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जानिए कैसे बन सकता है भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था?

Friday - October 4, 2019 4:21 pm , Category : WTN HINDI
वर्तमान में भारत की जीडीपी है 2.61 ट्रिलियन डॉलर
वर्तमान में भारत की जीडीपी है 2.61 ट्रिलियन डॉलर

5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करना भारत के लिए नहीं है कोई मुश्किल!

OCT 04 (WTN) – धीरे-धीरे ही सही, लेकिन भारत की आर्थिक शक्ति में दिनों-दिन इज़ाफ़ा हो रहा है। इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की 6 वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत के बाद से ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने साल 2025 तक भारत की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। जब से प्रधानमंत्री मोदी ने 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की बात कही है, तभी से विपक्ष सरकार से सवाल कर रहा है कि आख़िर किस आधार पर प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था साल 2025 तक 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगी? वहीं विपक्ष मोदी सरकार से पूछ रहा है कि आख़िर सरकार के पास ऐसी कौन सी योजनाएं हैं जिसके आधार पर सरकार 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के सपने देख रही है और दिखा रही है।

5 ट्रिलियन डॉलर यानी कि 5,000 अरब डॉलर की अर्थव्यस्था की बात प्रधानमंत्री मोदी कर रहे हैं। वैसे कोई ना कोई ठोस योजना ज़रूर ही प्रधानमंत्री मोदी के पास होगी, जिसके आधार पर वे 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की बात कह रहे हैं। भारत का विपक्ष ज़रूर अपना विपक्षी धर्म निभाते हुए प्रधानमंत्री मोदी की 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था की बात को मजाक में ले रहा हो, लेकिन विश्व आर्थिक मंच (WEF) के अध्यक्ष बोर्ज ब्रेंड का कहना है कि भारत अगले पांच सालों में 5,000 अरब डॉलर (5 Trillion Dollar Economy) और उसके बाद अगले 15 सालों में 10,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था बनने के लिये तैयार है।
 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वेबसाइट www.narendramodi.in पर लिखे अपने एक ब्लॉग में बोर्ज ब्रेंड का कहना है कि निर्णायक नेतृत्व क्षमता के साथ वैश्विक स्तर पर भारत का कद काफी बढ़ा है। अपने ब्लॉग में ब्रेंड ने लिखा है, “वैश्विक आर्थिक वृद्धि अनुमान से एक प्रतिशत कम रहने की पूरी सम्भावना है, जो साल 2000 के दशक के प्रारम्भ में आई वैश्विक मंदी के काफ़ी क़रीब है। लेकिन इस सबके विपरीत दक्षिण एशिया की आर्थिक स्थिति लगातार मज़बूत हो रही है, जिसमें भारत भी शामिल है।”

दरअसल, भारतीय अर्थव्यवस्था ने जो एक ऊंची छलांग लगाई है इसी के कारण भारत वह उस वैश्विक दर्जे का अधिकारी है जो उसे प्राप्त हुआ है। भारत ने अक्षय ऊर्जा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता और पेरिस जलवायु समझौते और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन में अग्रणी भूमिका निभाते हुए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर अपनी नेतृत्व क्षमता का परिचय दिया है। साफ़ ज़ाहिर है कि यह इस बात का संकेत है कि भारत अब पूरी दुनिया में नेतृत्व करने के स्तर पर आ गया है।

आर्थिक क्षेत्र में भारत ने जो मुकाम हासिल किये हैं, वो भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ही सम्भव है। भारत इस समय एक युवा देश है यानी कि देश की अधिकांश जनसंख्या 45 साल से कम आयु वर्ग की है। साफ़ है कि जब भारत की आधी आबादी काम कर सकने में सक्षम उम्र वालों की है तो यह देश की लिए एक बहुत बड़ी लाभकारी स्थिति है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत इस साल के वर्ल्ड इनोवेशन इंडेक्स में 52वें स्थान पर चढ़कर उन देशों में शामिल हो गया है, जिन्होने पिछले नौ सालों में लगातार अपनी स्थिति में सुधार किया है।
 
