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अपनी दयनीय आर्थिक हालत के लिए ख़ुद ‘ज़िम्मेदार’ है पाकिस्तान

Friday - September 27, 2019 11:04 am , Category : WTN HINDI
भूटान और नेपाल से भी कम रहेगी पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट!
भूटान और नेपाल से भी कम रहेगी पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट!

पाकिस्तान के नेताओं और वहां की सेना ने ही कर दिया पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बर्बाद

SEP 27 (WTN) – आतंक को पालने पोसने वाले पाकिस्तान की हक़ीक़त धीरे-धीरे पूरी दुनिया को पता चलती जा रही है। भारत में आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान हर हथकण्डा अपनाता है। पाकिस्तान जैसे ग़रीब देश में वहां की सरकारों को नागरिकों की ग़रीबी दूर करने को प्राथमिकता देना चाहिए थी, लेकिन पाकिस्तान के राजनेता वहां की सेना की कठपुतली बनकर भारत में आतंक फैलाने में ज़्यादा दिलचस्पी लेते रहे बजाय पाकिस्तान की ग़रीबी दूर करने के।

पिछले साल जब इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे तो सभी को पता था कि वे पाकिस्तान की सेना की मोहरे मात्र हैं। पाकिस्तान में हुए चुनाव सिर्फ़ पूरी दुनिया को दिखाने के लिए एक नाटक मात्र था, क्योंकि पाकिस्तान की सेना ने चुनाव को पूरी तरह से प्रभावित किया था और एक कठपुतली के रूप में इमरान ख़ान को प्रधानमंत्री बनवा दिया। लेकिन लगता है कि इमरान ख़ान पाकिस्तान को सही तरह से नहीं सम्भल सके हैं और पाकिस्तान की पहले ही ख़राब चल रही अर्थव्यवस्था दिनों दिन और भी ख़राब होती जा रही है।
 
पहले से ही आर्थिक तंगहाली के दौर से गुज़र रहे पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन इतनी ख़राब होती जा रही है कि आने वाले एक साल में यह और भी बदतर हो जाएगी। पाकिस्तान की आर्थिक प्रगति यानी कि जीडीपी की रफ़्तार इतनी धीमी है कि इस साल पाकिस्तान की जीडीपी की ग्रोथ रेट एशिया के दो ग़रीब देशों नेपाल और मालदीव से भी पिछड़ जाएगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ADB (Asian Development Bank) यानी कि एशियन डेवल्पमेण्ट बैंक की ओर से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट सबसे कम रहने वाली है। एडीबी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2019-20 में पाकिस्तान की जीडीपी ग्रोथ रेट 2.8 प्रतिशत रह सकती है, जो कि पिछले 6 साल का सबसे निचला स्तर है।

ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान के पास आर्थिक प्रगति करने के लिए साधन और समझ नहीं है। लेकिन पाकिस्तान अपने साधनों और समझ का ग़लत इस्तेमाल भारत में आतंक फैलाने में करता है। समय-समय पर पाकिस्तान को अमेरिका द्वारा करोड़ों डॉलर की सहायता हासिल होती रहती है, लेकिन पाकिस्तान इस सहायता का सही तरीक़े से इस्तेमाल नहीं कर पाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के मसले पर पाकिस्तान, अमेरिका को ब्लैकमेल करता रहता है और करोड़ों डॉलर की आर्थिक सहायता हासिल करता रहता है।

वहीं चीन ने पाकिस्तान में सीपीईसी और बेल्ट एण्ड रोड जैसे अरबों डॉलर की अति महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में निवेश किया है, लेकिन अब पाकिस्तान के नेताओं, अधिकारियों और सेना में इसके प्रति कोई दिलचस्पी दिखाई नहीं दे रही है। कहा जा रहा है कि पाकिस्तान में अपनी अति महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की दुर्दशा देखकर चीन इन दिनों पाकिस्तान से नाराज़ चल रहा है।

जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि पाकिस्तान भारत में आतंक फैलाने में अपने साधन और समझ को बर्बाद कर रहा है, ऐसे में FATF (Financial Action Task Force) यानी कि फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स पाकिस्तान पर कड़ी निगरानी रख रहा है। दिनों-दिन ख़राब होती पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष से थोड़ी राहत तब मिली, जब आईएमएफ ने पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर का बेलआउट पैकेज देना मन्जूर किया। लेकिन आईएमएफ ने इतनी कड़ी शर्तों पर पाकिस्तान को बेलआउट दिया है, जिसके कारण पाकिस्तान में दिनों-दिन बढ़ती महंगाई के कारण ग़रीबों और मध्यमवर्गीय लोगों का जीना मुश्किल हो गया है।

पाकिस्तान के आर्थिक कुप्रबंधन के कारण ही एडीबी ने वित्त वर्ष में जारी किए अपने अनुमान में बताया है कि दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान की आर्थिक ग्रोथ सबसे कम रह सकती है। एडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान से ज़्यादा जीडीपी तालिबान के आतंक से प्रभावित अफगानिस्तान, श्रीलंका और भूटान, मालदीव और नेपाल जैसे छोटे देशों की रहने वाली है। वहीं पाकिस्तान की सेना के अत्याचारों से अलग देश बने बांग्लादेश की जीडीपी ग्रोथ रेट पाकिस्तान से कही ज़्यादा 8 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है।
 
जैसा कि हमने आपको पहले बताया कि आईएमएफ की कड़ी शर्तों के कारण पाकिस्तान में कई तरह के टैक्स बढ़ाए गये हैं, जिसके कारण पाकिस्तान में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। पाकिस्तान की आर्थिक हालत पर टिप्पणी करते हुए एडीबी का कहना है कि पाकिस्तानियों को इस साल तो महंगाई से राहत नहीं मिलने वाली है। अनुमान है कि पाकिस्तान में इस साल के आख़िरी तक महंगाई दर 12 प्रतिशत के आसपास रह सकती है, वहीं मौजूदा समय में भी पाकिस्तानियों को महंगाई से राहत नहीं मिली है और इस समय महंगाई की दर 11 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान की खस्ता आर्थिक हालत की एक वजह पाकिस्तानी रुपये की डॉलर के सामने कमज़ोरी भी है। वहीं दूसरी तरफ़ पाकिस्तान से होने वाले निर्यात में काफ़ी कमी आई है, जिसके कारण पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भण्डार की कमी होती जा रही है। एडीबी की रिपोर्ट के अनुसार, कृत्रि क्षेत्र में सुधार के बावजूद पाकिस्तान की आर्थिक ग्रोथ तेज़ी से गिर रही है। वहीं पाकिस्तान की कमज़ोर नीतियों के कारण ही राजकोषीय घाटा बढ़ता ही जा रहा है।

साफ़ जाहिर है कि पाकिस्तान की आर्थिक बर्बादी का कारण वह ख़ुद ही है। यदि समय रहते पाकिस्तान ने आतंकवाद पर नियंत्रण नहीं लगाया, तो आने वाले समय में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है। पाकिस्तान जब तक आर्थिक असंतुलन को कम नहीं करता है, तब पाकिस्तान की आर्थिक ग्रोथ में धीमापन जारी रहेगा साथ ही महंगाई के कारण पाकिस्तानी मुद्रा पर दबाव बना रहेगा।

पाकिस्तान को यदि अपनी आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाना है, तो उसे सबसे पहले आतंकियों का सफ़ाया करना होगा और देश के नागिरकों की मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करना होगा। लेकिन लगता नहीं है कि पाकिस्तान के नेता और वहां की सेना में इसकी समझ आएगी, क्योंकि भारत विरोध के ज़रिये ही पाकिस्तान में नेताओं की राजनीति और सेना की दादगीरी चलती रहती है।