BrahMos WORLD INDIA MADHYA PRADESH BHOPAL WTN SPECIAL Astrology GOSSIP CORNER SPORTS BUSINESS FUN FACTS ENTERTAINMENT LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE SCIENCE & TECHNOLOGY HEALTH EDUCATION DIASPORA OPINION & INTERVIEW RECIPES DRINKS FUNNY VIDEOS VIRAL ON WEB PICTURE STORIES
WTN HINDI ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
logo
Breaking News

यदि ‘ऐसा’ ही रहा तो चीन कर सकता है पाकिस्तान के किसी हिस्से पर कब्ज़ा!

Saturday - October 5, 2019 11:47 am , Category : WTN HINDI
चीन के क़र्ज़ तले दबा पाकिस्तान
चीन के क़र्ज़ तले दबा पाकिस्तान

दिवालिया होने की कगार पर पहुंची पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था; चीन की पाकिस्तानी ज़मीन पर नज़रें!

OCT 05 (WTN) – पाकिस्तान को अब पूर्ण रूप से एक असफ़ल देश कहा जाना चाहिए। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि आज पाकिस्तान की जो दशा है वो जिस दिशा की तरफ़ बढ़ रहा है, उस आधार पर उसे एक असफ़ल देश कहा जा सकता है। जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान में लोकतंत्र सेना के भरोसे है, पाकिस्तान की सेना ख़ुद आतंकियों को पनाह और प्रशिक्षण देती है, पाकिस्तान की सेना अपनी सरकार के साथ मिलकर बलूचों, सिंधियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करती है; यह वे उदाहरण हैं जो कि पाकिस्तान को एक असफ़ल देश कहने के लिए काफ़ी है।

भारत से अलग होने के बाद बना देश पाकिस्तान चाहता तो काफ़ी तरक्की कर सकता था, लेकिन आतंक को पनाह देने के कारण पाकिस्तान आज आर्थिक रूप से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है। बांग्लादेश, जो कि पाकिस्तान से अलग होकर एक नया देश बना, ने आज की तारीख़ में पाकिस्तान से ज़्यादा आर्थिक तरक्की कर ली है, और आने वाले समय में बांग्लादेश, पाकिस्तान से आर्थिक समृद्धि में काफ़ी आगे निकल जाएगा।
 
भारत में आतंक फैलाने वाले पाकिस्तान को हमेशा से ही चीन मदद करता आया है। पाकिस्तान कहता आया है कि चीन उसका सबसे ख़ास दोस्त है। वहीं चीन भी समय-समय पर पाकिस्तान की सहायता करता आया है और साथ निभाता आया है, लेकिन सिर्फ़ उन्हीं परिस्थितियों में जब कि पाकिस्तान को चीन की सहायता की ज़रूरत भारत के ख़िलाफ़ पड़ी है।
 
चीन हमेशा से जानता है कि भारत में लगातार आतंकी गतिविधियां होते रहने से अशान्ति होगी और इससे भारत की आर्थिक प्रगति प्रभावित होगी, इसलिए चीन ने पाकिस्तान का हर उस परिस्थिति में साथ दिया है, जब पाकिस्तान को भारत के ख़िलाफ़ किसी बड़े देश की ज़रूरत पड़ी है। लेकिन चीन कहने को एक साम्यवादी व्यवस्था वाला देश है और पाकिस्तान का मित्र देश है, लेकिन पाकिस्तान के लिए चीन अब एक बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है। आप सोच रहे होंगे कि आख़िर चीन और पाकिस्तान के बीच ऐसा क्या हो गया है, या फ़िर होने जा रहा है जिसके कारण पाकिस्तान के लिए चीन एक बड़ा ख़तरा बनता जा रहा है? तो क्या है यह पूरा मामला, आइये आपको विस्तार से बताते हैं।
 
दरअसल, पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे चीन की क़र्ज़दार हो चुकी है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, पाकिस्तान को आईएमएफ़ यानी कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के क़र्ज़ से दोगुनी राशि का क़र्ज़ चीन का चुकाना है। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि पाकिस्तान अब चीन का बहुत बड़ा क़र्ज़दार बन गया है, और पाकिस्तान पर चीन के क़र्ज़ की राशि दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। हालत यह हो गई है क़र्ज़ के कारण पाकिस्तान के सामने फॉरेन एक्सचेंज का संकट खड़ा हो गया है।

