BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

काम आई प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति, सऊदी अरब ने पाकिस्तान को दिया ‘झटका’

Monday - September 30, 2019 12:55 pm , Category : WTN HINDI
भारत में 100 अरब डॉलर निवेश कर सकता है सऊदी अरब
भारत में 100 अरब डॉलर निवेश कर सकता है सऊदी अरब

सऊदी अरब भारत में करेगा लाखों करोड़ का निवेश, मिलेंगे रोज़गार के बेहतर अवसर

SEP 30 (WTN) – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कूटनीति से एक बार फ़िर से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। कश्मीर मुद्दे पर धर्म के आधार पर मुस्लिम देशों के समर्थन की आशा देख रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को लगता था कि सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देश कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का साथ देंगे और भारत का राजनीतिक और व्यापारिक स्तर पर विरोध औऱ बहिष्कार करेंगे। लेकिन इमरान ख़ान के मंसूबों पर पानी फ़िर गया है, क्योंकि सऊदी अरब ने पाकिस्तान की लाख कोशिशों के बावजूद भारत में अरबों डॉलर के निवेश में रूचि दिखाई है।
 
यदि सऊदी अरब ऐसा करता है, तो यह पाकिस्तान और उसके प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान की हमेशा से यही सोच रही है कि सऊदी अरब एक मुस्लिम देश होने के कारण पाकिस्तान का हर मुद्दे पर साथ देगा, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने अंतर्राष्ट्रीय सम्बन्धों के आधार पर सऊदी अरब को इस बात के लिए लगभग मना लिया है कि वो व्यापार की असीम सम्भावनाओं वाले देश भारत में निवेश करे।

दरअसल, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब, भारत में आर्थिक वृद्धि की असीम सम्भावनाओं को देखते हुए ईंधन, परिशोधन, पेट्रो रसायन, बुनियादी संरचना, कृषि, खनिज और खनन में 100 अरब डॉलर निवेश करने की सम्भावनाएं देख रहा है। भारत जैसे देश की विशाल जनसंख्या वाले मार्केट और टेलेंटेट वर्कर्स को देखते हुए सऊदी अरब को भारत में निवेश करना एक सुनहरा अवसर लगता है। इसी के चलते सऊदी अरब, भारत में दीर्घकालीन व्यापारिक भागीदारी पर गौर कर रहा है।
 
जानकारी के मुताबिक़, भारत के तेल आपूर्ति सेक्टर, खुदरा ईंधन बिक्री, पेट्रो रसायन और लुब्रिकैंट बाज़ार में सऊदी अरब की दुनिया की सबसे बड़ी तेल कम्पनी अरामको की निवेश की योजना इन क्षत्रों में कम्पनी के वैश्विक विस्तार की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दरअसल, सऊदी अरब के युवराज मोहम्मद बिन सलमान, विजन-2030 के तहत सऊदी अरब और भारत के बीच विभिन्न क्षेत्रों में व्यापार व कारेाबार में उल्लेखनीय विस्तार करना चाहते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सऊदी अरब विजन-2030 के तहत पेट्रोलियम उत्पादों पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने का प्रयास कर रहा है। ऐसा इसलिए, क्योंकि सऊदी अरब जानता है कि कच्चे तेल की भविष्य में कमी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल ज़्यादा होने के कारण तेल आधारित उसकी अर्थव्यवस्था पर काफ़ी प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सऊदी अरब तेल के अलावा अन्य क्षेत्रों में निवेश पर ध्यान केन्द्रित कर रहा है।
 
भारत और सऊदी अरब के बीच व्यापारिक सम्बन्ध काफ़ी पुराने हैं। भारत कच्चा तेल और एलपीजी की आपूर्ति के लिए बहुत कुछ सऊदी अरब पर निर्भर है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत अपने कच्चे तेल की ज़रूरत का 17 प्रतिशत सऊदी अरब से आयात करता है, वहीं भारत अपनी ज़रूरत की 32 प्रतिशत एलपीजी आपूर्ति सऊदी अरब से करता है।
 
