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पाकिस्तान में तख़्तापलट की सुगबुगाहट!

Thursday - October 3, 2019 4:31 pm , Category : WTN HINDI
इमरान ख़ान की नीतियों से ख़फा चल रहे जनरल बाजवा
इमरान ख़ान की नीतियों से ख़फा चल रहे जनरल बाजवा

नाकाम इमरान ख़ान सरकार पर मण्डराया तख़्तापलट का साया

OCT 03 (WTN) – आतंक को पनाह देने वाले देश पाकिस्तान में लोकतांत्रिक व्यवस्था सिर्फ़ दुनिया को दिखाने के लिए ही है। वास्तव में पाकिस्तान की स्थापना से लेकर अभी तक पाकिस्तान की राजनीति में वहां की सेना का ही दबदबा रहा है। कहने को तो पाकिस्तान में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार होती है, लेकिन हक़ीकत है कि पाकिस्तान में सेना के रहमो करम पर ही वहां के प्रधानमंत्री रहते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि पिछले साल पाकिस्तान में हुए चुनाव के बाद इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन यह भी सभी जानते हैं कि इमरान ख़ान सेना की एक कठपुतली मात्र हैं।

जब से इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं, तभी से पाकिस्तान की आर्थिक हालत दिनों-दिन ख़राब होती जा रही है। पाकिस्तान पर बढ़ता क़र्ज़, डॉलर के मुकाबले कमज़ोर होता रुपया, बढ़ती महंगाई और विदेश मुद्रा की कमी के चलते पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था कभी भी तबाह हो सकती है। जैसा कि हमने आपको बताया कि पाकिस्तान की सेना अपने देश की अंदरूनी राजनीति में दखलंदाज़ी करती रहती है, लेकिन अब पाकिस्तान की सेना ने देश की अर्थव्यवस्था में भी हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया है।

दरअसल, पाकिस्तान की अर्थव्यस्था धीरे-धीरे और भी ज़्यादा कमजोर होती जा रही है। हालत यह हो गई है कि पाकिस्तान का बजट घाटा तीन दशकों में सर्वोच्च स्तर पर पहुंच चुका है। पुलवामा आतंकी हमले के बाद से मोदी सरकार की कूटनीति के कारण पाकिस्तान पूरी दुनिया में अकेला पड़ गया है, जिसके कारण पाकिस्तान की अर्थव्यस्था पर और भी ज़्यादा नकारात्मक असर पड़ता जा रहा है। वैसे देखा जाए तो इमरान ख़ान अपने देश की अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए कोई बेहतर ठोस उपाय भी नहीं कर पा रहे है।
 
यदि कहा जाए कि इस समय पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा आलोचना किसी व्यक्ति की हो रही है, तो वे ख़ुद इमरान ख़ान ही हैं। कहा जा रहा है कि अब पाकिस्तान में सेना का विश्वास भी इमरान ख़ान पर से उठने लगा है और यही कारण है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा ने देश की राजनीति के बाद अब देश की अर्थव्यवस्था में भी दखल देना शुरू कर दिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा ने पाकिस्तान के कारोबारियों ने मुलाक़ात की है। ख़बर है कि यह मुलाक़ात रावलपिंडी के आर्मी हाउस में की गई थी। इस मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के बड़े बिज़नेस लीडर्स ने सेना प्रमुख बाजवा के साथ डिनर भी किया, लेकिन जनरल बाजवा की इस मुलाक़ात के बाद से पाकिस्तान में एक बार फ़िर से तख़्तापलट की आशंका गहराती जा रही है।

लेकिन पहले तो यह सवाल उठता है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख ने किस हैसियत से देश के बड़े बिज़नेस लीडर्स के साथ मुलाक़ात की थी, तो कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की दिनों-दिन ख़राब होती आर्थिक हालत की शिकायत वहां के कारोबारियों ने गुपचुप तरीक़े से सेना प्रमुख से की थी। पाकिस्तान के कारोबारियों का आरोप है कि इमरान ख़ान सरकार देश की अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए कोई बड़ा क़दम नहीं उठा रही है। कारोबारियों को शिकायत है कि इमरान ख़ान सरकार जो कुछ भी मौखिक रूप से अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कह रही है, उसे पूरा नहीं कर रही है।

वैसे पाकिस्तान के बिज़नेस लीडर्स का कहना है कि इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाक़ात की थी और अपनी परेशानियों के बारे में उन्हें बताया था, लेकिन उनकी किसी भी समस्या को दूर करने के लिए कोई भी ठोस क़दम सरकार की तरफ़ से नहीं उठाया गया है। वैसे कहा जा रहा है कि सेना प्रमुख से मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के बिज़नेस लीडर्स का प्रतिनिधिमण्डल एक बार फिर प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाक़ात करेगा।