विश्व के कुछ अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत में इतनी क्षमता है कि वो आने वाले पांच सालों में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य को हासिल कर सकता है। ऐसा इसलिए, क्योंकि भारत के पास अपने विशिष्ट जनसांखिकीय लाभ हैं तो वहीं तकनीकी दक्षता और इनोवेशन के चलते भारत चौथी औद्योगिक क्रांति की तकनीकों को अपनाते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी राजनैतिक, आर्थिक और रणनीतिक स्थिति मज़बूत कर सकता है।

यदि भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यस्था का लक्ष्य हासिल करना है, तो भारत को इसके लिए घरेलू स्तर पर ही प्रयास और सुधार करने होंगे। इसी के चलते भारत को अपने घरेलू संरचनात्मक सुधारों और विकास कार्यों को प्रमुखता देना होगी। वहीं विदेशी निवेश के लिए भारत को अपने यहां बिज़नेस फ्रैण्डली वातावरण बनाना होगा। वैसे भारत ने सरलता से व्यवसाय (Ease of Doing Business) करने की सूची में 65 स्थान की छलांग लगाकर निवेशकों के विश्वास को बढ़ाया है, जिसके आधार पर कहा जा सकता है कि भारत यदि योजनाबद्ध तरीक़े से आगे बढ़ता रहा, तो 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था 19.39 ट्रिलियन डॉलर के साथ शीर्ष पर है। वहीं 12.01 ट्रिलियन डॉलर जीडीपी के साथ चीन दूसरे स्थान पर काबिज़ है। वहीं जापान की जीडीपी 4.87 ट्रिलियन डॉलर, जर्मनी की 3.68 ट्रिलियन डॉलर, ब्रिटेन की 2.62 ट्रिलियन डॉलर और भारत की जीडीपी 2.61 ट्रिलियन डॉलर की है।
 
साफ़ ज़ाहिर है कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यस्था बनने के लिए भारत को आने वाले 5 सालों में अपनी वर्तमान जीडीपी को लगभग दोगुना करना होगा। ऐसा नहीं है कि भारत इस कठिन लक्ष्य को हासिल नहीं कर सकता है। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि साल 1980 में भारतीय अर्थव्यवस्था सिर्फ 189.438 बिलियन डॉलर की थी और वैश्विक स्तर पर 13 वें स्थान पर थी। लेकिन 1980 से लेकर 2019 तक, इन 39 सालों में भारत ने अपनी आर्थिक नीतियों में सुधार कर, जनसंख्या पर नियंत्रण कर और विदेशी निवेश को लुभाकर अपनी अर्थव्यवस्था को 2.61 ट्रिलियन डॉलर तक ले आया  है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत हमेशा से ही एक कृषि प्रधान देश रहा है। आज़ादी के बाद से लेकर कई सालों तक भारत की जीडीपी में कृषि क्षेत्र की सबसे ज़्यादा हिस्सेदारी थी। लेकिन समय के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की हिस्सेदारी कम होती चली गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि देश में पिछले कुछ सालों में सेवा क्षेत्र और उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र में मज़बूती आई है।

आंकड़े बताते हैं कि भारत की जीडीपी में सेवा क्षेत्र का योगदान इस समय क़रीब 55 प्रतिशत हो गया है। वहीं उद्योग और विनिर्माण क्षेत्र का योगदान भारतीय जीडीपी में क़रीब 30 प्रतिशत है, जबकि कृषि क्षेत्र का योगदान भारतीय अर्थव्यवस्था में सिर्फ़ क़रीब 15 प्रतिशत तक सिमट कर रह गया है। साफ़ जाहिर है कि सेवा क्षेत्र और उद्योगों के दम पर भारत 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल कर सकता है, क्योंकि बढ़ते उद्योगों के कारण भारत की निर्यात करने की क्षमता में वृद्धि हुई है वहीं उच्च बचत दर, अनुकूल जनसांख्यिकी और बढ़ता हुआ पढ़ा लिखा मध्यम वर्ग इस लक्ष्य को हासिल करने में सबसे बड़े सहायक साबित हो सकते हैं।