दोस्ती की आड़ में चीन ने पाकिस्तान को क़र्ज़ से पूरी तरह से लाद दिया है। जानकारी के मुताबिक़, जून 2022 तक पाकिस्तान को चीन का 6.7 अरब डॉलर का क़र्ज़ चुकाना है, और यह राशि पाकिस्तान द्वारा आईएमएफ से ली गई क़र्ज़ की राशि से दोगुनी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति के जानकारों का मानना है कि यदि पाकिस्तान समय रहते चीन का क़र्ज़ चुकाने में नाकामयाब रहता है, तो हो सकता है कि विस्तारवादी मानसिकता वाला चीन, पाकिस्तान के किसी हिस्से पर कब्ज़ा कर ले। ऐसा इसलिए, क्योंकि साम्यवाद की आड़ में पूंजीवादी रणनीति वाला चीन किसी भी हालत में पाकिस्तान को दिये गये क़र्ज़ का एक-एक पैसा वसूल करना चाहेगा, और इसके लिए वो पाकिस्तान की ज़मीन पर कब्ज़ा तक कर सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सेन्टर फॉर ग्लोबल डिवेलपमेण्ट पाकिस्तान को उन 8 देशों में शामिल कर चुका है, जो कि चीन के बहु महत्वाकांक्षी बेल्ट एण्ड रोड प्लान के चलते क़र्ज़ के संकट में फंसे हुए हैं। जानकारों का मानना है कि चीन के जाल में फंसकर पाकिस्तान ने बेल्ट एण्ड रोड प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने का फ़ैसला ले तो लिया था, लेकिन पाकिस्तान का यही फ़ैसला उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह करने के लिए काफ़ी था।

इतना ही नहीं बढ़ते विदेशी क़र्ज़, डबल डिजिट पर पहुंचती महंगाई दर, डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी करेंसी में गिरावट और विदेशी मुद्रा में लगातार होती कमी के कारण पाकिस्तान ख़ुद को दिवालिया भी घोषित कर सकता है। दरअसल, पाकिस्तान के पास धीरे-धीरे विदेशी मुद्रा रिज़र्व की कमी आती गई। ऐसी स्थिति में इस संकट से निपटने के लिए पाकिस्तान लगातार चीन से क़र्ज़ लेता रहा। चीन भी पाकिस्तान के गम्भीर आर्थिक हालातों का फायदा उठाते हुए उसे क़र्ज़ पर क़र्ज़ देता रहा, लेकिन पाकिस्तान अब चीन से इतना ज़्यादा क़र्ज़ से चुका है कि चीन उसके लिए एक ख़तरा बन सकता है।

हाल ही में पाकिस्तान सरकार ने कुछ आंकड़े जारी किये हैं, जिसके मुताबिक़ अगले पांच सालों में पाकिस्तान सरकार पर कुल क़र्ज़ का बोझ 47 प्रतिशत बढ़कर 45.57 ट्रिलियन रुपये हो जाएगा। वहीं वित्त वर्ष 2019 तक यह क़र्ज़ 31 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये है। वही अनुमान के मुताबिक़, साल 2024 तक पाकिस्तान पर कुल बाहरी क़र्ज़ क़रीब 80 प्रतिशत बढ़कर 17.77 ट्रिलियन रुपये हो जाएगा. जो कि इस समय 10.44 ट्रिलियन रुपये है। वहीं पाकिस्तान पर घरेलू क़र्ज़ भी साल 2024 तक 30 प्रतिशत बढ़कर 26.8 ट्रिलियन रुपये हो जाएगा, जो कि वित्त वर्ष 2019 तक 20.57 ट्रिलियन रुपये है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन एक विस्तारवादी मानसिकता वाला देश है। चीन की किसी भी देश से दोस्ती सिर्फ़ आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक स्वार्थ के लिए ही होती है। जैसा कि आप जानते हैं कि 1962 में चीन ने किस तरह से भारत के विश्वास को तोड़ा था और भारत पर आक्रमण कर लाखों वर्ग किलोमीटर की ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया था। चीन ने बेल्ट एण्ड रोड और सीपीईसी जैसे प्रोजेक्ट के ज़रिये पाकिस्तान को धीरे-धीरे क़र्ज़ के जाल में फंसा लिया है, और हो सकता है कि पाकिस्तान यदि क़र्ज़ ना चुका पाए तो चीन उसके किसी हिस्से पर कब्ज़ा कर ले।
 
ऐसा इसलिए, क्योंकि चीन पाकिस्तान के रास्ते खाड़ी के देशों तक अपनी व्यापारिक घुसपैठ करने की जुगाड़ में है। चीन के बेल्ट एण्ड रोड और सीपीईसी जैसे प्रोजेक्ट्स चीन की इसी रणनीति का एक हिस्सा हैं। तेल के विशाल भण्डार वाले देशों तक चीन अपनी व्यापारिक पहुंच के लिए पाकिस्तान को एक ज़रिया बनाए हुए है। और यदि पाकिस्तान आने वाले समय में चीन का क़र्ज़ चुकाने में नाकामयाब रहा, तो विस्तारवाद में यक़ीन रखने वाला चीन मिडिल ईस्ट में अपने व्यापारिक हितों की पूर्ति के लिए पाकिस्तान के किसी हिस्से पर कब्ज़ा कर सकता है।