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाले देश भारत के विशाल बाज़ार को देखते हुए सऊदी अरब ने भारत में संयुक्त भागीदारी और निवेश के 40 से ज़्यादा अवसरों की पहचान की है। वैसे फ़िलहाल भारत और सऊदी अरब के बीच 34 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। कहा जा रहा है कि सऊदी अरब के भारत में निवेश में रूचि दिखाए जाने के बाद दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में काफ़ी वृद्धि हो सकती है।

जैसा कि हमने आपको बताया कि सऊदी अरब अब तेल आधारित अर्थव्यवस्था पर अपनी आर्थिक निर्भरता कम करने के लिए भविष्य में दूसरे विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसी कड़ी में सऊदी अरब कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों तथा एलपीजी की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों से अलग कुछ दूसरे क्षेत्रों में भी भारत के साथ आर्थिक साझेदारी करने का इच्छुक है।

इधर, भारत भी जानता है कि सऊदी अरब यदि भारत में निवेश करता है, तो इससे देश की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और यह निवेश साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्षव्यवस्था बनने कीे लक्ष्य को हासिल करने में अहम योगदान दे सकता है। वहीं सऊदी अरब के लाखों करोड़ रुपयों के निवेश से बड़ी तादात में रोज़हार उत्पन्न होगें। ऐसे में भारत ने सऊदी अरब को रणनीतिक पेट्रोलियम भण्डार में निवेश करने का निमंत्रण दिया है, जिसे देखकर कहा जा सकता है कि दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ता जा रहा है।
 
अब जबकि सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कम्पनी अरामको की भारत की रिलायंस इण्डस्ट्रीज के साथ यदि भागीदारी आगे बढ़ती है, तो इससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सम्बन्धों की रणनीतिक प्रकृति का पता पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया को चल सकेगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आरमको और रिलायंस के बीच समझौते के तहत अरामको ने भारत के ऊर्जा सेक्टर में 44 बिलियन डॉलर की वेस्ट कोस्ट रिफाइनरी और महाराष्ट्र में पेट्रोकेमिकल्स प्रोजेक्ट पर निवेश की योजना बनाई है। रिलायंस के साथ आरामको की लम्बी साझेदारी यह दिखाती है कि दोनों देशों के साथ व्यापार समझौता भविष्य के लिए आगे के रास्ते खोलेगा।
 
तो साफ़ ज़ाहिर है कि कश्मीर पर इस्लाम की दुहाई देकर समर्थन जुटाने की कोशिश में जुटे
पाकिस्तान को सऊदी अरब बुरा झटका देने जा रहा है। वैसे सऊदी अरब जानता है कि आतंक को पालने-पोसने वाले पाकिस्तान में निवेश करना किसी भी तरह ख़तरे से ख़ाली नहीं है। वहीं पाकिस्तान और चीन के बीच दोस्ताना सम्बन्धों को देखते हुए सऊदी अरब पाकिस्तान से दूरी बनाए रखने में ख़ुद का भला समझेगा।

ऐसा इसलिए, क्योंकि खाड़ी में ईरान और अन्य दुश्मन देशों के घिरा सऊदी अरब अपने सबसे अच्छे दोस्त अमेरिका को नाराज़ नहीं करना चाहेगा कि वो (सऊदी अरब) पाकिस्तान में निवेश करे और इस निवेश का फ़ायदा सीपीईसी और बेल्ट एण्ड रोड के ज़रिये चीन को मिले। भारत जैसे विशाल बाज़ार में निवेश में रूचि दिखाकर सऊदी अरब ने पाकिस्तान को उसकी औकात याद दिलाते हुए बता दिया है कि पाकिस्तान एक असफ़ल और आतंकी देश भर है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सकता है।