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जानिए अब कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ज़रिये दुश्मनों को परास्त करेगी भारतीय सेना?

Thursday - September 26, 2019 10:54 am , Category : WTN HINDI
भारतीय सेना बढ़ाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अपनी क्षमता
भारतीय सेना बढ़ाएगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से अपनी क्षमता

मैकेनाइज़्ड वार के चुनौतियों से निपटने भारतीय सेना लेगी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा

SEP 26 (WTN) – विश्व की ताक़तवर सेनाओं में शामिल भारतीय सेना के साहस की जितनी भी प्रशंसा की जाए उतनी ही कम है। सालों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद से लोहा लेती भारतीय सेना के जवानों ने देश की सीमाओं और देश के नागरिकों की सुरक्षा के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया है। समय के साथ भारतीय सेना में आधुनिक हथियारों, टैंकों और मिसाइलों के शामिल होने से भारतीय सेना की रक्षात्मक और मारक क्षमता में इज़ाफ़ा हुआ है। लेकिन अब भारतीय सेना अपनी तकनीकी क्षमता को और भी ज़्यादा बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेने जा रही है।
 
आइये सबसे पहले आपको बताते हैं कि आख़िर आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस होता क्या है? दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता उच्च स्तरीय तकनीक से जुड़ा हुए एक विज्ञान है।  आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस में मनुष्य के सोचने, समझने और सीखने की क्षमता की नकल की जाती है। यानी कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस का मतलब ऐसे सिस्टम का विकास करना है, जिसमें आर्टिफीशियल तरीके से मनुष्य की तरह सोचने, समझने और सीखने की क्षमता पाई जाए, लेकिन मनुष्य से तेज़ और बेहतर।

आप सोच रहे होंगे कि आख़िर भारतीय सेना को आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस की क्या ज़रूरत आ पड़ी है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय सेना धरती, आकाश और समुद्र में अपनी मारक क्षमता, जासूसी और रक्षा की क्षमता को और भी ज़्यादा बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल की तरफ़ बढ़ रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का पूरी तरह से उपयोग किया जा सके, इसके लिए जल्द ही सुनियोजित योजना के तहत एक सिस्टम का निर्माण किया जाएगा। भारतीय सेना अगले दो से तीन सालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के लिए एक सिस्टम स्थापित करने जा रही है और इसके क्रियान्वयन का रोडमैप तैयार किया जा रहा है।
 
भविष्य में तकनीक के ज़रिये होने वाले सम्भावित युद्ध की चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय सेना, नीति आयोग, रिसर्च इंस्टीट्यूट और प्राइवेट सेक्टर के साथ काम करेगी। इसमें नीति आयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देने के लिए रोडमैप तैयार करने में जुट गया है, तो वहीं रिसर्च इंस्टिट्यूट और इंडस्ट्री तकनीक पर काम करेंगी और इस सब काम में सेना अपनी ज़रूरतों को एक्सपर्ट के साथ साझा करेगी।

कहा जा रहा है कि इन सभी के साझा प्रयासों से दो से तीन सालों में ऐसे हथियार तैयार होंगे, जिनसे सटीक निशाना लगाया जा सकेगा। वहीं दुश्मन और मित्र की पहचान आसानी से हो सकेगी तो साथ ही सर्विलांस क्षमता जैसे कई छोटे-बड़े काम आसानी से हो सकेंगे। अभी जिन कामों के लिए सेना को दुश्मन के इलाके में दाख़िल होना पड़ता है, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अब ऐसे जोखिम नहीं उठाने पड़ेंगे। वहीं इसके प्रयोग से युद्ध जैसे हालातों में कैजुअलटी को कम किया जा सकेगा। यानी कि कहा जा सकता है कि भारतीय सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर ख़ुद को मैकेनाइज़्ड वार के लिए तैयार कर रही है।
 
जानकारों के अनुसार, हर तरह से सैन्य निर्णय लेने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस उपयुक्त साबित हो सकती है। सेना में एक ऐसा सिस्टम तैयार किया जा रहा है जिससे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेहतर इस्तेमाल तीनों सेनाओं, थल सेना, वायु सेना और जल सेना के लिए किया जा सके।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फरवरी, 2019 में रक्षा मंत्रालय ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्रियान्वयन के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया था, जिसने जून में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। जिसके बाद हरियाणा के हिसार में आर्मी की साउथ कमान की ओर से सेना के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर अपनी तरह के पहले सेमिनार ​का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में यांत्रिक युद्ध होने की स्थिति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर चर्चा की गई।
 
दरअसल, शान्तिकाल में और युद्ध के समय सूचना से लेकर फ़ैसला लेने में सेना की क्षमता बढ़ाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अहम भूमिका हो सकती है। जैसा कि आप जानते हैं कि चीन की सेना धीरे-धीरे आधुनिक होती जा रही है और वो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करने लगी है, वहीं पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी भी आतंकी गतिविधियों की बढ़ाने के लिए आधुनिक संसाधनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। ऐसे में भारतीय सेना को इन चुनौतियों से निपटने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अपनी क्षमता में काफ़ी वृद्धि करने की ज़रूरत है।
 
इस बारे में जानकारों का कहना है कि आने वाले दो से तीन सालों में भारतीय सेना में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े कुछ कामों की शुरूआत हो जाएगी और इसकी शुरुआत मैकेनाइज़्ड फोर्स करेगी। दावा किया जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिये सेना को प्रभावी सूचनाएं मिल पाएंगी, इससे सेना की सटीकता बढ़ेगी, बेहतरीन सुरक्षा प्रणाली स्थापित हो सकेगी और युद्ध के समय इसके उपयोग से मारक क्षमता को और भी ज़्यादा घातक बनाया जा सकेगा।

सेना से मिली जानकारी जानकारी के मुताबिक़, शुरू में सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल रचनात्मक कामों में करेगी। एक तरफ़ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कमाण्डर्स की निर्णय लेने की मदद करेंगे तो वहीं उनकी निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सहायता करेगा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सबसे बड़ा फ़ायदा सटीक खूफिया सूचना हासिल करने में होगा। इसकी मदद से किसी भी खूफिया सूचना के सही या ग़लत होने की विश्लेषण किया जा सकेगा। वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से आतंकियों और घुसपैठियों की पहचान दुर्गम इलाकों में और रात में आसानी से हो सकेगी। वहीं जैसा कि आप जानते हैं कि हमले के समय हथियारों के इस्तेमाल में मानवीय ग़लतियां होना स्वाभाविक है, लेकिन हमले के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल होने से ग़लतियों को काफ़ी कम किया जा सकेगा और इसकी सहायता से हथियारों द्वारा सटीक निशाना लगाया जा सकेगा।
 
तो साफ़ है कि आने वाले समय में युद्ध थल सेना, वायु सेना और जल सेना के साथ-साथ तकनीक के ज़रिये भी लड़े जा सकते हैं। ऐसे में भारतीय सेना को समय के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीक को जल्द से जल्द अपनाना चाहिए, जिससे तकनीकी युद्ध की स्थिति में भारतीय सेना के पास बचाव, सुरक्षा और हमले की क्षमता हो। इसलिए भविष्य में होने वाले सम्भावित मैकेनाइज़्ड वार के लिए भारतीय सेना आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर इस दिशा में ख़ुद की बचाव, सुरक्षा और हमले की क्षमता को विकसित कर रही है।