वैसे कहा यह भी जा रहा है कि बिज़नेस लीडर्स के साथ मुलाक़ात में जनरल बाजवा ने देश की आंतरिक सुरक्षा और उसके माहौल के बारे में उन्हें जानकारी दी है, जिसके बाद जनरल बाजवा ने टॉप बिज़नेस लीडर्स से देश की अर्थव्यवस्था को गति देने की गुजारिश की है।

लेकिन जनरल बाजवा की कारोबारियों के साथ मुलाक़ात, जो एक सामान्य मुलाक़ात लग रही है उसके पीछे की वजह कुछ और भी हो सकती है। दरअसल, ख़बर यह भी सामने आ रही है कि जनरल बाजवा के इन कारोबारियों के साथ पहले से काफ़ी दोस्‍ताना सम्बन्ध रहे हैं और इन कारोबारियों को अपने पक्ष में करने के बाद जनरल बाजवा पाकिस्तान में इमरान ख़ान सरकार का तख़्तापलट कर सकते हैं।

वैसे इस समय पाकिस्तान में आर्मी चीफ़ जनरल क़मर बाजवा पूरी तरह से सेना को अपने नियंत्रण में ले चुके हैं। अभी कुछ ही दिनों पहले पाकिस्तान के पीएम ऑफिस से आर्मी चीफ़ जनरल क़मर जावेद बाजवा के नाम एक चिट्ठी जारी हुई थी, जिसमें बाजवा को अगले तीन साल के लिए सेना की कमान फिर से सौंप दी गई थी। ख़ुद पाकिस्‍तान में अब यह माना जाने लगा है कि बेशक इमरान खान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं, लेकिन देश की राजनीति और विदेश नीति के फ़ैसले ख़ुद जनरल बाजवा कर रहे हैं।

इधर, जनरल बाजवा की कारोबारियों के साथ मुलाक़ात पर पाकिस्‍तान में कुछ लोगों का मानना है कि सेना प्रमुख को सीमा की सुरक्षा पर अधिक ध्‍यान देना चाहिए, न कि सरकार के काम में इस तरह से हस्तक्षेप करना चाहिए। लोगों का मानना है कि अर्थव्यवस्था की ज़िम्मेदारी पूरी तरह से सरकार की होती है और सरकार के इस काम में सेना को दखलंदाज़ी नहीं करना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्योंकि ऐसा होने से सेना द्वारा तख्‍तापलट की आशंका बढ़ जाती है और जनता की चुनी हुई सरकार की स्‍थिरता पर सवालिया निशान खड़े हो जाते हैं।

दरअसल, मोदी सरकार द्वारा की गई सर्जीकल स्ट्राइल और एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान की सेना की क्षमता पर उनके देश में ही सवाल उठने लगे हैं। भारतीय सेना और भारतीय वायु सेना ने जिस तरह से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों का सफ़ाया किया था, उसका पाकिस्तान की सेना कोई जवाब नहीं दे सकी थी, जिसके बाद कहा जा रहा है कि ख़ुद को अपने देश में हीरो साबित करने के लिए पाकिस्तान की सेना एक बार फ़िर से तख़्तापलट कर सकती है।

वहीं पाकिस्तान की सेना किसी भी तरह से कश्मीर मुद्दे के नाम पर ख़ुद को पाकिस्तान की राजनीति में सक्रिय रखती रही है। और इसी कारण हो सकता है कि जम्मू-कश्मीर राज्य से अनुच्छेद 370 हटने के बाद इस मसले का अंतर्राष्ट्रीयकरण करने में असफ़ल रहने पर इमरान ख़ान सरकार का तख़्तापलट कश्मीर के नाम पर पाकिस्तान की सेना कर सकती है।

वैसे यदि पाकिस्तान में एक बार फ़िर से तख़्तापलट होता है, तो यह पाकिस्तान के इतिहास में कोई नई घटना नहीं होगी। पाकिस्तान के अभी तक के इतिहास में कई बार सेना ने चुनी हुई सरकारों का तख़्तापलट कर खुद सत्‍ता की कमान सम्भाली है। अयूब ख़ान, याह्या खान, ज़ियाउल हक़ और परवेज़ मुशर्रफ ने अपने-अपने समय की चुनी हुई सरकारों का तख़्तापलट किया था और जिसके कारण 35 सालों तक पाकिस्तान में सेना का शासन रहा है। यदि पाकिस्तान के वर्तमान हालत पर नज़र डाली जाए, तो संकेत दिख रहे हैं कि जनरल बाजवा नाकाम साबित हो रही इमरान ख़ान सरकार का तख़्तापलट कर सकते हैं।