरेज मेंटेन करना होगा।

वहीं एसबीआई में 25,000 रुपये की एवरेज मंथली बैलेंस राशि वाले खाताधारक महीने में दो बार मुफ़्त नक़द निकासी कर सकते हैं। वहीं 25,000 से 50,000 रुपये के बीच एवरेज मंथली बैलेंस राशि वाले खाताधारक 10 बार मुफ़्त में नक़द निकासी कर सकते हैं। जबकि 1,00,000 रुपये से ज़्यादा एवरेज मंथली बैलेंस राशि वाले उपभोक्ता असीमित लेनदेन कर सकते हैं।

वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एसबीआई की गैर-होम ब्रांच में नक़दी जमा करने की अधिकतम सीमा 2 लाख रुपये प्रतिदिन कर दी गई है। लेकिन 2 लाख रूपये से ज़्यादा की नक़द रक़म जमा की जाए कि नहीं, इसका फ़ैसला गैर-होम ब्रांच मैनेजर तय करेगा।
 
यदि आप बैंक ब्रांच के माध्मय से रुपयों को जमा नहीं करते हैं और NEFT और RTGS का इस्तेमाल करते हैं तो अब इन डिजिटल माध्यमों की सेवा आपको मुफ़्त में मिलेगी, क्योंकि डिजिटल ट्रांजेशन को बढ़ावा देने के लिए नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फ़ण्ड ट्रांसफर (NEFT) और रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) के ज़रिये रुपया जमा करना अब मुफ़्त है, लेकिन इनकी फीस बैंक की ब्रांच के माध्मय से रुपये जमा करने पर लगाई गई है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि आप बैंक ब्रांच के माध्यम से मनी ट्रांसफर करते हैं तो 10,000 रूपये तक NEFT द्वारा मनी ट्रांसफर के लिए 2 रूपये का चार्ज ( जीएसटी अतिरिक्त) लगेगा। वहीं 10,000 रूपये से 1 लाख रुपये तक NEFT द्वारा मनी ट्रांसफर पर 5 रुपये ( जीएसटी अतिरिक्त) चार्ज लगेगा। 1 लाख से रुपये से ज़्यादा लेकिन 2 लाख रुपये से कम के मनी ट्रांसफर पर NEFT चार्ज 15 रुपये ( जीएसटी अतिरिक्त), वहीं 2 लाख रुपये से ज़्यादा के मनी ट्रांसफर पर NEFT चार्ज 25 रुपये (जीएसटी अतिरिक्त) लगेगा।
 
यदि एसबीआई उपभोक्ता एसबीआई की ब्रांच के माध्यम से RTGS के ज़रिये मनी ट्रांसफर करना चाहता है तो उसे 2 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये तक के लिए 25 रुपये चार्ज लगेगा, जिसमें उसे जीएसटी का चार्ज भी देना होगा। वहीं 5 लाख रुपये से ज़्यादा RTGS के ज़रिये मनी ट्रांसफर करने पर 50 रुपये और जीएसटी का चार्ज वसूला जाएगा।

वहीं 1 अक्‍टूबर से एसबीआई के एटीएम चार्ज भी बदलने वाले हैं। अब बैंक के उपभोक्ता मेट्रो शहरों के एसबीआई एटीएम में से अधिकतम 10 बार मुफ़्त में डेबिट ट्रांजेक्शन कर सकेंगे, अभी यह लिमिट 6 ट्रांजेक्‍शन की है। वहीं अन्य जगहों के एटीएम से अधिकतम 12 मुफ़्त डेबिट ट्रांजेक्शन किये जा सकेंगे।
 
कहा जा रहा है कि एसबीआई की यह पूरी कवायद इसलिए है कि बैंक के उपभोक्ता बैंक के ज़्यादा से ज़्यादा काम डिजिटल तरीक़े से करें। मोदी सरकार की भी यही मंशा है कि डिजिटल तरीक़े से लेनदेन होने से ब्लैक मनी पर लगाम लगेगी और हर तरह के लेनदेन में पारदर्शिता आएगी।

एसबीआई जैसे बैंक भी मोदी सरकार की इसी मंशा के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि उपभोक्ता ज़्यादा से ज़्यादा डिजिटल तरीक़े से बैंक सम्बन्धित काम करें, इसलिए एसबीआई ने नॉन डिजिटल तरीक़े से होने वाले लेनदेन पर चार्ज बढ़ा दिये हैं, जिससे इसका इस्तेमाल करने वालों को हतोत्साहित किया जा सके। वहीं उपभोक्ताओं को राहत देते हुए मंथली एवरेज बैंलेस रखने पर भारी छूट दी गई है, तो वहीं एटीएम से मुफ़्त में डेबिट ट्रांजेक्शन के ज़रिये पैसा निकालने के अवसर बढ़ा दिये गये हैं।