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अब केवाईसी के नाम पर साइबर फ्रॉड करने वालों के टारगेट पर हैं आप!

Monday - October 7, 2019 10:37 am , Category : WTN HINDI
अनजान व्यक्ति को कॉल पर ना बताएं अपनी निजी जानकारियां
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साइबर फ्रॉड से बचने के लिए करें ‘यह’ उपाय

OCT 07 (WTN) – मोबाइल इंटरनेट क्रान्ति आने के बाद से भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में स्मार्टफ़ोन के ज़रिये वित्त और बैंकिंग सम्बन्धित कार्य करना अब आम बात हो गई है। बैंक या वित्त सम्बन्धित जिन कामों के लिए पहले आपको घण्टों लाइन में लगना पड़ता था, अब वे ही काम चन्द सेकेण्ड में आप अपने मोबाइल या कम्प्यूटर के ज़रिये कर सकते हैं। लेकिन इंटरनेट का प्रयोग बढ़ने से साइब्रर फ्रॉड के शिकार लोगों की संख्या भी दिनों-दिन बढ़ती जा रही है।

देखा गया है कि लापरवाही के कारण मोबाइल फ़ोन यूज़र्स साइबर फ्रॉड का शिकार होते हैं। यूज़र्स की इन्हीं ग़लतियों का फ़ायदा साइबर फ्रॉड करने वाले उठाते हैं। दरअसल, अब साइबर फ्रॉड करने वाले ओटीपी या बैंक सम्बन्धित डिटेल मांगने के बजाय अब केवाईसी की डिटेल पूछने के बहाने बैंक उपभोक्ताओं के साथ फ्रॉड कर रहे हैं।

साइबर फ्रॉड करने वाले बैंक के उपभोक्ताओं या पेमेण्ट वॉलेट यूज़र्स से केवाईसी के नाम पर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करा रहे हैं। जैसी ही यूज़र इस ऐप को डाउनलोड करता है, फ्रॉड करने वाले मोबाइल रिमोट पर लेकर यूज़र के बैंक अकाउण्ट को हैक कर लेते हैं। दरअसल, साइबर फ्रॉड करने वाले इस जालसाज़ी को इतने प्रोफेशनल तरीक़े से अंजाम दे रहे हैं, कि उनके जाल में पढ़े लिखे समझदार लोग भी फंसते जा रहे हैं।
 
इस तरह का फ्रॉड करने वाले अपने टारगेट यूज़र के पास बड़े ही प्रोफेशनल तरीक़े से कॉल करते हैं। फ्रॉड करने वाले कॉलर अपने टारगेट को बातों में इतना फुसला लेते हैं कि वो उनकी बातों पर विश्वास करने लगता है। कॉलर उन्हें बातों ही बातों में विश्वास दिला देता है कि वो किसी बैंक या पेमेंट ऐप वाली कम्पनी से बात कर रहा है। बातों-बातों में कॉलर अपने टारगेट से केवाईसी अपडेट करने के लिए कहता है, और अपनी बातों से टारगेट को यकीन दिला देता है कि यदि केवाईसी को अपडेट नहीं किया तो वे कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं कर पाएगा।
 
फ्रॉड करने वाले कॉलर अपने टारगेट को कहते हैं कि यदि उन्होंने एक ऐप डाउनलोड कर लिया तो उन्हें केवाईसी अपडेट करने की ज़रूरत नहीं है, और वे फ़ोन पर ही केवाईसी अपडेट कर सकेंगे। कॉलर की बातों को मानकर यदि आपने रिमोट एक्सेस ऐप को डाउनलोड किया और कॉलर के बातों में आकर उस ऐप में कुछ परमिशन्स दीं, तो आपके मोबाइल पर कॉलर का पूरी तरह से कन्ट्रोल हो जाएगा।
 
कॉलर की बातों में आने के बाद आप जैसी ही उस सम्बन्धित ऐप में केवाईसी की औपचारिकताएं पूरी करते हैं, कॉलर आपसे कहता है कि अब अपने बैंक अकाउण्ट या पेमेण्ट वॉलेट से कोई भी ट्रांजैक्शन करके चेक कर लें कि केवाईसी हुई है या नहीं?

यदि आपने फ्रॉड कॉलर की बातों में आकर ऐसा कर लिया तो आपके बैंक अकाउण्ट या पेमेण्ट वॉलेट से आपकी निजी जानकारियां हासिल कर चुका कॉलर आपके बैंक अकाउण्ट या पेमेण्ट वॉलेट से ऑनलाइन शॉपिंग करके या फ़िर मनी ट्रांसफर करके आपको आर्थिक क्षति पहुंचा सकता है। साफ़ है कि साइबर फ्रॉड के इस तरीक़े से फ्रॉड करने वाले आपको बातों में फंसाकर आपका मोबाइल हैक कर लेते हैं और आपको आर्थिक क्षति पहुंचा सकते हैं।
 
यदि आप इस तरीक़े के फ्रॉड से बचना चाहते हैं तो आपकी सावधानी और जागरुकता ही आपको इससे बचा सकती है। सबसे पहले तो मोबाइल फ़ोन पर किसी भी तरह की लापरवाही से बचें। कोई भी यदि आपको कॉल करके कहता है कि वो किसी बैंक या पेमेण्ट वॉलेट कम्पनी की तरफ़ से कॉल कर रहा है तो इस पर यक़ीन ना करें। बैंक या वॉलेट कम्पनियां कभी भी कॉल करके किसी भी उपभोक्ता की निजी जानकारियों नहीं मांगती हैं।
 
हमारी आपको सलाह है कि अपने कम्प्यूटर सिस्टम में इंटरनेट सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर रखें और स्मार्टफ़ोन में बैंक और वित्त सम्बन्धित हर ऐप का पासवर्ड काफ़ी स्ट्रॉन्ग बनाएं। समय-समय पर अपने सिस्टम के सॉफ्टवेयर और स्मार्टफ़ोन में ऐप को अपडेट रखें। कभी भी किसी को भी अपनी निजी जानकारियां सोशल मीडिया के ज़रिये शेयर ना करें।

याद रखिये कि साइबर फ्रॉड करने वाले तब तक आपको किसी भी तरह की आर्थिक क्षति नहीं पहुंचा सकते हैं, जब तक कि आप लापरवाही नहीं बरतते हैं। जैसे ही आपने लापरवाही बरती, आपकी इसी लापरवाही का फ़ायदा साइब्रर फ्रॉड करने वाले उठा लेते हैं। इंटरनेट क्रान्ति से आपका जीवन काफ़ी सुलभ हुआ है, क्योंकि आपके कई काम बिना किसी परेशानी के तुरन्त ही सेकेण्डों में स्मार्टफ़ोन और कम्प्यूटर के ज़रिये हो जाते हैं, लेकिन इसी इंटरनेट पर लापवाही और नासमझी बरतने पर आपको परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।